
*इस दुनिया में 2 तरह के इंसान रहते हैं एक जिंदगी की मूलभूत सुविधाओं रोटी कपड़ा और मकान के लिए मेहनत मजदूरी करके अपने सपनों को साकार करने की प्रतिभा विकसित करते हैं और इसके लिए प्रयास करते हैं।*
*और दूसरे वे जो खुद मेहनत मजदूरी करने कमाने की बजाय दूसरों द्वारा कमाऐ धन को हड़पने की कला जानते हैं और उसके लिए षडयंत्र रचते हैं।* एक व्यक्ति महीने भर की नौकरी का वेतन मिलता है तो अपने परिवार ,बच्चों के लिए ज़रूरत के सामान खरीदने की सोचता है। दूसरे व्यक्ति को पहले व्यक्ति के पास रुपए होने का पता चलता है तो वह पहले वाले व्यक्ति से मीठी चिकनी- चुपड़ी चापलूसी भरी बातों या कुछ खिला -पिला,रो धोकर कर किसी बहाने से रुपए उधार मांग लेता है।जो कभी वापस नहीं लौटाता है।
इनमें पहले वाले पर ईश्वर की कृपा रहती है। क्यों कि विद्वानों और शास्त्रों ने बताया कि जो खुद की मदद स्वयं करते हैं ईश्वर भी उनकी मदद करते हैं। लेकिन जो खुद की मदद स्वयं नहीं करते बल्कि दूसरों की मेहनत,कमाई, लूटने, हड़पने में रहते हैं ईश्वर भी उनकी मदद नहीं करते।
*ईश्वर ने किसी के साथ भेद-भाव नहीं किया,किसी को गरीब नहीं बनाया। पूर्वकाल के कर्म पर व्यक्ति की वर्तमान दशा निर्भर करती हैं। तथा वर्तमान काल के कर्म व्यक्ति के भविष्य को तय करते हैं। इसलिए विद्वानों ने कहा है बोए पेड़ बबूल का तो आम कहां से पाऐ।*
जैसे इंसान के कर्म होंगे वैसे ही उसके दिनमान होंगे। इसके लिए व्यक्ति स्वयं ही जिम्मेदार है कोई तीसरा नहीं। इसलिए कहा जाता है *इंसान अपना भाग्य विधाता स्वयं है।*
अपनी वर्तमान दशा पर रोने और दूसरों को कोसनें या ईर्ष्या की बजाय अपने वर्तमान कर्मों को सुधार कर अपना भविष्य बेहतर बना सकते हैं।
*लेखक – हीरालाल नाहर पत्रकार*
*9929686902*