नई दिल्ली, 23 जून, 2026- एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के ताजा विश्लेषण के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को हुए समझौते के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार समायोजन के एक नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं। जहां होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने से ऊर्जा का प्रवाब में सुधार और बाजार की धारणा मजबूत करने में मदद मिलने की संभावना है, वहीं, बाजार प्रतिभागी निरंतर यह आंकलन कर रहे हैं कि बाजार के सामान्य होने और इनवेंटरी को फिर से भरने में समय लगेगा।
नई दिल्ली में हाल ही की एक गोलमेज बैठक के दौरान एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के विशेषज्ञों ने यह बात रेखांकित की कि ये घटनाक्रम, विविधीकृत आपूर्ति श्रृंखला, लचीले इंफ्रास्ट्रक्चर और रणनीतिक स्रोत तक पहुंच विशिष्ट महत्व के हैं। अपस्ट्रीम बाजार, एलएनजी व्यापार एवं समुद्री लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में बदलती भू-राजनीति वास्तविकताओं के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता ही लंबे समय की ऊर्जा सुरक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात बनकर उभरी है।
बदलते वैश्विक हालात के अनुसार ऊर्जा बाजारों का लचीलापनः होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बंद होने के चलते खाड़ी क्षेत्र में लिक्विड्स (तरल ईंधन) उत्पादन में प्रतिदिन 15 मिलियन बैरल की कमी आई। हालांकि, चीन और जापान द्वारा कच्चे तेल का आयात तेजी से घटाने और अमेरिका से अधिक निर्यात सहित आक्रामक इनवेंटरी और वैश्विक स्तर पर मांग प्रबंधन के कारण कीमत में उतार-चढ़ाव आश्चर्य ढंग से सीमित रहा।
एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के उपाध्यक्ष एवं तेल बाजारों, ऊर्जा एवं मोबिलिटी के लिए अनुसंधान के प्रमुख जिम बुरखर्द ने कहा, “होर्मुज जलडमरूमध्य का प्रभावी तौर पर बंद होना, इतिहास में तेल आपूर्ति में सबसे बड़ी बाधा थी। यह असाधारण था और फिलहाल अब भी है, लेकिन जो चीज़ सबसे आश्चर्य में डालने वाली है वह है कीमतों की सीमित प्रतिक्रिया। यदि होर्मुज और खाड़ी क्षेत्र से तेल की आपूर्ति और उत्पादन में सुधार शुरू भी होता है तो इसमें समय लगेगा और जून-जुलाई तक दुनियाभर में तेल के स्टॉक में कमी बनी रहेगी। इसका अर्थ है कि इनवेंटरीज़ के और निम्न स्तरों पर आने से कीमतें बढ़ने का दबाव लौट सकता है।”
अपस्ट्रीम लचीलापन भारत की रणनीतिक अनिवार्यता बनाः वैश्विक अपस्ट्रीम बाजार तेजी से संसाधान सुरक्षा, पोर्टफोलियो विविधीकरण और अनुशासित निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं। भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा अब बुनियादी तौर पर अपस्ट्रीम पहुंच और वैश्विक पोर्टफोलियो विविधीकरण से जुड़ा है।
एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के कार्यकारी निदेशक (अपस्ट्रीम ऊर्जा) निक शर्मा ने कहा, “आगे चलकर, मौजूदा माहौल वैश्विक और भारतीय अपस्ट्रीम क्षेत्रों दोनों के लिए एक स्पष्ट दिशा परिवर्तन को मजबूत करता है। इसमें लचीलापन, मूल्य का मुख्य पैमाना बनता जा रहा है। सिर्फ बड़े पैमाने या लागत कम करने के बजाय स्थिर संसाधनों तक पहुंच, परियोजनाओं की की तेजी से पूरी होने की समय सीमाएं और विविधीकृत आपूर्ति पोर्टफोलियो को अधिक महत्व दिया जा रहा है।”
भारत का एलएनजी बाजार जबरदस्त लचीलापन दिखाता हैः हार्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विल एलएनजी आपूर्ति करीब 17 प्रतिशत बाधित हुई। हालांकि, विश्वक के चौथे सबसे बड़े एलएनजी खरीदार भारत ने उल्लेखनीय लचीलापन दिखाया। ओमान, अमेरिका, नाइजीरिया और अंगोला को शामिल कर आपूर्ति स्रोतों का सफलतापूर्वक विस्तार करने से भारत के एलएनजी आयात पर न्यूनतम प्रभाव पड़ा जो अप्रैल और मई, 2026 में साल दर साल क्रमशः केवल 5 और 2 प्रतिशत गिरा।
एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के प्रिंसिपल रिसर्च एनालिस्ट जोहान उतामा ने कहा, “उम्मीद है कि भविष्य में आने वाली रुकावटों को कम करने के लिए भारत एलएनजी खरीद के इन अलग अलग तरीकों में से कुछ को बनाए रखेगा जिससे उसकी लंबी अवधि की खरीद रणनीतियों पर असर पड़ सकता है।”
शिपिंग क्षेत्र ने व्यापार के बदले हुए रास्तों के हिसाब से खुद को ढालाः इस टकराव ने होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले आवागमन को बुरी तरह प्रभावित किया जिससे जहाजों की आवाजाही घटकर टकराव से पहले के स्तर की मात्र 10 प्रतिशत रह गई। इसके बावजूद, ऊर्जा प्रणाली ने लाल सागर के जरिए वैकल्पिक मार्ग अपनाकर और होर्मुज के पूर्व में शिप टु शिप ट्रांसफर को बढाकर खुद को ढाला जिससे पश्चिम एशिया का कच्चे तेल का निर्यात जून में बढ़कर 10 मिलियन बैरल प्रतिदिन पर पहुंचाने में मदद मिली।
एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के निदेशक और समुद्र में लिक्विड बल्क, कमोडिटीज के वैश्विक प्रमुख बेंजामिन टैंग ने कहा, “पिछले कुछ महीनों ने उत्पादकों और उपभोक्ताओं दोनों की ही परिस्थितियों के अनुसार ढलने की क्षमता को उजागर किया है। इस उद्योग की आपूर्ति का मार्ग बदलने, लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाने और दूसरे स्रोतों से तेल हासिल करने की क्षमता ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में आने वाली भारी रुकावट को कम करने में मदद की है जो और भी गंभीर हो सकती थी।”