सरकार, ADA और SDO के विरुद्ध एकपक्षीय कार्यवाही के आदेश
अजमेर/पुष्कर: तीर्थराज पुष्कर की स्वच्छता और पवित्र सरोवर की बदहाली को लेकर दायर जनहित याचिका पर आज सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट (पुष्कर), श्री विमल कुमार व्यास की अदालत में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन की बेरुखी पर कड़ा रुख अपनाया है।
अजमेर/पुष्कर: तीर्थराज पुष्कर की स्वच्छता और पवित्र सरोवर की बदहाली को लेकर दायर जनहित याचिका पर आज सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट (पुष्कर), श्री विमल कुमार व्यास की अदालत में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन की बेरुखी पर कड़ा रुख अपनाया है।अधिकारियों और अधिवक्ताओं की अनुपस्थिति पर ‘एकपक्षीय कार्यवाही’ आज हुई सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि न्यायालय द्वारा जारी किए गए नोटिस की विधिवत तामील होने के बावजूद सरकार (जिला कलेक्टर, अजमेर), आयुक्त (अजमेर विकास प्राधिकरण/ADA) और उपखंड अधिकारी (SDO, पुष्कर) की ओर से न तो कोई जिम्मेदार अधिकारी उपस्थित हुआ और न ही उनकी पैरवी के लिए कोई अधिवक्ता अदालत पहुँचा। अधिकारियों एवं उनके अधिवक्ताओं की इस सामूहिक अनुपस्थिति की वजह से न्यायालय द्वारा इन तीनों पक्षों के विरुद्ध एकपक्षीय (Ex-parte) कार्यवाही करने के आदेश पारित किए गए हैं। सुनवाई के दौरान केवल नगर परिषद पुष्कर की ओर से अधिवक्ता ने उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा।
सफाई के प्रति गंभीर नहीं ‘सरकार’, ‘ADA’ और ‘SDO’ याचिकाकर्ता अधिवक्ता तेजस्विनी पाराशर एवं अंजलि मुखिया की ओर से पैरवी कर रहे पूर्व लोक अभियोजक विवेक पाराशर, रोहन पाराशर एवं जितेश धनवानी ने कोर्ट में तर्क दिया कि पुष्कर जैसे अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्थल की दुर्दशा पर भी सरकार, ADA और SDO पुष्कर का रवैया पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना है। अदालत से नोटिस की तामील के बावजूद न आना यह स्पष्ट करता है कि जिम्मेदार निकाय स्वच्छता और करोड़ों लोगों की आस्था के प्रति कतई गंभीर नहीं हैं।
अगली सुनवाई 30 अप्रैल को पवित्र सरोवर के पारिस्थितिकी तंत्र और घाटों पर पसरी गंदगी को लेकर चल रहे इस कानूनी संघर्ष में अब अगली सुनवाई 30 अप्रैल 2026 को तय की गई है। इस कानूनी प्रहार ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।