तुम मिले तो मौसमों को,
एक नया एहसास मिला,
जैसे ख़ामोशी को अपनी,
धड़कनों का साज़ मिला।
तुम मेरे हो, इतना कह दो,
और मुझे कुछ चाहिए नहीं,
तुम जहाँ हो, मैं वहीं हूँ,
और कोई फ़ासला नहीं।
तेरी आँखों के आईने में,
अपना चेहरा देख लिया,
बिन कहे ही तुमने जैसे,
दिल का हर पन्ना पढ़ लिया।
तेरी हँसी की मीठी गूँज,
मेरे दिल में उतर गई,
सूनी-सूनी मेरी दुनिया,
तेरे आने से सँवर गई।
तेरे अनकहे लफ़्ज़ों को,
मैं अपना जवाब कर लूँ,
तेरी आँखों की नमी को,
अपनी पलकों में रख लूँ।
जब कभी तुम पास न होगे,
याद का दीपक जलेगा,
मेरे मन के एक कोने में,
तेरा एहसास रहेगा।
वक़्त की हर करवट पर,
नाम तेरा लिखता रहूँ,
तेरी दुनिया के हर रंग में,
ख़ुशबू-सा घुलता रहूँ।
न मुझे सफ़र की जल्दी,
न मंज़िलों की तलाश,
तेरा हाथ रहे हाथों में,
बस यही है मेरी आस।
उम्र ढलती जाए चाहे,
प्यार कम होने न पाए,
तेरी आँखों की चमक से,
मेरा हर दिन जगमगाए।
जब भी तुम थककर लौटो,
मेरे पास चले आना,
कुछ न कहना, बस चुप रहना,
सीने से लग जाना।
तुम मिले तो मौसमों को,
एक नया एहसास मिला,
जैसे ख़ामोशी को अपनी,
धड़कनों का साज़ मिला।
तुम मेरे हो, इतना कह दो,
और मुझे कुछ चाहिए नहीं,
तुम जहाँ हो, मैं वहीं हूँ,
और कोई फ़ासला नहीं।
“राहत टीकमगढ़”