व्यावसायिक प्रशिक्षक बने विभाग और एजेंसी के बीच फुटबॉल

5 से 11 माह तक मानदेय बकाया, दूसरी ओर लाइट हाउस पोर्टल का 3 दिन में काम पूरा करने का निर्देश
राजस्थान। प्रदेश के विभिन्न जिलों में व्यावसायिक प्रशिक्षकों के मानदेय भुगतान को लेकर समस्या बनी हुई है। प्रशिक्षकों के अनुसार कई जिलों में 5 से 11 माह तक का मानदेय बकाया है। इस मामले में IISD, भगिनी, LNJ, i-दक्षा, माइंड लीडर और Sibin जैसी एजेंसियों से जुड़े प्रशिक्षकों द्वारा भुगतान लंबित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
प्रशिक्षकों का कहना है कि विभाग के पास जाने पर उन्हें बताया जाता है कि वे विभाग के कर्मचारी नहीं हैं, जबकि एजेंसी से संपर्क करने पर विभाग से राशि प्राप्त नहीं होने की बात कही जाती है। ऐसे में प्रशिक्षक विभाग और एजेंसी के बीच जिम्मेदारी के सवाल में फंसे हुए हैं।
लाइट हाउस पोर्टल पर 3 दिन में काम पूरा करने के निर्देश
इसी बीच शिक्षा संकुल के संबंधित अधिकारियों द्वारा जिला समग्र शिक्षा कार्यालयों के साथ ऑनलाइन बैठक के माध्यम से निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें व्यावसायिक प्रशिक्षकों को लाइट हाउस पोर्टल पर संबंधित प्रविष्टियां आगामी 3 दिवस में पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित समय में कार्य पूरा नहीं होने पर संबंधित कार्मिक को जिम्मेदार मानते हुए प्रशासनिक कार्रवाई की बात भी कही गई है।
प्रशिक्षकों का कहना है कि पोर्टल संबंधी कार्यों को लेकर समयबद्ध निर्देश जारी किए जा रहे हैं, लेकिन लंबे समय से लंबित मानदेय के भुगतान को लेकर भी विभाग को स्पष्ट समयसीमा और जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।
संघर्ष समिति प्रदेश अध्यक्ष पवन गर्ग ने कहा
व्यावसायिक प्रशिक्षक संघर्ष समिति प्रदेश अध्यक्ष पवन गर्ग ने कहा कि जिस उत्सुकता और तत्परता के साथ विभाग द्वारा लाइट हाउस पोर्टल का कार्य निर्धारित समय में पूरा करवाने के निर्देश दिए जा रहे हैं, उसी तत्परता से व्यावसायिक प्रशिक्षकों के लंबित मानदेय के भुगतान के लिए भी आदेश जारी किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि कंपनियों के खिलाफ भी जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि प्रशिक्षकों को लंबे समय से लंबित भुगतान से राहत मिल सके। समय पर मानदेय मिलने से व्यावसायिक प्रशिक्षक आर्थिक चिंता से मुक्त होकर विद्यालयों में अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा और समर्पण के साथ कर सकेंगे।
व्यावसायिक प्रशिक्षकों की प्रमुख मांगें
– बकाया मानदेय का शीघ्र भुगतान किया जाए।
– भुगतान की जिम्मेदारी स्पष्ट की जाए।
– मानदेय का नियमित एवं समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
– एजेंसियों द्वारा भुगतान में देरी की स्थिति में जवाबदेही तय की जाए।
– टेंडर व्यवस्था के स्थान पर स्थायी जॉब पॉलिसी पर विचार किया जाए।
– व्यावसायिक प्रशिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

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