आम आदमी के जीवन अनुभवों की फिल्म डॉ हंस की कविताएं— लोक बंधु
अजमेर 29 अगस्त()। अमृत सम्मान से सम्मानित, राजस्थानी मायण एवं हिंदी भाषा के वयोवृद्ध साहित्यकार, कवि व लेखक डॉ विनोद सोमानी ‘हंस’ के नवीन काव्य संग्रह ‘मेरे अहसास’ का लोकार्पण अजमेर जिला कलक्टर लोक बंधु के कर—कमलों द्वारा किया गया।
डॉ हंस के पुत्र डॉ (सीए) श्याम कुमार सोमानी ने कलेक्ट्रेट कक्ष में पहुंचकर पुस्तक की प्रति जिला कलक्टर को सौंपते हुए पाठकों को समर्पित करने का आग्रह किया।
कलक्टर लोक बंधु ने संग्रह में शामिल 81 कविताओं पर रुझान व्यक्त करते हुए कहा कि ‘मेरे अहसास’ काव्य संग्रह की प्रत्येक कविता पाठक को पढ़ते हुए स्वयं के अनुभव और अहसास से बरबस जोड़ देती है। कविता का रसास्पादन करते हुए लगता है कि जैसे स्वयं के जीवन के उतार—चढ़ाव, खट्टे—मीठे अनुभव, संघर्ष और हर्ष के क्षण, साहस व क्षोभ के विषय फिल्म की तरह दृश्य बन कर आंखों के सामने घूम रहे हों।
डॉ. हंस ने बहुत सहज और सरल भाषा में जीवन के गूढ़ अनुभवों को छोटे—छोटे शब्दों में पिरोते हुए दिव्य काव्य माला रची है,जो पढ़ने पर आंखों से दिल तक सीधे उतर जाती है। उनकी लिखी कविताओं में अच्छे—बुरे, कहे—अनकहे अहसास समाए हैं। इस काव्य संग्रह में लेखक का 88 बरस का अनुभव और जीवन की संजीदगी, जिंदादिली, सादगी, सौम्यता, दया, करुणा, प्रार्थना, आक्रोश, परेशानी, बेचैनी, अपनापन और प्रेम—प्रेरणा प्रसंग और भी बहुत कुछ झलकता है। यह काव्य संग्रह हर नए दिन की अबूझ शुरुआत से सांझ होने तक घर—परिवार, समाज—रिवाज, खोने, पाने और संजोने के अहसास को बयां करता है। जीवन में सब कुछ पाकर भी क्या खो रहा है और सब कुछ खोकर भी क्या पाया जा सकता है नई पीढ़ी के पाठकों के लिए यह संग्रह मार्गदर्शक सिद्ध होगा।
साहित्यिक उपलब्धियाँ
डॉ विनोद सोमानी ‘हंस’ राजस्थान के उन चुनिंदा साहित्यकारों में शामिल हैं जिन्हें वर्ष 2023—24 में राजस्थान साहित्य अकादमी का अमृत सम्मान प्राप्त हुआ है। अजयमेरु, प्रेसक्लब अजमेर ने विशिष्ट साहित्यकार सम्मान वर्ष 2026 में प्रदान किया है।
अब तक उनकी 43 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें कहानी, कविता संग्रह, उपन्यास, जीवनी, व्यंग्य संग्रह, राजस्थानी कृतिया,अनुवाद एवं चिंतनात्मक निबंध शामिल हैं। उनका लघु कविता संग्रह ‘मेहर के मोती’ के बाद यह ‘मेरे अहसास’ नया काव्य संग्रह प्रकाशित हुआ है।
‘मेरे अहसास’ काव्य संग्रह को डॉ विनोद सोमानी ‘हंस’ ने अपने मार्गदर्शक, स्नेह और प्रेरणा के पुंज श्रद्धेय मुन्नालाल मित्तल, स्वर्गीय डॉ शकुंतला मित्तल ‘किरण’, मित्तल परिवार के अनिल मित्तल, सुनील मित्तल, डॉ दिलीप मित्तल, मनोज मित्तल को समर्पित किया है। डॉ ‘हंस’ के शब्दों में मित्तल परिवार ना सिर्फ उनके बल्कि उनके पुत्र डॉ श्याम सोमानी के भौतिक व जैविक जीवन वृतांत के अटूट आधार हैं।
समीक्षा
जाने माने कवि, कथाकार, व्यंग्यकार फारूक आफरीदी ने इस काव्य संग्रह की समीक्षा में लिखा यह काव्य संग्रह जीवन को ऊर्जा के साथ जीने में आनंद का संदेश देता है।
आफरीदी ने कहा कि लेखक डॉ विनोद सोमानी ‘हंस’ अपनी काव्य साधना के लिए ही पहचाने जाते हैं। उनकी रचनाएं भले ही दिखने में लधु हों लेकिन वे गागर में सागर भर देते हैं।
उनकी कविताओं में संसार की सभी प्रसन्नताओं से लेकर व्याधियां उद्धाटित होती हैं। कविताओं में मनुष्य जीवन का सार प्रतिध्वनित होता है। उन्होंने कहा कि कविता संग्रह सिर्फ एक किताब नहीं जीवन की सच्चाई,संवेदना और सोम्यता का गुलदस्ता है। काव्य संग्रह की कुछ कविताएं जैसे क्या लिखें, विचार, घड़ी, हम, याद, अमर बेल, विश्राम कहां, प्रेम, असली माल, दु:ख, अंतर्मन, काजल की कोटड़ी, क्या करोगे मित्र, प्रकाश चाहिए, उलझन, विश्वास चाहिए, आदि से रूबरू होते हुए लगता है कि इनमें जीवन की उलझने हैं तो जीवन का उल्लास भी है।
संपादकीय लेख
इस संग्रह का संपादकीय डॉ हंस के पुत्र डॉ सीए श्याम सोमानी ने लिखा है। उन्होंने पिता की बढ़ती आयु के साथ स्वास्थ्य की चिंता को रेखांकित करते हुए उनकी सृजनात्मक कर्मठता को युवा साहित्यकारों के लिए प्रेरणास्पद बताया है। सोमानी ने लिखा कि पिताजी ने अपनी कविताओं में आम आदमी की पीड़ाओं और विषमताओं पर खुलकर कलम चलाई है। उनकी गजलें आस्था और आशा से भरी होती हैं। वे अपने लेखन में जीवन के हर विषय हर रंग को ईमानदारी से प्रकट करते हैं। इस नए काव्य संग्रह को भी पाठक पूर्व की तरह सराहेंगे। उन्होंने प्रकाशक साहित्यागार एवं उनकी टीम को सहयोग के लिए आभार जताया और शुभचिंतकों का धन्यवाद किया।