राज्यसभा में भी सिन्धी सांसद का हो मनोनयन

सिंधी भाषा मान्यता दिवस के अवसर राष्ट्रीय ऑनलाइन गोष्ठी में आया प्रस्ताव
अजमेर 9 अप्रेल। सिंधी ग्लोबल एवं सिंध इतिहास व साहित्य शोध संस्थान के तत्वाधान में ‘सिंधी मान्यता दिवस (10 अप्रैल) की पूर्व संध्या पर’ एक राष्ट्रीय ऑनलाइन गोष्ठी “असां जी मातृभाषा असां जी सुजाणप (हमारी मातृभाषा हमारी पहचान)” का आयोजन किया गया।
संयुक्त सिंधी लोकमंच, लखनऊ के पटेल दास हरवाणी ने कहा कि सिन्ध में भाषा की मान्यता के लिये सिन्धी साहित्यकारों के साथ ब्रिटिश कमिश्नर की बैठक का आयोजन किया गया और सिन्ध में अरबी सिन्धी, हटवाणका लिपि के शब्दों का चयन कर लिपि तैयार करवाई जिसको सरकारी मान्यता के साथ व्यापार में भी उपयोग किया गया। स्वतंत्रता के पश्चात् देवनागिरी लिपि को मान्यता मिल रही थी परन्तु इतिहास अरबी सिन्धी में भी उपलब्ध होने के कारण भारत सरकार द्वारा 10 अप्रेल 1967 को अरबी सिन्धी व देवनागिरी में मान्यता मिली है। वर्तमान परिस्थिितियों में युवा पीढ़ी को देवनागिरी में ही अध्ययन कराने से भाषा व संस्कृति का संरक्षण मिला है।
कोल्हापुर के साहित्यकार मुरलीधर चंादवाणी ने कहा कि आज का विद्यार्थी सिन्धी भाषा का अध्ययन करने के लिये तैयार है परन्तु देवनागिरी के लिये पढाई से जुडा है। सभी समाजों को अपनी अपनी भाषा में अध्ययन से पहचान मिली है परन्तु सिन्ध प्रांत नहीं होने के कारण भी सिन्धी भाषा को अध्ययन कराना है और सिन्धी में ही वार्ता करनी चाहिये। चंादवाणी ने सिन्धी भाषा के महत्व के गीत भी प्रस्तुत किये।
भारतीय सिन्धू सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेन्द्र कुमार तीर्थाणी ने कहा कि संगठन की ओर से सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक संगठनों के सहयोग से युवाओं को जोडने भाषा व संस्कृति के लिये सिन्धी बाल संस्कार शिविर, राष्ट्रीय सिन्धी भाषा विकास परिषद के सिन्धी भाषा के कोर्स से युवाओं को जोडा जा रहा है। राज्य स्तरीय सिन्धु महाकुम्भ में भारत सरकार से सिन्धी केन्द्रीय विश्वविद्यालय की मांग की गई थी जिसे शीघ्र स्थापित किया जाये। सिन्धु शोधपीठ के माध्यम से सिन्ध के गौरवमयी इतिहास से जुडाव होगा। सभा की ओर से देशभर में संगोष्ठियों के आयोजन हो रहे हैं।
वरिष्ठ पत्रकार एवं महासचिव, सिंधी सेंट्रल पंचायत, अजमेर गिरधर तेजवानी ने कहा कि युवा पीढ़ी को भाषा से जोडने के माध्यमों को बढ़ाना होगा। जिससे शिक्षण व रोजगार के अवसर भी प्राप्त हो। भारत सरकार द्वारा प्राथमिक शिक्षा में मातृभाषा का जुडाव सराहनीय है। समाज को मिलकर प्रयास करने हैं जिससे सिन्धी भाषा को अधिक उपयोग हो।  तेजवानी ने कहा कि वर्तमान में सिन्ध प्रदेश हमारे साथ नहीं है इसलिये महामहीम राष्ट्रपति से एक सिन्धी भाषी को राज्यसभा में मनोनयन किये जाने की मांग करते हैं।
संचालन करते हुये सिंध इतिहास व साहित्य शोध संस्थान के अध्यक्ष कंवल प्रकाश किशनानी ने कहा कि यह गोष्ठी आयोजन से देश दुनिया में निवास करने वाले समाज बन्धु व युवा मातृभाषा के महत्व को समझें। समस्त इतिहास व संस्कृति को जानकारी देने के लिये संस्थान में पूरा साहित्य एकत्रित किया जा रहा है और अलग अलग भाषा में उनका लिपिबद्ध किया जा रहा है। नई पीढ़ी के लिये मिशन सिन्धी ग्लोबल के लिये एकत्रित सामग्रियां 9251170059 पर भिजवा सकते हैं।
कंवल प्रकाश किशनानी
9829070059

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