पर्युषण पर्व का सारः क्षमापना

श्री विजय कलापूर्ण सूरि आराधना भवन, पुष्कर रोड में यू. पंन्यास श्री मुक्ति श्रमण विजयजी म.सा., यू. मुनि श्री मुक्ति चरण विजयजी म.सा., पू. मुनि श्री मुक्तिध्यान विजयजी म.सा. आदि की निश्रा में पर्युषण पर्व के सारभूत रूप क्षमापना का कार्यक्रम आयोजित हुआ।
अवचन में पू. मुनि श्री ने क्षमापना का महत्त्व बताते हुए कहा कि छ महिने के उपवास करने, मासक्षमण करने, इत्यादि सरल हैं लेकिन जिसके साथ कई वर्षों से मनमुटाव हो, क्लेश हो, एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन हो ऐसी व्यक्ति के साथ क्षमापना करना सामने से जाकर “मिच्छामि-दुक्कडं” करना अत्यंत कठीन है। इस संदर्भ में 450 वर्ष पहले मेड़ता सिटी में पू. धर्मसागरजी के क्षमापना की बात बताई।
क्षमापर्व के साथ पूज्य पन्यास प्रवर की निश्रा में, भक्तामर तप एवं 3,5,8 एवं अधिक उपवास की तपस्या अनुमोदनार्थ श्री जैन श्वेताम्बर तपागच्छ संघ द्वारा बहुमान किया गया,
मुख्य रूप से सुरेखा करनावट , एकता मुनोत, अरुण मेहता, आयुष भंडारी,
अशोक सियाल आदि का बहुमान,
पारना लाभ नरपत राज- उदित भंडारी ने लिया ।

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