नई दिल्ली, अक्टूबर, 2026: आईआईटी खड़गपुर के अदित्या उप्पल को वायासैटः स्पेस फॉर गुड इंडिया चैलेंज 2026 का विजेता घोषित किया गया है। यह एक प्रमुख स्टेम नवप्रवर्तन प्रतियोगिता है जिसे वायासैट द्वारा इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर (इन-स्पेस) की रणनीतिक साझीदारी में आयोजित किया गया। आईआईटी गांधीनगर के शशांक कुमार सिंह और आईआईटी रुड़की के आर्यन गुप्ता को उनके अनूठे कॉन्सेप्ट्स के लिए दूसरा और तीसरा स्थान मिला। शीर्ष तीन विजेताओं को नकद पुरस्कार दिए जाएंगे ताकि वे अपने सॉल्यूशंस को और बेहतर बना सकें और उनका विस्तार कर सकें।
समग्र विजेता घोषित किए जाने के अलावा, अदीत्या उप्पल को 5,00,000 रुपये की राशि मिलेगी ताकि वह अपने नवप्रवर्तन को आगे ले जा सकें और इसे वास्तविक दुनिया में लागू करने की दिशा में आगे बढ़ सकें। यह प्रतियोगिता, देशभर के विश्वविद्यालयों की शानदार प्रतिभाओं को एक साथ लाती है ताकि वे अंतरिक्ष और उपग्रह तकनीकों का उपयोग करके पृथ्वी की महत्वपूर्ण चुनौतियों के लिए नए और कारगर समाधान विकसित कर सकें।
नई दिल्ली में हुए फाइनल में अदित्या उप्पल ने ‘DRISHTI: AI Guardian for Sustainable Orbits’ नाम से एक ऐसा समाधान पेश किया जिसे अंतरिक्ष में मौजूद खतरनाक मलबे का स्वतः पता लगाने, उपग्रहों से बचाव के लिए सर्वोत्तम युद्धाभ्यास की गणना करने और वायासैट के उपग्रह नेटवर्क पर वास्तविक समय में टकराव से बचाव के आदेश प्रसारित करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह कॉन्सेप्ट का उद्देश्य रिस्पांस टाइम को घंटों से घटाकर सेकेंडों में लाना है ताकि सैटेलाइट की सुरक्षा बेहतर बनाई जा सके, ईंधन बचाया जा सके और उस ऑर्बिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की रक्षा की जा सके जो वैश्विक संचार, नैविगेशन और आपदा प्रबंधन में मदद करता है। इस कॉन्सेप्ट को अंतरिक्ष उद्योग के प्रमुख विशेषज्ञों, सरकारी प्रतिनिधियों और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के दिग्गजों के एक पैनल द्वारा चुना गया था। इसके चयन का आधार इसका नवप्रवर्तन, व्यवहारिकता, विस्तार की क्षमता और दीर्घकालीन सामाजिक प्रभाव पैदा करने की संभावना थी।
यह विजेता कॉन्सेप्ट उन छह फाइनलिस्ट्स प्रोजेक्ट्स में सबसे अलग रहा जो सैटेलाइट आधारित टेक्नोलॉजीज़ की बदलान लाने की क्षमता को दर्शाते हैं। इस साल के फाइनलिस्टों ने कई तरह की चुनौतियों पर काम किया है जिनमें एआई की मदद से अंतरिक्ष के मलबे से बचना, सैटेलाइट के जरिए आपदा की चेतावनी देने वाली प्रणाली, अंतरिक्ष से फलसों की सेहत की निगरानी करना और प्राकृतिक आपदाओं के समय काम आने वाले इमर्जेंसी संचार समाधान शामिल हैं।
वायासैटः स्पेस फॉर गुड इंडिया चैलेंज 2026 के विजेता अदीत्या उप्पल ने कहा, मैं अंतरिक्ष क्षेत्र और इसमें मौजूद अपार संभावनाओं और अवसरों को लेकर बहुत रोमांचित हूं। मैं अतरिक्ष मलबे से जुड़ी समस्याओं पर काम करता रहा हूं जिससे आज मुझे टकराव से बचने की प्रक्रिया स्वचालित करने का मौका मिला। दि वायासैटः स्पेस फॉर गुड का अनुभव वास्तव में शानदार था। इसने मुझे कई चीजों को लेकर एक नया नजरिया दिया जैसे कि अपने विचारों को कैसे निर्माण कर उसे प्रस्तुत करें और समस्याओं को एक अलग नजरिये से कैसे देखें। 2026 का चैलेंज जीतना और अपनी कड़ी मेहनत का फल सामने आते देखना बहुत अच्छा लग रहा है।
फाइनलिस्ट्स का चयन कई महीनों तक चली एक कठोर मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद किया गया जिसमें पूरे भारत के छात्रों ने अपनी प्रविष्टियां भेजी थीं। इस कार्यक्रम के तहत प्रतिभागियों को वायासैट के इंजीनियरों और उद्योग के पेशेवरों से मार्गदर्शन और जुड़ने के अवसर मिले जिससे उन्हें स्पेस टेक्नोलॉजी के व्यवहारिक पहलुओं को समझने और वास्तविक दुनिया से जुड़े एप्लीकेशंस विकसित करने में मदद मिली।
वायासैट इंडिया के प्रबंध निदेशक गौतम शर्मा ने कहा, “इस साल के वायासैटः स्पेस फॉर गुड इंडिया चैलेंज में पेश किए गए विचार, भारत के छात्र समुदाय से सामने आ रही अद्भुत रचनात्मकता और उद्देश्यपूर्ण नवाचार को दर्शाते हैं। इन फाइनलिस्टों ने केवल टेक्नोलॉजी तक सीमित ना रहकर इस बात पर ध्यान केंद्रित किया कि अंतरिक्ष आधारित समाधान किस तरह से लोगों, समुदायों और उद्योगों के सामने मौजूद वास्तविक चुनौतियों का समाधान कर सकते हैं। वायासैट में हमारा मानना है कि कनेक्टिविटी और टेक्नोलॉजी तक पहुंच मानवीय क्षमताओं को उजागर कर सकती हैं और यह चुनौती उसी दृष्टिकोण को साकार करने का एक प्रयास है। भारत के बढ़ते अंतरिक्ष इकोसिस्टम से छात्रों, शिक्षकों, उद्योग विशेषज्ञों और नेताओं को एक साथ लाकर हम नवप्रवर्तकों की अगली पीढ़ी तैयार करने में मदद कर रहे हैं जो टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके सार्थक और स्थायी प्रभाव पैदा करेंगे।”
उत्तर प्रदेश के देवरिया से माननीय सांसद और विशिष्ट अतिथि शशांक मणि त्रिपाठी ने कहा, “मैं टेक्नोलॉजी को मानव जाति के लाभ के लिए देखता हूं। स्पेस फॉर गुड युवाओं की ऊर्जा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का एक जोरदार आह्वान है जहां हर व्यक्ति का विकास होता है और राष्ट्र भी आगे बढ़ता है। टेक्नोलॉजी का वास्तविक उद्देश्य समावेशी उत्पादकता को बढ़ावा देना और यह सुनिश्चित करना है कि विकास देश के हर कोने तक पहुंचे। हमारे राष्ट्र के लिए इस मोड़ पर यह अत्यंत आवश्यक है क्योंकि हम राष्ट्र निर्माण के 25 वर्षों की यात्रा शुरू कर रहे हैं। टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से एक बेहतर देश बनाने की चाह ही हम सभी को एक साथ लाती है।”
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के चेयरमैन और विशिष्ट अतिथि श्री अनिल कुमार लाहोटी ने कहा, “वायासैटः स्पेस फॉर गुड पहल एक प्रतियोगिता से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। यह युवा मस्तिष्क को नई संभावनाओं की कल्पना करने और यह पता लगाने के लिए एक मंच प्रदान करता है कि अंतरिक्ष तकनीक किस प्रकार से वास्तविक दुनिया की समस्याओं का समाधान कर सकती है। तकनीकी प्रगति का असली मूल्य केवल उसकी जटिलता में नहीं, बल्कि मानव जीवन को बेहतर बनाने की उसकी क्षमता में निहित है। छोटे उपग्रहों विशेष रूप से नैनो उपग्रहों और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) में होने वाले तकनीकी नवप्रवर्तन, अगली पीढ़ी की उपग्रह क्षमताओं को बढ़ावा देंगे, विभिन्न उद्योगों के बीच संपर्क को संभव बनाएंगे और 5जी एवं आने वाली 6जी क्षमताओं को सशक्त करेंगे।”
इस दौरान, पूर्व विदेश एवं संस्कृति राज्यमंत्री श्रीमती मीनाक्षी लेखी, बीएसएनएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक श्री रॉबर्ट जे. रवि, यूएसआईबीसी के प्रबंध निदेशक श्री राहुल शर्मा ने भी अंतिम प्रस्तुतियों की शोभा बढ़ाई।
बीएसएनएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक श्री रॉबर्ट जे. रवि ने कहा, “हर बदलाव नागरिकों के जीवन को छूना चाहिए। अंतरिक्ष सभी के लिए समान है और हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अंतरिक्ष से प्राप्त डेटा का उपयोग सभी की भलाई के लिए किया जाए और साथ ही यह भी ध्यान रखा जाए कि यह डेटा सुरक्षित रहे। अंतरिक्ष का वास्तविक मानवीय मूल्य उस समय लोगों की जान बचाने की उसकी क्षमता में निहित है, जब पारंपरिक नेटवर्क विफल हो जाते हैं। छात्रों को इन प्रयासों में योगदान देना चाहिए और हम ऑपरेटरों के रूप में अपने नागरिकों की भलाई के लिए इसे मिलकर आगे बढ़ाने को हमेशा तैयार हैं।”
वायासैटः स्पेस फॉर गुड इंडिया चैलेंज दिखाता है कि जब कनेक्टिविटी को तकनीक तक पहुंच, मार्गदर्शन और सहयोग के साथ जोड़ा जाता है तो यह किस तरह एक क्षमता में बदल जाती है। इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों को उन्हीं सैटेलाइट आधारित टेक्नोलॉजी का उपयोग करके समाधान विकसित करने के अवसर मिलते हैं जो दुनियाभर में सरकारों, एयरलाइनों, समुद्री ऑपरेटरों, उद्यमों और समुदायों को सहायता प्रदान करती हैं।
जैसे जैसे भारत एक वैश्विक टेक्नोलॉजी और सैटेलाइट नवप्रवर्तन केंद्र के रूप में उभर रहा है, वायासैटः स्पेस फॉर गुड जैसे कार्यक्रम स्टेम क्षेत्र के भावी नेतृत्वकर्ताओं को तैयार करने में मदद करते हैं। भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली 4.3 करोड़ से अधिक विद्यार्थियों को सेवा प्रदान करती है, जबकि देश की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के आने वाले दशक में काफी बढ़ने की संभावना है जिससे नवप्रवर्तकों, शोधकर्ताओं और उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा होंगे।