आईसीईएमए के वार्षिक सत्र 2026 में निर्माण उपकरण उद्योग ने ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की राह का खाका खींचा

नई दिल्लीसितंबर 2026: भारतीय निर्माण उपकरण निर्माता संघ (आईसीईएमए) ने आज नई दिल्ली के होटल ताज पैलेस में अपना वार्षिक सत्र 2026 आयोजित किया। इस बार सत्र का विषय था, “भारत को गढ़ने वाली मशीनें, ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के केंद्र में निर्माण उपकरण” (मशींस दैट बिल्ड इंडिया, सीई एट द हार्ट ऑफ ट्रिलियन-डॉलर इकोनॉमी)। सत्र में सरकार के वरिष्ठ प्रतिनिधि, नीति-निर्माता और उद्योग जगत के दिग्गज एक साथ आए। चर्चा इस बात पर हुई कि भारत के बुनियादी ढांचे के विस्तार, मैन्युफैक्चरिंग की प्रतिस्पर्धी क्षमता और विकसित भारत 2047 की ओर देश के सफर को गति देने में निर्माण उपकरण यानी कंस्‍ट्रक्‍शन इक्विपमेंट (सीई) उद्योग की क्या भूमिका है।

सत्र को केंद्रीय भारी उद्योग एवं लोक उद्यम मंत्री माननीय श्री एच.डी. कुमारस्वामी और केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री माननीय श्री जी. किशन रेड्डी ने संबोधित किया। उनके साथ नीति आयोग के सदस्य डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव श्री महमूद अहमद ने भी अपनी बात रखी। आईसीईएमए के अध्यक्ष तथा जेसीबी इंडिया के सीईओ एवं मैनेजिंग डायरेक्टर श्री दीपक शेट्टी ने दिन भर नीति-निर्माताओं के साथ उद्योग की बातचीत की अगुवाई की। उनके साथ आईसीईएमए के वरिष्ठ सदस्य और इंडस्‍ट्री के दूसरे दिग्‍गज भी मौजूद रहे।

प्रमुख घोषणाएं और उद्योग के निष्कर्ष

  • अर्थव्यवस्था की रीढ़ तैयार करना: बुनियादी ढांचे पर खर्च के गुणक असर से वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि 7.8 प्रतिशत के दमदार स्तर पर रही।
  • मैन्युफैक्चरिंग निवेश को रफ्तार: प्रस्तावित कंस्‍ट्रक्‍शन इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर इक्विपमेंट (सीआईई) योजना, और निवेश खींचने, लोकलाइजेशन गहरा करने तथा भारत के पूंजीगत वस्तु एवं निर्माण उपकरण मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने में उसकी भूमिका।
  • वैश्विक मुकाबले की ताकत बढ़ाना: व्यापार, शुल्क और बाजार तक पहुंच पर उद्योग तथा नीति के नजरिये, उद्योग के विजन 2030 के 3 अरब अमेरिकी डॉलर के निर्यात लक्ष्य के संदर्भ में।
  • भारत के खनन क्षेत्र की वृद्धि को गति: खनिज सुरक्षा, मशीनीकरण और ज्यादा लोकलाइजेशन के जरिए घरेलू खनन उपकरण इकोसिस्टम को बेहतर बनाने पर विचार-विमर्श।
  • विकसित भारत 2047 का सफर: समापन चर्चा, जिसमें उन नीतिगत प्राथमिकताओं और सहायक कदमों पर बात हुई, जो भारत के निर्माण उपकरण उद्योग को देश की ट्रिलियन डॉलर मैन्युफैक्चरिंग महत्वाकांक्षा की मुख्य ताकत बना सकें।

सरकार का नजरिया

केंद्रीय भारी उद्योग एवं लोक उद्यम मंत्री माननीय श्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा, “मैं आईसीईएमए की और भारत में निर्माण तथा बुनियादी ढांचा उपकरण उद्योग को मजबूती देने की उसकी लगातार कोशिशों की सराहना करता हूं। यह योगदान देश की तरक्की के लिए बहुत जरूरी है। केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित निर्माण एवं अवसंरचना उपकरण संवर्धन योजना महत्वपूर्ण उपकरणों और कलपुर्जों की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने में मदद करेगी, हमारी घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को और मजबूत करेगी और आयात पर हमारी निर्भरता घटाएगी। मुझे भरोसा है कि सरकार और उद्योग के बीच नजदीकी सहयोग से भारत निर्माण उपकरण की मैन्युफैक्चरिंग और तकनीक का प्रमुख वैश्विक केंद्र बन सकता है।”

केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री माननीय श्री जी. किशन रेड्डी ने कहा, “पिछले एक दशक में भारत के खनन क्षेत्र में जो सुधार हुए हैं, यानी कोयला और खनिज ब्लॉक के आवंटन के लिए पारदर्शी, नीलामी आधारित व्यवस्था अपनाना, उनसे इस क्षेत्र में ज्यादा निवेश, ज्यादा प्रतिस्पर्धा और तकनीक आई है। इस सफर में आईसीईएमए और उसकी सदस्य कंपनियां हमारी बहुमूल्य साथी रही हैं। खनन में वृद्धि का अगला दौर तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, सैटेलाइट मैपिंग और आधुनिक मशीनीकृत उपकरणों से तय होग। मैं इसे आईसीईएमए और पूरे निर्माण तथा खनन उपकरण उद्योग के लिए बड़ा मौका मानता हूं कि वह भारत के खनन विकास की कहानी में अपनी भूमिका और बढ़ाए।”

नीति आयोग के सदस्य डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम ने कहा, “निर्माण उपकरण जैसे क्षेत्र में वृद्धि अलग-थलग रहकर नहीं हो सकती। यह इस पर टिकी है कि बुनियादी ढांचे का बड़ा इकोसिस्टम उद्योग के बनाए सामान को कितना खपा पाता है, और उसे लगाने के लिए कुशल कामगार कितने हैं। रास्ता यही है कि सरकार, उद्योग और राज्य अलग-अलग पक्षों की तरह काम करना छोड़ें और सच्चे साझेदारों की तरह काम करें। हर कोई दूसरे के प्रति जवाबदेह हो, हर कोई दूसरे की कमी पूरी करने को तैयार हो। भारत जिस पैमाने की वृद्धि चाहता है, वह इसी तरह हासिल हो सकती है।”

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव श्री महमूद अहमद ने कहा, “आज सरकार के पूंजीगत खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा सड़क क्षेत्र में जाता है, और आंकड़े खुद बोलते हैं। एक दशक में हमारा राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क बढ़कर करीब डेढ़ लाख किलोमीटर हो गया है, और इसी दौरान निर्माण की रफ्तार करीब तीन गुना हुई है। इस कहानी में आईसीईएमए और निर्माण उपकरण उद्योग जैसे साथी इसके केंद्र में रहे हैं। ये अपने उपकरणों का बहुत बड़ा हिस्सा भारत में ही बनाते हैं और ज्यादा साफ-सुथरे उत्सर्जन मानकों को तेजी से अपनाते हैं। आगे हमारा ध्यान ज्यादा सुरक्षित और आपस में जुड़ा इकोसिस्टम बनाने पर है, यानी बेहतर उपकरण, बेहतर प्रशिक्षित ऑपरेटर, ज्यादा डिजिटल ट्रैकिंग, और इस साझेदारी को ऑफ-हाइवे तथा खनन उपकरण तक ले जाना। सरकार और उद्योग वहां तभी पहुंच सकते हैं, जब साथ मिलकर काम करें।”

उद्योग का नजरिया

आईसीईएमए के अध्यक्ष तथा जेसीबी इंडिया के सीईओ एवं मैनेजिंग डायरेक्टर श्री दीपक शेट्टी ने कहा, “भारत का निर्माण उपकरण उद्योग देश की बुनियादी ढांचा और मैन्युफैक्चरिंग महत्वाकांक्षाओं का एक अहम स्तंभ बनकर उभरा है। भारत जैसे-जैसे विकसित भारत 2047 की ओर तेजी से बढ़ रहा है, प्रस्तावित सीआईई योजना के जरिए उद्योग के पास मैन्युफैक्चरिंग का पैमाना बढ़ाने, लोकलाइजेशन मजबूत करने, निर्यात बढ़ाने और तकनीक अपनाने का खास मौका है। इससे आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के लक्ष्य के प्रति हमारी प्रतिबद्धता और बढ़ेगी।”

उन्होंने आगे कहा, “आईसीईएमए के जरिए हम सरकार और सभी हितधारकों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि ऐसा उद्योग बने जिसमें नई सोच हो, जो टिकाऊ हो, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हो और भारत की लंबे समय की विकास आकांक्षाओं को सहारा दे सके।”

उद्योग का संदर्भ

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा निर्माण उपकरण बाजार बना हुआ है। वित्त वर्ष 2025 में इस क्षेत्र का अनुमानित आकार 10 अरब अमेरिकी डॉलर था, और 2030 तक इसके बढ़कर 15 अरब अमेरिकी डॉलर हो जाने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2026 में उद्योग में कुछ समय के लिए नरमी जरूर रही। कुल उपकरण बिक्री 1,36,995 यूनिट रही, जो वित्त वर्ष 2025 के मुकाबले करीब 2 प्रतिशत कम है। इसकी वजह घरेलू मांग में करीब 7 प्रतिशत की गिरावट रही, क्योंकि बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं का काम धीमा पड़ा। दूसरी तरफ,इसी अवधि में निर्यात में करीब 32 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज हुई, जो भारत में बने निर्माण उपकरणों की बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धी क्षमता को दिखाती है। आईसीईएमए का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में उद्योग फिर वृद्धि की राह पर लौटेगा। इसे सरकार के जारी पूंजीगत खर्च से सहारा मिलेगा, जिसमें 12.2 लाख करोड़ रुपये का सार्वजनिक पूंजीगत खर्च शामिल है। इसके साथ परियोजनाओं का तेज काम और सीआईई योजना लागू होने से भी मदद मिलेगी।

वार्षिक सत्र के समापन पर आईसीईएमए ने दोहराया कि वह सरकार और अपनी सदस्य कंपनियों के साथ नजदीकी साझेदारी में काम करता रहेगा, ताकि भारत की बुनियादी ढांचा आधारित वृद्धि, मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धी क्षमता में निर्माण उपकरण उद्योग का योगदान बढ़े। मकसद यह है कि यह क्षेत्र उस लक्ष्य का अहम आधार बने, जिसमें भारत को ट्रिलियन डॉलर की मैन्युफैक्चरिंग अर्थव्यवस्था और 2047 तक विकसित भारत बनना है।

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