बीजिंग। चीन में सेना की हैकिंग यूनिट से देश के एक शीर्ष विश्वविद्यालय के शोधकर्ता भी जुड़े हुए हैं। यह जानकारी ऑनलाइन प्रकाशित शोध पत्रों से प्राप्त हुई है। इस यूनिट पर अमेरिका में हैकिंग के आरोप हैं। शोध पत्रों में कहा गया है कि शंघाई जियाओतोंग यूनिवर्सिटी ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी [पीएलए] की इकाई के साथ मिलकर नेटवर्क सुरक्षा के संबंध में शोध किया है। अमेरिका की एक सुरक्षा कंपनी ने पिछले माह कहा था कि सेना की शंघाई स्थित यूनिट अमेरिकी कंपनियों में हैकिंग के लिए जिम्मेदार है। इसके बाद अमेरिका और चीन के बीच वाकयुद्ध प्रारंभ हो गया। पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने चीन के नए राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ भी साइबर सुरक्षा का मुद्दा उठाया था।
चीन ने इस बात से इन्कार किया है कि वह हैकिंग करा रहा है। उसका दावा है कि उसकी सेना स्वयं साइबर हमलों की शिकार है और इनमें से अधिकांश की शुरुआत अमेरिका से होती है। यूनिवर्सिटी की बेवसाइट के मुताबिक एक पत्र के सह लेखक शू झी ने प्रमुख ‘साइबर-पेनेंट्रेशन अटैक प्लेटफॉर्म’ का विकास किया है। शंघाई जियाओतोंग यूनिवर्सिटी चीन का एक प्रमुख शिक्षण संस्थान है। पूर्व राष्ट्रपति जियांग जेमिन भी इसके छात्र रहे हैं। हैकिंग के बारे में यूनिवर्सिटी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है।