समकालीन भारतीय साहित्य के सम्पादक बलराम की 75 वें वर्ष की यात्रा पर स्मृति चिन्ह व माल्यार्पण कर किया सम्मानित

जयपुर । राही सहयोग संस्थान के निदेशक प्रबोध गोविल ने विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया कि वरिष्ठ साहित्यकारों के सम्मान स्वरूप अमृतोत्सव की शृंखला में जाने माने लेखक व साहित्य अकादमी, दिल्ली की पत्रिका ‘समकालीन भारतीय साहित्य’ के सम्पादक बलराम की 75 वें वर्ष की यात्रा पर स्मृति चिन्ह व माल्यार्पण कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित साहित्यकारों ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व के विभिन्न पक्षों पर प्रकाश डाला। प्रबोध गोविल ने स्वागत उद्बोधन के दौरान उनके सम्पादन में उनकी निष्पक्षता को रेखांकित किया वहीं दुर्गाप्रसाद अग्रवाल ने बलराम की कहानी संग्रह ‘क़लम हुए हाथ’ को अपने समय की बेस्ट सेलिंग किताब माना। फ़ारूख आफ़रीदी ने उनकी साहित्यिक यात्रा को स्मरण किया। संस्था अध्यक्ष कविता मुखर ने उनके संस्मरण ‘माफ़ करना यार’ पर अपना वक्तव्य दिया। नंद भारद्वाज ने बलराम के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। संस्था सचिव साकार श्रीवास्तव ने लघुकथा में बलराम के योगदान के महत्व को बताते हुए उनकी बाल मनोविज्ञान पर आधारित लघुकथा ‘दूसरी ग़ुलामी’ और ‘छि: गंदी बात’ का ज़िक्र किया। टीना शर्मा ‘माधवी’ ने उनकी कहानी ‘गोवा में तुम’ की संक्षिप्त समीक्षा की जिसे स्वयं बलराम ने सराहा। अध्यक्षीय उद्बोधन में बलराम ने कहा कि नयी कहानी और पुरानी कहानी के अंतर को समझने के लिए कहनीयों को पढ़ना बहुत ज़रूरी है। ‘कालजयी कहानियाँ आसानी से नहीं मिलतीं। इसके लिए लेखक को पल-पल घुटना होता है,मरना होता है। लेखन में समर्पण ही उसे कालजयी बनाता है’। कार्यक्रम का संचालन राजेंद्र मोहन शर्मा ने किया।

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