घर बैठे सवा लाख में बन जाओ मुन्नाभाई एलएलबी

two-held-for-selling-fake-marksheets 2013-3-6नई दिल्ली। ना कॉलेज जाने की चिकचिक, ना पढ़ाई की चिंता, डेढ़ लाख रुपये दो और एमबीए या एलएलबी की डिग्री ले जाओ। राजधानी में शैक्षणिक संस्थान खोलकर युवाओं को फर्जी मार्कशीट व डिग्रियां बांटने वाले दो जालसाजों को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया है।

आरोपियों की पहचान नरेश कुमार और विनीत शर्मा के रूप में हुई है। पुलिस ने 9 फर्जी डिग्रियां बरामद कर उन्हें तैयार करने में प्रयुक्त लैपटॉप और प्रिंटर अपने कब्जे में ले लिया है। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त रविंद्र यादव (क्राइम ब्रांच) के अनुसार विनीत शर्मा विकासपुरी में इंद्रप्रस्थ इंटरनेशनल पॉलिटेक्निक चलाता है। इसकी आड़ में वह दसवीं, बारहवीं की फर्जी मार्कशीट बेचने का धंधा भी करता था। वहीं नरेश कुमार का उत्तम नगर में महालक्ष्मी कॉलेज है। छात्र और छात्राओं को वह पत्राचार से परीक्षा की कोचिंग देता है। लेकिन जो बच्चे पास नहीं हो पाते उन्हें वह अपने झांसे में लेकर फर्जी मार्कशीट थमा देता था। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त कुमार ज्ञानेश की देखरेख में एसीपी एमसी कटोच की टीम ने विनीत शर्मा को फर्जी मार्कशीट की डील करते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। ग्राहक बने एएसआई रमेश कौशिक से वह बारहवीं की मार्कशीट का सौदा पांच हजार रुपये में कर रहा था। विनीत से पूछताछ के बाद नरेश कुमार को गिरफ्तार किया गया।

क्राइम ब्रांच अधिकारियों के अनुसार नरेश कुमार इस गैंग का मास्टर माइंड है। करीब तीन साल से वह नकली डिग्रियां बेचने का काम कर रहा है। वह किसी योगेश नामक व्यक्ति के माध्यम से इस धंधे से जुड़ा था। पूछताछ में नरेश ने बताया कि वह खुद अखिल भारतीय शिक्षा परिषद, मध्य प्रदेश स्टेट ओपन स्कूल भोपाल तथा सिक्किम यूनिवर्सिटी की फर्जी डिग्रियां व सर्टिफिकेट तैयार कर लेता था। बीए, एलएलबी के अलावा एमबीए आदि की डिग्री भी वह बेचता था।

प्राइवेट सेक्टर में धड़ल्ले से प्रयोग होती है फर्जी डिग्रियां

क्राइम ब्रांच अधिकारियों के अनुसार गिरोह से पूछताछ में खुलासा हुआ है कि प्राइवेट सेक्टर में काम कर रहे युवा उनके ग्राहक थे। प्रमोशन आदि के लिए वह गिरोह से फर्जी डिग्री हासिल करके कंपनी में जमा कराते थे। प्राइवेट सेक्टर में डिग्रियों की कोई जांच न होने की वजह से गिरोह का धंधा फल फूल रहा था।

error: Content is protected !!