अजमेर: अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश (क्रम 4), अजमेर की पीठासीन अधिकारी ऋतु मीणा ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए, तलवार से प्राणघातक हमला करने के आरोपी राजेंद्र सिंह उर्फ केजीएफ को साक्ष्यों के अभाव में बाइज्जत बरी कर दिया है। इस मामले में अभियुक्त की ओर से पूर्व लोक अभियोजक विवेक पाराशर, एडवोकेट जितेश धनवानी और रोहन पाराशर ने प्रभावी पैरवी की। बचाव पक्ष ने न्यायालय में मुख्य तर्क रखा कि प्रकरण में सभी आहतगण एवं स्वतंत्र गवाहों द्वारा अभियुक्त के माध्यम से चोट पहुँचाना प्रमाणित नहीं किया गया है, साथ ही घटनास्थल पर अभियुक्त की उपस्थिति से भी पूरी तरह इनकार किया गया, जिससे अभियोजन का मामला बेहद कमजोर साबित हुआ।
सुनवाई के दौरान सभी मुख्य गवाहों ने अभियुक्त को पहचानने से साफ इनकार कर दिया, जिस पर बचाव पक्ष ने दलील दी कि मात्र पुलिसकर्मियों के बयानों के आधार पर किसी भी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, अभियोजन पक्ष कथित वारदात में इस्तेमाल की गई तलवार को न्यायालय के समक्ष पेश करने में भी पूरी तरह विफल रहा। बचाव पक्ष के इन तर्कों से सहमत होते हुए और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद, न्यायालय ने यह माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के विरुद्ध संदेह से परे आरोप सिद्ध करने में नाकाम रहा है। फलस्वरूप, अदालत ने राजेंद्र सिंह उर्फ केजीएफ को समस्त गंभीर आरोपों से दोषमुक्त करते हुए बरी करने का आदेश जारी किया।