गिरनार फाउंडेशन ने ‘सो टू ग्रो’ पहल का तीसरा संस्करण आयोजित किया

इकोलॉजिकल रिस्टोरेशन के लिए 67,000 सीड बॉल्स तैयार कर वितरित किए

जयपुर, अगस्त, 2026: कारदेखो ग्रुप की सीएसआर इकाई, गिरनार फाउंडेशन ने अपनी वार्षिक ‘सो टू ग्रो’ पहल के तीसरे संस्करण का सफलतापूर्वक समापन किया। इस पहल के माध्यम से फाउंडेशन ने सामूहिक प्रयासों के जरिए पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। इकोलॉजिकल रिस्टोरेशन को बढ़ावा देने, हरित आवरण में वृद्धि करने और पर्यावरण संरक्षण में समुदाय की भागीदारी को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित इस एक महीने की गतिविधि के तहत जयपुर और गुरुग्राम में कर्मचारियों, छात्रों, शैक्षणिक संस्थानों, एनजीओ, सरकारी निकायों और पर्यावरण सहयोगियों की संयुक्त भागीदारी से 67,000 सीड बॉल्स तैयार कर वितरित किए गए।

ग्रुप के कर्मचारियों ने सीड बॉल्स बनाने और उनके वितरण की गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेकर इस पहल का नेतृत्व किया। कार्यक्रम के तहत उदयन केयर, महात्मा गांधी गवर्नमेंट स्कूल और प्रज्ञा निकेतन सहित विभिन्न संस्थानों के सहयोग से सीड बॉल निर्माण कार्यशालाएं आयोजित की गईं। इनमें बच्चों और युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे कम उम्र से ही पर्यावरण के प्रति जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता को प्रोत्साहन मिला।

यह पहल राजस्थान और हरियाणा के वन विभागों, सेव अरावली ट्रस्ट, शैक्षणिक संस्थानों और सामुदायिक सहयोगियों के साथ चिन्हित वन क्षेत्रों एवं हरित स्थलों पर बड़े स्तर पर सीड बॉल वितरण अभियानों के साथ संपन्न हुई। सामुदायिक स्तर पर पौधारोपण के प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए हजारों सीड बॉल्स स्कूलों और एनजीओ में भी वितरित किए गए। इस सहयोगात्मक दृष्टिकोण के माध्यम से ‘सो टू ग्रो’जैव विविधता को मजबूत करने और हेल्थियर इकोसिस्टम्स को समर्थन देने में योगदान दे रही है। साथ ही, यह पहल UNSDG 11 (सतत शहर एवं समुदाय) और 13 (जलवायु कार्रवाई) के प्रति फाउंडेशन की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाती है।

इस पहल पर बात करते हुए गिरनार फाउंडेशन की प्रमुखपीहू जैन ने कहा, “गिरनार फाउंडेशन में हमारा मानना है कि मीनिंगफुल एनवायरनमेंटल परिवर्तन की शुरुआत सामूहिक प्रयासों से होती है। पिछले तीन वर्षों में ‘सो टू ग्रो’ हमारी एक प्रिय वार्षिक परंपरा बन गई है, जो हमारे कर्मचारियों को स्कूलों, एनजीओ, समुदायों और सरकारी सहयोगियों के साथ जोड़ती है, ताकि हरित आवरण बढ़ाने और इकोलॉजिकल रिस्टोरेशन में योगदान दिया जा सके। एक पर्यावरणीय पहल के रूप में शुरू हुई यह गतिविधि आज एक साझा आंदोलन का रूप ले चुकी है, जो समुदाय की अधिक भागीदारी को प्रेरित करती है। इस यात्रा को आगे बढ़ाते हुए, हम निरंतर सहयोग और साझा जिम्मेदारी के माध्यम से स्थायी एनवायरनमेंटल प्रभाव उत्पन्न करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

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