मुशर्रफ को सेना ने दी थी स्वदेश नहीं लौटने की सलाह

musrafइस्लामाबाद। पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ को चार साल का स्वनिर्वासन खत्म करने के कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान के शक्तिशाली सुरक्षा प्रतिष्ठान ने उन्हें स्वदेश नहीं लौटने की सलाह दी थी।

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने एक अधिकारी के हवाले से कहा कि कोई नहीं चाहता था कि मुशर्रफ वापस लौटें। सेना की ओर से मुशर्रफ की वापसी के विरोध का मुख्य कारण उनकी जिंदगी को खतरा था। सेना को आशंका थी कि उनके स्वदेश लौटने पर राजनीतिक विवाद पैदा हो सकते हैं। असैन्य नेतृत्व व सैन्य प्रतिष्ठान सहित सभी पक्षों के बीच इस बात पर आम सहमति थी कि मुशर्रफ को इस समय स्वदेश नहीं लौटना चाहिए। हालांकि, मुशर्रफ ने सेना की सलाह नहीं मानी और पिछले महीने ही दुबई से कराची आने की अपनी योजना को अमलीजामा पहनाया।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उन पांच याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की थी, जिसमें 2007 में संविधान का उल्लंघन करके आपातकाल लगाने के लिए मुशर्रफ पर देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग की गई है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश तारिक महमूद ने कहा कि अगर वह अपना बचाव करने का फैसला करते हैं तो इस मामले से कई कानूनी विवाद खड़े होने की आशंका है। इस मामले से सेना और असैन्य सरकार के वे लोग भी जुड़ सकते हैं, जो मुशर्रफ के सहयोगी रह चुके हैं।

वरिष्ठ अधिवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) इनाम उर रहीम ने कहा कि शीर्ष अदालत सरकार को मुशर्रफ के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाने के निर्देश दे सकती है।

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