महावीर स्वामी जी के उपदेश

dr. j k garg

आज 31 मार्च 2026 को भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक महोत्सव (महावीर जयंती) है

इस अवसर पर-
भगवान महावीर स्वामी का संदेश केवल जैन धर्म के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए कल्याणकारी है। उनके दर्शन का मूल आधार “आत्मवत् सर्वभूतेषु” (सभी जीवों को अपने समान समझना) है।
उनके मुख्य संदेश इस प्रकार हैं:
1. जियो और जीने दो (Live and Let Live)
यह महावीर स्वामी का सबसे प्रसिद्ध संदेश है। उनका मानना था कि जिस तरह हमें अपना जीवन प्रिय है, उसी तरह संसार के हर छोटे-बड़े जीव को भी जीवित रहने का पूरा अधिकार है। हमें किसी को कष्ट पहुँचाने का कोई हक नहीं है।
2. अहिंसा परमो धर्मः (Non-violence is the Supreme Religion)
महावीर स्वामी के अनुसार अहिंसा केवल शारीरिक हिंसा न करना ही नहीं है, बल्कि मन, वचन और कर्म से भी किसी का बुरा न सोचना अहिंसा है।
3. पंच महाव्रत (Five Great Vows)
उन्होंने सुखी और संतुलित समाज के लिए पाँच सिद्धांतों पर जोर दिया:
3/1 सत्य: हमेशा सच बोलें और मधुर बोलें।
3/2 अहिंसा: किसी भी जीव को चोट न पहुँचाएँ।
3/3 अचौर्य (अस्तेय): बिना अनुमति के किसी की वस्तु न लेना (चोरी न करना)।
4/4 ब्रह्मचर्य: अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखना और पवित्र जीवन जीना।
3/5 अपरिग्रह: अपनी जरूरत से ज्यादा वस्तुओं का संग्रह न करना।
4. अनेकांतवाद (Respect for Others’ Viewpoints)
यह संदेश आज के समय में बहुत प्रासंगिक है। इसका अर्थ है कि सत्य के कई पहलू हो सकते हैं। हमें दूसरों के विचारों और दृष्टिकोणों का भी सम्मान करना चाहिए, क्योंकि जरूरी नहीं कि जो हमें सही लगे वही एकमात्र सत्य हो।
5. अपरिग्रह (Non-attachment)
महावीर स्वामी ने सिखाया कि सुख बाहरी वस्तुओं या धन-संपत्ति में नहीं, बल्कि मन की शांति में है। अधिक संग्रह करने की प्रवृत्ति ही लालच और संघर्ष को जन्म देती है।
6. क्षमा (Forgiveness)
उन्होंने “क्षमापना” का संदेश दिया—अर्थात अपनी गलतियों के लिए क्षमा माँगना और दूसरों की गलतियों को माफ कर देना। इससे मन का बोझ हल्का होता है और आपसी बैर समाप्त होता है।
*महावीर भगवान के जन्मोत्सव पर आइए अहिंसा का प्रण लें*
*न मन से ना वचन से और ना ही कर्म से, किसी भी प्राणी मात्र का बुरा न सोचें ना बुरा कहें ना बुरा करे
त्रिशलानंदन, हरिकृतवंदन, जगदानंदन,पूज करे,
भवताप निकंदन,देह सुकंचन, रहित सपंदन नयन धरे,
श्री वीर जिनेशा,नमित सुरेशा,महावीर भगवान रहे,
हे अतिवीर,सन्मति के दायक,वर्धमान पहचान रहे,
जिओ और,जीने दो का,तुमने जग को संदेश दिया,
प्राणी मात्र को,दुख न देना,सबको ये, उपदेश किया,
ये संसार, असार जानकर, दुनियां से मुख मोड़ा है,
चंदन बाला के,बंधन को,आ कर तुमने,तोड़ा है,
सिद्धारथ जी के,नंदन तुम, मां त्रिशला के, लाल रहे,
बालपने में, शक्ति दिखाई,अणुव्रतों को, पाल रहे,
महावीर जन्मोत्सव आया,आज ये फर्ज,निभायेंगें,
वीर की वाणी, को मिल कर,हम घर-घर तक,पहुंचाएंगें,
सर्प चंडकौशिक,ने आकर,तुम पर है,उपसर्ग किया,
दंश सहे हो, शांत रहे हो,दुग्ध धार को बहा दिया,
कर्मजयी तुम, वीरगुणी प्रभु , क्षमा भाव के,धारी हो,
सर्व कर्म के,तुम संहारक,मोक्ष महल अधिकारी हो,
द्वय मुनिराजों,की शंका,बस दर्शन से ही,दूर हुई,
ग्वाले के,घर में प्रगटे तो, मन्नत सारी, पूर्ण हुई
कार्तिक कृष्ण,अमावस को तुमने, ऐसा चमकाया है,
भक्ति भाव में, हुये मगन, लोगों ने दीप जलाया है
टीले वाले,बाबा हो या,महावीर हो, अतिवीरा,
तुमको जपने, से मिट जाते,रोग शोक, सब गंभीरा…
बाल ब्रह्मचारी,तुम जिनवर, हम भक्तों की जान रहे
अंतिम शासन,नायक प्रभुवर, जिन शासन की,शान रहे,
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