### बिजली बिल को आय का पैमाना बनाकर बुजुर्गों, विधवाओं और जरूरतमंदों को परेशान करना बंद करे सरकार, पेंशन व्यवस्था में पारदर्शिता और मानवीय दृष्टिकोण जरूरी
*अजमेर।* अजमेर शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक डॉ. राजकुमार जयपाल ने राजस्थान की भाजपा सरकार पर गरीबों, बुजुर्गों, विधवाओं और जरूरतमंद परिवारों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए सामाजिक सुरक्षा पेंशन लाभार्थियों की पात्रता जांच और पेंशन भुगतान रोके जाने की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार एक तरफ गरीब कल्याण के दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे फैसले सामने आ रहे हैं, जिनसे जरूरतमंद परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा होने की आशंका है।
राजस्थान सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अति-आवश्यक पत्र में ₹24,000 या इससे अधिक का वार्षिक बिजली बिल भुगतान करने वाले सामाजिक सुरक्षा पेंशन लाभार्थियों की पात्रता जांच कराने, नोटिस जारी करने और आय संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं। पत्र में संबंधित लाभार्थियों का पेंशन भुगतान अस्थायी रूप से रोकने तथा अपात्र पाए जाने पर पेंशन निरस्त करने की कार्रवाई का भी उल्लेख है। पात्र पाए जाने पर पेंशन पुनः शुरू करने की बात कही गई है।
डॉ. जयपाल ने कहा कि *सवाल यह है कि क्या ₹24 हजार का बिजली बिल किसी व्यक्ति की वास्तविक आर्थिक स्थिति का अंतिम प्रमाण हो सकता है?* बिजली का बिल खराब मीटर, गलत रीडिंग, पुराने बकाये या तकनीकी गड़बड़ी के कारण भी अधिक आ सकता है। ऐसी स्थिति में बिजली बिल को आधार बनाकर किसी गरीब परिवार की आर्थिक पात्रता पर संदेह करना और उसकी पेंशन रोकने की कार्रवाई करना गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन कोई खैरात नहीं है, बल्कि पात्र बुजुर्गों, विधवाओं और जरूरतमंद लोगों के जीवनयापन का महत्वपूर्ण सहारा है। अनेक परिवार इसी राशि से दवाइयों, राशन और दूसरी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में मदद लेते हैं। सरकार को यह समझना चाहिए कि पेंशन में देरी या भुगतान रुकने का असर सीधे उन लोगों पर पड़ता है, जिनके पास आय के सीमित साधन हैं।
*डॉ. जयपाल ने भाजपा सरकार से सवाल किया कि गरीबों को राहत देने के बजाय उन्हें जांच और नोटिस के दबाव में डालने की नौबत क्यों आ रही है?* सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि बिजली बिल अधिक आने पर वास्तविक आय का सत्यापन किस आधार पर होगा, गलत रीडिंग या मीटर की खराबी की जिम्मेदारी कौन लेगा और पात्र पाए जाने वाले लाभार्थियों की पेंशन कितने समय में बहाल की जाएगी।
उन्होंने मांग की कि केवल बिजली बिल की राशि को आधार बनाकर किसी लाभार्थी को अपात्र नहीं माना जाए। प्रत्येक मामले में वास्तविक वार्षिक आय, पारिवारिक परिस्थितियों और बिजली बिल बढ़ने के कारणों की निष्पक्ष जांच की जाए। पेंशन रोकने से पहले लाभार्थी को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिले और जांच प्रक्रिया समयबद्ध हो, ताकि पात्र लोगों को अनावश्यक आर्थिक परेशानी न उठानी पड़े।
डॉ. जयपाल ने कहा कि सरकार का दायित्व गरीबों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है, न कि उन्हें ऐसी प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझाना, जिनसे उनका जीवनयापन प्रभावित हो। भाजपा सरकार को अपने फैसलों में संवेदनशीलता दिखानी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी पात्र बुजुर्ग, विधवा या जरूरतमंद व्यक्ति का सहारा न छिने।
*कांग्रेस प्रवक्ता शैलेश गुप्ता ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा के गरीब कल्याण के दावे और जमीनी फैसले आमने-सामने खड़े दिखाई दे रहे हैं।* उन्होंने कहा कि यदि बिजली विभाग की गलती, खराब मीटर या गलत रीडिंग से बिल बढ़ जाता है, तो उसकी सजा गरीब की पेंशन रोककर क्यों दी जाए? भाजपा सरकार को गरीबों के हक पर चोट करने वाली ऐसी व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए। सरकार जनता को जवाब दे कि आखिर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को राहत देने के बजाय उन्हें अपनी पेंशन बचाने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने की नौबत क्यों आए। *गरीबों की सामाजिक सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए और सरकार को पात्र लाभार्थियों की पेंशन सुरक्षित रखने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए।*
शैलेश गुप्ता
प्रवक्ता
अजमेर शहर जिला कांग्रेस कमेटी