कॉस्मेटिक टेस्टिंग पर प्रतिबंध में ढील और आवारा व वन्यजीवों पर प्रयोग की आशंका पर जताई चिंता

श्रमण डॉ. पुष्पेन्द्र ने केंद्र सरकार से की पुनर्विचार की माँग

28 अक्टूबर 2026। केंद्र सरकार द्वारा पशुओं पर वैज्ञानिक प्रयोगों से जुड़े नियमों में बदलाव के लिए जारी किए गए प्रस्तावित ड्राफ्ट पर चिंता व्यक्त करते हुए श्रमण डॉ. पुष्पेन्द्र ने इसे बेज़ुबान जीवों की सुरक्षा और जीवदया के सिद्धांतों के लिए गंभीर चुनौती बताया है। उन्होंने केंद्र सरकार से प्रस्ताव की समीक्षा कर पशु हितों के प्रतिकूल प्रावधानों को वापस लेने की मांग की है।

अब तक जानवरों पर लैब ट्रायल्स के लिए कड़े नियम हैं, सरकारी अथॉरिटी से परमीशन लेनी पड़ती है लेकिन अब एक्सपेरिमेंट्स के लिए सिर्फ उन्हीं केसेज में सरकारी परमीशन की जरूरत होगी, जिनमें ट्रायल के दौरान एनीमल को असहनीय दर्द होता हो या कोई ऐसा प्रभाव पड़ता हो, जिससे जानवर की जिंदगी खतरे में आए और आश्चर्य की बात ये है कि जानवर को ट्रायल के दौरान असहनीय दर्द होगा या नहीं, इसका फैसला भी टेस्ट करने वाली कंपनी की एक्सपर्ट कमेटी करेगी। सरकार ने ड्राफ्ट जारी किया है उसमें जंगली जानवरों के साथ साथ स्ट्रे डॉग्स, कैट्स और दूसरे जानवरों पर एक्सपेरीमेंट्स की छूट दी गई है। यानी लैब टेस्ट करने वाली कंपनियों को जंगली जानवरों और सड़क पर घूमने वाले एनीमल्स को पकड़कर उनपर ट्रायल करने की छूट मिल जाएगी।

श्रमण डॉ. पुष्पेन्द्र ने कहा कि प्रस्तावित बदलावों से पशुओं पर प्रयोग करने की प्रक्रिया आसान होने और सरकारी अनुमति की अनिवार्यता सीमित होने की आशंका है। विशेष चिंता इस बात को लेकर है कि प्रयोग के दौरान पशु को असहनीय पीड़ा या जीवन के लिए खतरा होने का आकलन संबंधित संस्थान की अपनी विशेषज्ञ समिति द्वारा किए जाने का प्रावधान पशु संरक्षण की व्यवस्था को कमजोर कर सकता है।

उन्होंने कहा कि आवारा कुत्तों, बिल्लियों और अन्य पशुओं के साथ-साथ वन्यजीवों पर प्रयोग की संभावनाएं बढ़ना भी गंभीर चिंता का विषय है। यदि नियमों में पर्याप्त सुरक्षा प्रावधान नहीं हुए, तो व्यावसायिक हितों के चलते बेज़ुबान जीवों के शोषण और क्रूरता का खतरा बढ़ सकता है। विदेशी कंपनियों द्वारा भारत को पशु परीक्षण के केंद्र के रूप में इस्तेमाल किए जाने की आशंका को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

एनिमल टेस्टिंग के नियमों में बदलाव से बढ़ सकती हैं जानवरों की परेशानियां

गौरतलब है कि एनिमल टेस्टिंग के नियमों में बदलाव क्रूरता को बढ़ावा देगा। बेजुबान जानवरों को एक्सपेरीमेंट के लिए और ज्यादा आसानी से उपलब्ध करा देगा। जब नैतिकता समितियों को जानवरों पर किए जाने वाले एक्सपेरिमेंट के अप्रूवल की अथॉरिटी मिल जाएगी तो इसे रोकने वाला कोई नहीं होगा।

तकनीक के युग में पशुओं पर प्रयोग क्यों?

श्रमण डॉ. पुष्पेन्द्र ने कहा कि आज दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों और पशु-विहीन परीक्षण विधियों की ओर आगे बढ़ रही है। ऐसे समय में पशुओं पर प्रयोगों को आसान बनाने के बजाय वैकल्पिक वैज्ञानिक विधियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। विज्ञान की प्रगति का उद्देश्य जीवन की रक्षा होना चाहिए, न कि बेज़ुबान प्राणियों को पीड़ा देना।

उन्होंने पशुप्रेमियों, संत समाज, अहिंसा में विश्वास रखने वाले नागरिकों से 5 नवंबर से पहले प्रस्तावित नियमों के विरुद्ध अपनी आपत्तियां एवं सुझाव केन्द्र सरकार में दर्ज कराने की अपील की।

Leave a Comment

This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

error: Content is protected !!