ब्यावर। सुर, साधना और संगीत की समृद्ध परंपराओं को समझने का अवसर वर्द्धमान कन्या महाविद्यालय की छात्राओं को एक दिवसीय कार्यशाला में मिला। श्री वर्द्धमान शिक्षण समिति द्वारा संचालित महाविद्यालय में ‘भारतीय शास्त्रीय संगीत में गायन की प्रमुख शैलियाँ’ विषय पर आयोजित कार्यशाला में संगीत के सैद्धांतिक पक्ष के साथ उसकी कलात्मक विशेषताओं और विविध आयामों पर चर्चा हुई।
कार्यशाला में राजकीय कन्या महाविद्यालय, नाथद्वारा की संगीत (कंठ) विषय की सहायक आचार्य भावना सोनी ने मुख्य प्रशिक्षक के रूप में मार्गदर्शन दिया। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध विरासत, विभिन्न गायन शैलियों की विशेषताओं तथा उनकी कलात्मक अभिव्यक्ति से प्रतिभागियों को परिचित कराया। इस दौरान संगीत की अलग-अलग विधाओं को समझने और उनके बीच के अंतर को जानने पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यशाला में सनातन धर्म राजकीय महाविद्यालय, ब्यावर के भारतीय संगीत विभागाध्यक्ष डॉ. दुष्यंत त्रिपाठी मुख्य अतिथि रहे। आयोजन के दौरान तबले पर कुलदीप रावलोत और हारमोनियम पर निश्चय कच्छावा का विशेष सहयोग रहा। वाद्य संगत ने कार्यशाला के संगीतमय वातावरण को प्रभावी बनाया।
शिक्षण समिति मंत्री डॉ. नरेन्द्र पारख ने कहा कि महाविद्यालय में छात्राओं को नियमित पढ़ाई के साथ संगीत, कला और अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों से सीखने के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. आर.सी. लोढ़ा ने बताया कि ऐसी कार्यशालाओं से छात्राओं को विषय की व्यावहारिक जानकारी मिलती है और विशेषज्ञों से सीधे संवाद करने का अवसर मिलता है।
कार्यशाला के माध्यम से छात्राओं को शास्त्रीय संगीत की परंपरागत विधाओं और उसके शैक्षणिक महत्व को समझने का अवसर मिला। महाविद्यालय की ओर से भावना सोनी को उनके विशेषज्ञ मार्गदर्शन एवं शैक्षणिक सहयोग के लिए प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। महाविद्यालय परिवार ने उनके योगदान की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया। इस मौके पर संगीत विभाग से जुड़े शिक्षक व छात्राएं भी मौजूद रही।