यह विडंबना ही है कि देश में जहां लाखों लोग अपना वाजिब टैक्स जमा ही नहीं करते, वहीं कई लोगों की आमदनी मिलने से पहले ही उस पर टैक्स काट कर सरकारी खजाने में जमा कर दिया जाता है। इसे स्रोत पर काटा गया टैक्स अथवा टीडीएस कहते हैं। इसी पैसे को आपके पास वापस आने की प्रक्रिया को टैक्स रिफंड कहते हैं। रिटर्न भरने के अधिकतम एक साल के भीतर रिफंड आपको वापस मिल जाना चाहिए, अन्यथा इस पर आपको 6 फीसद सालाना की दर से ब्याज अदा किए जाने का प्रावधान है। अगर आपको रिफंड पाने में दिक्कत हो रही है तो आप अपने क्षेत्र के कर विभाग से संपर्क कर सकते हैं। टैक्स रिटर्न का एक्नॉलेजमेंट के साथ आप अपने कर अधिकारी को रिफंड के लिए लिख सकते हैं। फिर भी परेशानी का हल न हो तो संबंधित टैक्स कमिश्नर के यहां अपनी परेशानी लेकर जाया जा सकता है।
वैसे, ऑनलाइन रिटर्न भरने वालों को अब ये दिक्कत कम ही आती है। रिफंड बैंकर की मदद से सीधे आपके अकाउंट में आपका रिफंड पहुंच जाता है। ध्यान रहे कि रिटर्न भरते वक्त आपको जिस अकाउंट में रिफंड वापस चाहिए, उसका बैंक अकाउंट नंबर और एमआइसीआर कोड डालना कतई न भूलें। रिफंड आपको चेक के जरिये भी भेजा जाता है खासकर जब आपकी राशि 50,000 रुपये से अधिक हो। अपने रिफंड की स्थिति का पता लगाने के लिए आप आयकर विभाग की वेबसाइट पर जा सकते हैं।
एसबीआइ की रिफंड बैंकर सेवा का टोल फ्री नंबर 18004259760 या फिर आईटीआरओऐटदारेटएसबीआईडॉटसीओडॉटइन पर ईमेल के जरिये इसके बारे में जानकारी मांगी जा सकती है। एनएलडीएल-टीआइएन वेबसाइट पर आपके रिफंड चेक का स्पीड पोस्ट रेफेरेंस नंबर मिल जाता है, जिसे आप डाक विभाग से जानकारी मांगने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। यह भी संभव है कि आपका पता बदलने अथवा बैंक अकाउंट में बदलाव की वजह से आपका रिफंड आप तक पहुंच नही पा रहा हो। ऐसे किसी भी बदलाव की जानकारी कर विभाग को तुरंत दें। एसबीआइ का हेल्प डेस्क नंबर 080-26599760 भी आपकी मदद कर सकता है।