साहित्य को सही दिशा देने की ज़रूरत – इकराम राजस्थानी

जयपुर । राही सहयोग संस्था  के निदेशक प्रबोध गोविल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया कि ‘राही सहयोग संस्थान’ और ‘राजस्थान प्रौढ़ शिक्षा समिति’ के संयुक्त तत्वावधान में सुप्रसिद्ध कवि, गीतकार, ग़ज़लकार और गंगा- जमनी तहज़ीब के संवाहक इकराम राजस्थानी के कृतित्व और व्यक्तित्व पर विशद चर्चा का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के आरम्भ  में संस्थान की नयी कार्यकारिणी की घोषणा व निर्वाचित पदाधिकारियों को दायित्व एवं निष्ठा की शपथ दिलाई गयी।अध्यक्ष कविता मुखर, साहित्य प्रभाग के प्रभारी साकार श्रीवास्तव, सह प्रभारी नरेंद्र लाटा,  कोष प्रभारी प्रो नीरज रावत, मीडिया एवं प्रचार-प्रसार शेफाली चौहान, कमल मेहता, अरुण ठाकर व निरुपमा चतुर्वेदी नियुक्त किए गए। इसके अतिरिक्त संरक्षक मण्डल में प्रबोध गोविल के अतिरिक्त नंद भारद्वाज, दुर्गा प्रसाद अग्रवाल, फ़ारूख आफ़रीदी, राजेंद्र मोहन शर्मा,डॉ सुषमा शर्मा और डॉ कृष्णा रावत शामिल हुए।
अध्यक्ष कविता मुखर ने बताया कि कार्यक्रम के दूसरे सत्र में इकराम राजस्थानी के व्यक्तित्व व कृतित्व से सबंधित चर्चा में भाग लेते हुए सर्वप्रथम ग़ज़लकारा निरुपमा चतुर्वेदी ने उनके कविता सम्बन्धित रचनाकर्म और व्यक्तित्व की खूबियों पर प्रकाश डाला। इकराम के सुपुत्र वरिष्ठ  शिक्षाविद् और गीतकार फ़ीरोज़ खान ने अपने पिता के साहित्य के साथ-साथ उनके सामाजिक और पारिवारिक दायित्वों के अनुपालन में संजीदगी और कर्तव्य निष्ठा से परिचित करवाया। प्रसिद्ध उपन्यास कारण प्रेमलता सोनी ने राजस्थानी के राजस्थानी भाषा प्रेम और उनकी मायण भाषा में लिखी रचनाओं  व लोकगीतों के बारे में बात की।
युवा साहित्यकार कमल मेहता ने इकराम की कविता के दार्शनिक व क्रांतिकारी पक्ष को उद्घाटित किया।युवा पत्रकार टीना शर्मा व राजेंद्र मोहन शर्मा , कृष्णा  रावत ,भाग्यम शर्मा ,मनमोहन शर्मा, वरिष्ठ साहित्यकार फ़ारुख आफ़रीदी अपने संस्मरण सुनाए। प्रसिद्ध साहित्यकार नन्द भारद्वाज  ने कहा कि इकराम राजस्थानी जी ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनायी है और लोक सम्वेदना से जुड़ने का जो महनीय कार्य किया है वह अद्भुत है।प्रबोध गोविल ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इकराम राजस्थानी जी देश की अनमोल धरोहर हैं।
अंत में कार्यक्रम के अध्यक्ष इकराम राजस्थानी ने अपने जीवन अनुभव साझा करते हुए अपने साहित्यिक सफ़र की झलकियां और अपनी रचनाएँ  प्रस्तुत कीं।उन्होंने कहा कि साहित्य को सही दिशा देने की ज़रूरत है। कार्यक्रम का संचालन साकार श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम में जयपुर  के साहित्य अनुरागियों ने ही नहीं अपितु प्रदेश के अन्य भागों से पधारे उनके मित्र, परिजन व शुभ चिंतकों ने भी भाग लिया। अंत में डॉ सुषमा शर्मा ने सभी आगंतुक साहित्यकारों का आभार व्यक्त किया।

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