इतिहास विभाग में राती घाटी युद्ध पर हुआ विस्तार व्याख्यान आयोजित

बीकानेर ने राव जैतसी ने लहराया राती घाटी युद्ध से विजय का परचम, किया पश्चिमी सीमा को सुरक्षित : चक्रवर्ती नारायण श्रीमाली
मध्यकालीन भारत में बीकानेर के राव जैतसी ने राती घाटी युद्ध के उद्घोष के ज़रिये बाहरी ताकतों के विरुद्ध विजय का परचम लहराया| ये विचार महाराजा गंगा सिंह विश्वाविद्यालय के इतिहास विभाग द्वारा आयोजित विस्तार व्याख्यान में बोलते हुए बीज वक्ता डॉ. चक्रवर्ती नारायण श्रीमाली ने व्यक्त किये| राजकीय अभियांत्रिकी महाविद्यालय के ड़ॉ. श्रीमाली ने राती घाटी युद्ध पर स्वयं द्वारा लिखित पुस्तक से युद्ध की सविस्तार व्याख्या विद्यार्थियों से करते हुए कहा कि बीकानेर की धरती वीर बलिदानियों के रक्त से सिंचिन्त है|
इससे पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. मेघना शर्मा ने स्वागत उद्बोधन में विद्यार्थियों से केंद्र के इतिहास के साथ साथ क्षेत्रीय इतिहास व केवल पाठ्यक्रम तक सीमित ना होकर उसके आसपास के इतिहास के अध्ययन पर भी बल देने का सन्देश दिया |
माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से आरम्भ व्याख्यान कार्यक्रम में विषय प्रवर्तन करते हुए ड़ॉ. गोपाल व्यास ने राती घाटी युद्ध को मध्यकालीन इतिहास के सर्वथा निर्णायक युद्ध में से एक बताया जिसमे बाहरी ताकतें स्थानीय शक्तियों के आगे परास्त हुईं|
मंच संचालन अतिथि शिक्षक डॉ. मुकेश हर्ष द्वारा किया गया तो धन्यवाद ज्ञापन जसप्रीत सिंह द्वारा दिया गया | व्याख्यान पश्चात विद्यार्थियों द्वारा भी मंच से राती घाटी युद्ध पर विचार प्रकट किये गये जिनमे भगवान जोशी, वंदना पुरोहित और संजना सुथार शामिल रहे| डॉ. श्रीमाली का विभाग के सदस्यों द्वारा शॉल, श्रीफल, साफ़े और स्मृति चिन्ह से सम्मान किया गया |
आयोजन में ड़ॉ. रीतेश व्यास, रिंकू जोशी, भगवान दास सुथार, ड़ॉ. संजना चौधरी, सुशीला बिश्नोई, बजरंग कलवानी और उमेश पुरोहित के अलावा स्नातकोत्तर के विद्यार्थी शामिल रहे |

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