साहित्यिक अभिव्यक्ति का सशक्त अवसर प्रदान कर रहा है संपर्क संस्थान
जयपुर । संपर्क साहित्य संस्थान की साहित्यिक गोष्ठी ‘शब्दोत्सव’ का भव्य आयोजन जवाहर सर्किल स्थित इटरनल हॉस्पिटल सभागार में समारोहपूर्वक सम्प्पन हुआ ।‘शब्दोत्सव’ मासिक कार्यक्रम की कड़ी में साहित्य के वरिष्ठ हस्ताक्षर फारूक आफरीदी, हिन्दी प्रचार प्रसार के कुलसचिव अविनाश शर्मा संपर्क संस्थान अध्यक्ष अनिल लढ़ा , साँसों का निनाद की लेखिका डॉ. आरती भदौरिया, संपर्क संस्थान की महासचिव समन्वयक रेनू शब्दमुखर एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. नीलम कालरा मंचासीन रहे।
संपर्क साहित्य संस्थान द्वारा आयोजित यह मासिक साहित्यिक गोष्ठी अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुई, जिसमें साहित्य, संवेदना एवं स्वास्थ्य जागरूकता का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
कार्यक्रम के प्रारंभ में संस्थान के अध्यक्ष अनिल लढ़ा ने सभी अतिथियों एवं साहित्यप्रेमियों का आत्मीय स्वागत करते हुए संस्थान की गतिविधियों, उद्देश्यों एवं साहित्यिक प्रयासों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने साहित्य को समाज की चेतना का आधार बताते हुए सभी को इससे निरंतर जुड़े रहने का संदेश दिया।
इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार फारूक अफरीदी ने अपने सशक्त उद्बोधन में संपर्क संस्थान के साहित्यिक अवदान की सराहना करते हुए आज की कार्यक्रम की भव्यता पर प्रकाश डाला और
रेनू शब्दमुखर के साहित्यिक सफर की सराहना करते हुए कहा कि वर्ष 2018 से प्रारंभ हुआ यह सृजनात्मक पथ आज देश-विदेश तक अपनी पहचान बना चुका है। उन्होंने संपर्क साहित्य संस्थान को बधाई देते हुए कहा कि यह मंच विशेष रूप से महिलाओं को साहित्यिक अभिव्यक्ति का सशक्त अवसर प्रदान कर रहा है, जिससे वे निरंतर नई दिशा में अग्रसर हो रही हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि संपर्क संस्थान द्वारा आयोजित साहित्यिक कार्यक्रम सदैव नवीनता, गुणवत्ता और सार्थकता का संदेश देते हैं।
इस अवसर पर प्रख्यात साहित्यकार डॉ. आरती भदौरिया के काव्य संग्रह “साँसों का निनाद” पर गहन एवं प्रभावशाली समीक्षा में वरिष्ठ
साहित्यकार डॉ. कंचना सक्सेना एवं रेनू शब्दमुखर के द्वारा समीक्षा में काव्य के भावपक्ष, शिल्प सौंदर्य, भाषा की सहजता एवं विषयों की विविधता को अत्यंत सशक्त रूप में रेखांकित किया गया।
उन्होंने इस काव्य संग्रह को मानवीय संवेदनाओं, राष्ट्रप्रेम, प्रकृति, माँ-पिता के स्नेह, नारी चेतना एवं आध्यात्मिक भावभूमि का समृद्ध प्रतिबिंब बताया।
विशिष्ट अतिथि डॉ. स्वाति नायक (वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट एवं रीनल ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ) ने अपने प्रेरक उद्बोधन में विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर प्रकाश डालते हुए उपस्थित जनसमूह को जागरूक किया। इस दौरान आशीष, सागर की सक्रिय उपस्थिति के साथ श्रोताओं ने उत्साहपूर्वक प्रश्न पूछे तथा संवाद के माध्यम से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
इस साहित्यिक गोष्ठी में अनेक गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें प्रमुख रूप से जुगल प्रजापति ,अविनाश शर्मा,रविन्द्र सोमानी, भूपेंद्र सिंह, संजय माथुर,रामनिवास बाना,योगेन्द्र सिंह राठौड़,राधेश्याम भारतीय,मुकेश
अग्रवाल,नवदीप चुग,डॉ.रेखा गुप्ता, नूतन गुप्ता वर्षा गुप्ता एवं अन्नपूर्णा शुक्ला शामिल रहे।
कार्यक्रम के अंतर्गत डॉ. आरती भदौरिया की कविताओं का भावपूर्ण काव्य-पाठ प्रस्तुत किया गया, जिसमें उनके काव्य के सतरंगी विषय-राष्ट्रप्रेम, प्रकृति, माँ-पिता, मानवीय संवेदनाएँ एवं जीवन के विविध आयाम-संगीतात्मक एवं काव्यात्मक रूप में श्रोताओं तक पहुँचाए गए। उपस्थित रचनाकारों ने भी अपनी प्रस्तुति से वातावरण को सरस एवं भावमय बना दिया।
कार्यक्रम का कुशल एवं प्रभावशाली संचालन विजयलक्ष्मी जांगिड़ द्वारा किया गया, जिन्होंने पूरे आयोजन को सुंदर प्रवाह एवं गरिमा प्रदान की।