क्यों जरूरी है आईपीओ की ग्रेडिंग

business-grading-of-ipoनई दिल्ली। प्रारंभिक सार्वजिनक ऑफर (आईपीओ) या पब्लिक इश्यू लाने वाली हर कंपनी को उसकी ग्रेडिंग करानी जरूरी है। यह ग्रेडिंग सेबी में पंजीकृत क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों द्वारा की जाती है। इश्यू की बुनियादी बातों और कंपनी के वित्तीय कामकाज से लेकर प्रबंधन क्षमता का जायजा लेकर ही ग्रेड दिए जाते हैं। ऐसे ग्रेडिंग आमतौर पर पांच अंकों में से दी जाती है। इस अंक के आधार पर पता चलता है कि अमुक इश्यू कितना मजबूत है। जितने अधिक अंक ग्रेड में मिलते है, उतना ही अधिक मजबूत शेयर माना जाता है। अगर किसी आईपीओ में पांच में चार या पांच अंक मिलते हैं तो उसमें निवेश अच्छा माना जाता है, जबकि एक या दो अंक पानेवाले आईपीओ में निवेश से बचना चाहिए।

आईपीओ ग्रेडिंग की शुरुआत आईपीओ के माध्यम से आने वाले इक्विटी इश्यू के बारे मे गहन जानकारी निवेशकों को देने के लिए की गई, ताकि वे इश्यू की ठीक से समीक्षा कर सकें।

आईपीओ ग्रेड लेने से मना नहीं किया जा सकता है। चाहे इश्यू लाने को उसे दिया गया ग्रेड स्वीकार्य हो या नहीं हो, उसे सेबी आईसीडीआर नियमन 2009 के तहत अपना ग्रेड प्रकट करना ही होता है। हां, कंपनी के पास किसी दूसरी क्रेडिट रेटिग एजेंसी से ग्रेड पाने का विकल्प रहता है। ऐसी दशा में आईपीओ के लिए प्राप्त सभी ग्रेड प्रपत्रों, विज्ञापनों, आदि में प्रकट करना जरूरी होता है।

आईपीओ ग्रेड किसी भी दशा में निवेशकों को दिया गया सुझाव या संस्तुति नही है। निवेशकों को आईपीओ ग्रेड के साथ-साथ प्रस्तावित इश्यू के मूल्य, जोखिम तत्वों सहित प्रोस्पेक्टस में दिए गए तमाम तथ्यों का अध्ययन अवश्य करना चाहिए।

समझें ग्रेडिंग सिस्टम को :

ग्रेड कुल 5 अंक में से दिये जाते हैं। सबसे कम ग्रेड 1 होता है और सबसे अधिक ग्रेड 5 होता है। आईपीओ ग्रेडिंग का उद्देश्य पेशेवर क्त्रेडिट रेटिग एजेंसियों द्वारा कंपनी के व्यवसाय, वित्तीय संभावनाओं, प्रबंधन क्षमताओं और निगम प्रशासन क्रियाओं आदि के विश्लेशण के बाद निवेशकों के सामने एक सुस्पष्ट और ठोस राय रखना है। लेकिन निवेशकों को निवेश करने से पूर्व ग्रेड के अलावा प्रोस्पेक्टस में दिए गए जोखिम घटकों सहित पूरे प्रोस्पेक्टस को समझ कर ही अपना स्वतंत्र निर्णय लेना चाहिए।

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