जयपुर । राजस्थान समग्र सेवा संस्था के शारदा पुस्तकालय सभागार में आयोजित गरिमामय कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार दयाराम वर्मा के काव्य-संग्रह ‘चिंग तम अमत्तनि’ का लोकार्पण वरिष्ठ साहित्यकार नंद भारद्वाज, प्रेमकृष्ण शर्मा, फ़ारुख़ अफ़रीदी, प्रेमचंद गाँधी, दयाराम वर्मा, उमा, कमल मेहता व साकार श्रीवास्तव द्वारा किया गया। राही सहयोग संस्थान, जयपुर की अध्यक्ष कविता मुखर ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया कि मणिपुरी नारा ‘चिंग तम अमत्तनि’, जिसका अर्थ है कि “मणिपुर घाटियों और पहाड़ियों से मिलकर बना है; उसके ये दोनों भू-भाग कभी अलग नहीं हुए”, इसकी एकता को दर्शाता है। पुस्तक का शीर्षक इसी एकता का प्रतीक है। इस अवसर पर पुस्तक में से कुछ कविताओं का वाचन किया गया।
समीक्षा-सत्र में पत्रकार और कवयित्री उमा ने कहा कि संग्रह की हर कविता अनूठी है और वर्तमान की ज़रूरत है। वहीं, प्रो. कमल मेहता ने कहा कि प्रकृति में आपस में दर्द का रिश्ता होता है और ये कविताएँ उसी का बखान करती हैं। वरिष्ठ साहित्यकार प्रेमचंद गाँधी ने अपने वक्तव्य में इन्हें साहसी कवि की कविताएँ कहा। पूर्व प्रशासक एवं साहित्यकार हरिराम मीणा ने पुस्तक के शीर्षक को एकता का नारा बताते हुए कहा कि विचार के बिना कविता नहीं होती और जब दमित भावनाएँ ज्वालामुखी की तरह प्रकट होती हैं, तो वे प्रतिरोध के स्वर में होती हैं। संस्था की अध्यक्ष एवं कार्यक्रम की संयोजक कविता मुखर ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए बताया कि इस पुस्तक पर देश के विभिन्न हिस्सों से पाठकीय प्रतिक्रियाएँ आईं। इनका पाठ भी व्यंग्यकार व लेखक साकार श्रीवास्तव तथा कथाकार नरेंद्र लाटा ने किया।उन्होंने सूचित किया कि सात समंदर पार बैठे संस्था के निदेशक प्रबोध गोविल ने इस कार्यक्रम की लिए शुभकामनाएँ भेजी हैं।
वरिष्ठ साहित्यकार नंद भारद्वाज ने कहा कि प्रकृति, मणिपुर और देश की वर्तमान स्थिति के संदर्भ में एक जागरूक नागरिक की पीड़ा को दयाराम जी ने कवि के रूप में बख़ूबी व्यक्त किया है। ये कविताएँ अपने समय की विद्रपताओं और अन्याय के विरुद्ध निर्बीक प्रतिरोध का स्वर बनकर उभरी हैं। व्यंग्यकार फ़ारुख़ अफ़रीदी ने उन्हें सशक्त और जागरूक कवि बताते हुए इन कविताओं पर और भी चर्चा किए जाने की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम में शहर के जाने-माने पत्रकार एवं साहित्यकार विनोद भारद्वाज, राजेंद्र बोड़ा, अशोक मुखर्जी, मणिमाला शर्मा, ज्योत्सना सक्सेना, डॉ. सुषमा शर्मा, शिवराज पाल सिंह, ओमेन्द्र, अरुण ठाकर तथा शोधार्थी व विद्यार्थी उपस्थित रहे।