नई दिल्ली। देश की सबसे सुरक्षित जेल कहे जाने वाले तिहाड़ में वसंत विहार गैंगरेप कांड के मुख्य आरोपी राम सिंह की फांसी की सूचना के बाद जेल प्रशासन और दिल्ली पुलिस के होश उड़ गए। उसे फांसी पर लटके पाए जाने के बाद किसी जेल अधिकारी या पुलिस कर्मी को उसे फंदे से उतारने की हिम्मत नहीं हुई। उसे तब तक नहीं उतारा गया, जब तक जांच की प्राथमिक कार्रवाई पूरी नहीं हो गई। इस बीच वह करीब पौने सात घंटे तक फांसी के फंदे पर लटका रहा। सूत्रों की माने तो वह यह सोचकर कि कुछ दिनों से ज्यादा परेशान था कि वह जिस संगीन आरोप में जेल में बंद है, उसमें फांसी तय है। उसने तीन दिनों से खाना कम कर दिया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक उसके सेल में बंद तीन कैदियों कृष्णा, श्याम व सुधीर से पूछताछ की गई है। उन्होंने अपने बयान में बताया है कि राम सिंह पिछले कुछ दिनों से ज्यादा परेशान रहता था। वह भर पेट खाना भी नहीं खा रहा था। रविवार रात को भी कम खाया था। रात आठ बजे तक राम सिंह व तीन कैदी आपस में बातचीत करते रहे।
बातचीत के दौरान उसने कहा था कि उसका मन नहीं लग रहा है। वह काफी तनाव में था। उसने सिर में दर्द की शिकायत भी कही थी। बाद में चारों कैदी सोने चले गए। रात में तिहाड़ जेल के सुरक्षा कर्मी वार्ड के अंदर पहरा देते रहते हैं। जांच में यह बात सामने आई है कि जिस पहरेदार की रात में ड्यूटी थी, उसने सुबह 3.30 बजे जाकर देखा था। तब जेल में सब कुछ सामान्य था। इसलिए 3.30 से सुबह 5.45 बजे के बीच यह घटना हुई है। 5.45 बजे तमिलनाडु पुलिस के सिपाही ने उसे फांसी से लटके देखा था। हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि ढ़ाई घंटे के अंदर ही राम सिंह ने दरी काटकर फंदा कैसे तैयार कर लिया? कही जेल अधिकारी अपनी गर्दन बचाने के लिए कहानी तो नहीं गढ़ रहे? जेल सूत्र बताते है कि आत्महत्या या हत्या के लिए पहले से तैयारी की गई होगी। पुलिस सूत्रों के अनुसार महानगर दंडाधिकारी व पुलिस अधिकारियों द्वारा मौके का पूरा अपराधिक शोध के बाद 13.30 बजे उसे पुलिस ने फांसी से उतारा। तब तक पोस्टमार्टम को लेकर रहस्य बना रहा। तिहाड़ व पुलिस अधिकारी ढ़ाई बजे तक डीडीयू में पोस्टमार्टम कराने की बात कहते रहे। पर अंत में पौने दस घंटे बाद एम्स में शव ले जाया गया।