विभाजन केवल भूगोल का बंटवारा नहीं, करोड़ों लोगों के दर्द और विस्थापन की कहानी

युवा पीढ़ी आधुनिकता के साथ अपनी मातृभाषा को सहेजने का संकल्प ले

सिंधी समाज ने विस्थापन को कमजोरी नहीं बनने दिया, शिक्षा-व्यापार और समाजसेवा से बनाई नई पहचान – देवनानी

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर विशेष कार्यक्रम आयोजित

     अजमेर, 12 अगस्त। विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद (एनसीपीएसएल) एवं सिंधी संगीत समिति अजमेर के संयुक्त तत्वाधान में बुधवार को होटल मेट्रो-इन में आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए श्री देवनानी ने कहा कि वर्ष 1947 में हुआ भारत का विभाजन दुनिया का सबसे बड़ा मजबूरी का पलायन था।

     विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने विस्थापन के दर्द को बयां करते हुए कहा कि इतिहास के इस काले अध्याय को केवल सरकारी दस्तावेजों या संपत्ति के आंकड़ों से नहीं समझा जा सकता। विभाजन का वास्तविक इतिहास उस वृद्ध की आंखों में है जिसने अपने घर की अंतिम चौखट को देखा, उस मां के दर्द में है जिसने यात्रा के दौरान अपने बच्चे को चुप कराया और उन मौन स्मृतियों में सुरक्षित है जिन्हें लोगों ने अपने दिलों में छुपा कर रखा।

     श्री देवनानी ने समाज के गौरवशाली सफर की सराहना करते हुए कहा कि जिस सिंधी समाज से इतिहास ने उसका भूगोल छीन लिया, उसने अपने कड़े परिश्रम से अपना नया भविष्य निर्मित किया। समाज ने स्वयं को कभी विस्थापित कहकर जीवन की इतिश्री नहीं की, बल्कि शिक्षा, व्यापार, उद्यम और समाजसेवा के बल पर स्वयं को निर्माता के रूप में पुनस्र्थापित किया। अजमेर, जयपुर, जोधपुर सहित देश के अनेक शहरों में समाज ने शून्य से शुरुआत कर राख से भी प्रगति की नई अग्नि प्रज्वलित की है।

     मातृभाषा के संरक्षण पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि भाषा केवल ध्वनि नहीं, बल्कि स्मृति की संरचना होती है। किसी समाज का सांस्कृतिक पतन तब शुरू होता है जब उसकी अगली पीढ़ी पूर्वजों की भाषा बोलना बंद कर देती है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सिंधी भाषा की रक्षा केवल एक समुदाय की मांग नहीं, बल्कि भारत की बहुलतामूलक सभ्यता की रक्षा का प्रश्न है।

     कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं को प्रेरित करते हुए श्री देवनानी ने कहा कि अपनी जड़ों से जुड़े रहना आधुनिकता से पीछे हटना नहीं है। उन्होंने कहा आप विश्व की भाषाएं सीखिए, विज्ञान सीखिए, कृत्रिम बुद्धिमत्ता सीखिए, वैश्विक अर्थव्यवस्था में प्रवेश कीजिए, लेकिन घर लौटकर अपने दादा-दादी की भाषा में उनसे दो शब्द बोलने की क्षमता को आधुनिक जीवन की कीमत मत बनने दीजिए।

     कार्यक्रम संयोजक घनश्याम ठारवानी ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण के साथ किया गया। लोक गायक घनश्याम भगत द्वारा देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति दी गई। स्वामी सर्वानंद विद्या मंदिर के बच्चों ने वंदे मातरम की प्रस्तुति दी व राष्ट्रभक्ति से ओत प्रोत लघु नृत्य नाटिका पेश की। पूर्व पार्षद रमेश चेलानी ने बताया कि इस अवसर पर समाज के प्रतिभाशाली बच्चों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

     मुख्य वक्ता राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद के सदस्य मनीष देवनानी ने नई पीढ़ी को मातृभाषा से जोड़ने की बात कही। सम्राट पृथ्वीराज चौहान महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. हासो दादलानी एवं राजकीय अल्प भाषाई शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान की व्याख्याता लता ठारवानी ने भी विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि झूलेलाल सिंधी सेंट्रल पंचायत के अध्यक्ष राजा डी. थारवानी, समाजसेवी रामचंद्र गुलाबानी, गोविंद खटवानी, विजय शाहानी, चंद्र लखानी, जितेंद्र रंगवानी, अशोक मंगलानी, भगवान वरलानी आदि का सहयोग रहा।

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