10 राज्यों के साहित्यकारों ने उत्सव में आने की जताई इच्छा, चयन प्रक्रिया जारी; 3 से 5 फरवरी तक होगा आयोजन
चित्तौड़गढ़। 21वीं सदी के राजस्थान साहित्यिक आंदोलन के संस्थापक-प्रवर्तक वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार अनिल सक्सेना ‘ललकार’ के मार्गदर्शन में चित्तौड़गढ़ साहित्य उत्सव-2027 की तैयारियां की जा रही हैं। राष्ट्रीय स्तर के इस साहित्य उत्सव का आयोजन 3, 4 एवं 5 फरवरी 2027 को श्री सांवलिया जी धर्मशाला, चित्तौड़गढ़ में होगा। तीन दिवसीय आयोजन में साहित्य, संस्कृति, भारतीय ज्ञान परंपरा, लोककलाओं और युवा सृजन से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम होंगे।आयोजक यूथ मूवमेंट राजस्थान के संस्थापक शाश्वत सक्सेना ने बताया कि राजस्थान के विभिन्न जिलों के साथ देश के 10 राज्यों के साहित्यकारों ने चित्तौड़गढ़ साहित्य उत्सव में आने के लिए आग्रह किया है। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र, झारखंड, हरियाणा, बिहार सहित अन्य राज्यों के साहित्यकारों से संपर्क किया जा रहा है। साहित्यकारों के चयन की प्रक्रिया जारी है। आयोजन में विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राओं के साथ युवाओं की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। साहित्य और संस्कृति से नई पीढ़ी को जोड़ना उत्सव का प्रमुख उद्देश्य है।
उन्होंने बताया कि राजस्थान की लुप्त होती कलाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए कलाकारों को प्रोत्साहित किया जाएगा। उत्सव में पुस्तक मेला, कला एवं चित्रकला प्रदर्शनी, राजस्थान की लोकसंस्कृति और पारंपरिक कलाओं पर संवाद, भारतीय ज्ञान परंपरा, बाल एवं युवा सृजन तथा साहित्यिक संवाद जैसे कार्यक्रम होंगे। पुस्तक प्रकाशकों, लेखकों, साहित्यिक संस्थाओं, कलाकारों और सांस्कृतिक संगठनों को अपने स्टॉल लगाने के लिए आमंत्रित किया गया है।
चित्तौड़गढ़ साहित्य उत्सव के सूत्रधार एवं संयोजक अनिल सक्सेना ‘ललकार’ के मार्गदर्शन में प्रदेश स्तर पर 21 सदस्यीय तथा चित्तौड़गढ़ जिले में 51 सदस्यीय समिति के गठन की प्रक्रिया चल रही है। इन समितियों के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न जिलों के साहित्यकारों, कलाकारों, शिक्षाविदों और युवाओं को आयोजन से जोड़ने की योजना है।
अनिल सक्सेना ‘ललकार’ ने बताया कि 21वीं सदी का राजस्थान साहित्यिक आंदोलन वर्ष 2010 से साहित्य, पत्रकारिता, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा को समाज से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। आंदोलन के अंतर्गत राजस्थान के विभिन्न जिलों में एक हजार से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। चित्तौड़गढ़ साहित्य उत्सव इसी अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी है। इसका उद्देश्य साहित्य को पुस्तकों तक सीमित न रखकर समाज और नई पीढ़ी के जीवन से जोड़ना तथा राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रोत्साहित करना है।
उत्सव में सहभागिता के इच्छुक साहित्यकारों, लेखकों, प्रकाशकों, कलाकारों, साहित्यिक संस्थाओं और स्टॉल लगाने के इच्छुक प्रतिभागियों से आयोजन समिति से संपर्क करने का आह्वान किया गया है।