
बकरा ईद (ईद-उल-अजहा) इस्लाम धर्म को मानने वालो का प्रमुख पर्व है जो त्याग, समर्पण और अल्लाह के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है । यह पर्व पैगंबर इब्राहिम द्वारा अपने पुत्र हज़रत इस्माइल की अल्लाह की राह में दी जाने वाली सर्वोच्च कुर्बानी की याद में मनाया जाता है ।बकरा ईद से जुड़ी बातें निम्न हैं।
बकरा ईद का पर्व सिखाता है कि व्यक्ति को अल्लाह के हुक्म पर अपनी सबसे प्यारी चीज भी त्यागने के लिए तैयार रहना चाहिए। धार्मिक मान्यता के मान्यता के अनुसार, जब पैगंबर इब्राहिम अपने बेटे की कुर्बानी देने लगे, तो अल्लाह ने उनकी निष्ठा से प्रसन्न होकर बेटे की जगह एक बकरे को भेज दिया ।
बकरा ईद पर दिए गए जानवर के मांस को तीन बराबर हिस्सों में बांटा जाता है — एक हिस्सा परिवार के लिए, दूसरा रिश्तेदारों/मित्रों के लिए और तीसरा गरीबों व जरूरतमंदों के लिए रक्खा जाता है ।
यह पर्व समाज के सभी वर्गों, विशेषकर जरूरतमंदों की मदद करने और आपसी प्रेम बढ़ाने का संदेश देता है。त्योहार के दिन सुबह ईदगाह या मस्जिद में सामूहिक नमाज अदा की जाती है और उसके बाद ही कुर्बानी की रस्म पूरी की जाती है। ईद अल-अज़हा – रमजान के पवित्र महीने की समाप्ति के लगभग 70 दिनों बाद मनाया जाता है।
बकरीद को ईद-उल-अजहा, ईद उल जुहा, अथवा ईद उल बकरा के नाम से भी जाना जाता है । निःसंदेह यह त्योहार त्याग और इंसानियत का प्रतीक है ईद-उल-अधा का अर्थ है कुर्बानी का त्योहार। देश के अनुसार, ईद-उल-अधा का उत्सव दो से चार दिनों तक चल सकता है।
कुर्बानी तभी कुर्बानी होती है जब कोई अपनी किसी प्रिय वस्तु का त्याग करता है। इब्राहिम ने यह सिद्ध कर दिया था कि ईश्वर के प्रति उनका प्रेम सर्वोपरि है।
बकरा ईद देश में 28 मई 2026 को मनाई जाएगी।
डॉ जे के गर्ग
पूर्व संयुक्त निदेशक कालेज शिक्षा