
देकर अपनी जवानी के बहुमूल्य वो सारे पल
खरीदीं है हमने थोड़ी सी सरकार की पेंशन,
वृद्ध अवस्था में अपने चाहे साथ दे या ना दे
हमें भूखें रखते नहीं कभी, हमारी यह पेंशन।
दुनियां चाहे जो भी कहे पेंशन के बारे में पर
पेंशन धारकों के लिए सर का ताज है पेंशन,
औरों के समक्ष हाथ फैलाना देते नही कभी
मान-सम्मान की गारंटी है, हमारी यह पेंशन।
जितनी भी करूं गुणगान, खूबियां पेंशन की
कम ही पड़ जाते हैं, खूबियां इस पेंशन की,
ना जाने क्यों अब ऐसा लगने लगा है मुझको
गांव-समाज में सम्मान है, हमारी यह पेंशन।
कभी-कभी दिल में हमारे ये ख्याल आता है
कहीं सरकार बन्द ना कर दें हमारी यह पेंशन,
इसीलिए जमा करते हैं हम प्रमाणपत्र हर वर्ष
ताकि मिलती ही रहें हमें, हमारी यह पेंशन।
गोपाल नेवार,’गणेश’, सलुवा खड़गपुर, प.बं।