
1) जो कतराकर निकल जाते थे कभी
मरने पर मेरे
वही बेजान शरीर को हिला हिला कर
पूछ रहे हैं यार तू बोलता क्यों नहीं अभी…
2) मेहनत और लगन की सीढ़िया चढ़कर जाने वाले को
हमने शिखर तक
पहुचते देखा
लिफ्ट पर जाने वाले कहाँ
पहुंचे
ये हममे से किसी ने नहीं देखा…
3) जिसके दिल में जज्बा-ए-जुनून
और बाजुओं में ताकत हो कोशिशों की
फिर क्या मजाल मंजिल की
कदम उसकी न चूमे…। 00
– श्याम कुमार राई
” सलुवावाला”