रंगराजन समिति की रिपोर्ट पर आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने कुछ शर्तो के साथ चीनी को नियंत्रणमुक्त करने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद अब मिल मालिक जब चाहे और जितनी मात्रा में चाहे, चीनी खुले बाजार में बेच सकता है। सरकार ने कहा है कि चीनी के विनियंत्रण से चीनी की खुदरा कीमतों में कोई फर्क नहीं पड़ेगा। बहरहाल, सरकार पर अब चीनी सब्सिडी का भार 2,600 करोड़ रुपये से बढ़कर 5,300 करोड़ रुपये प्रति वर्ष हो जाएगा।
सरकारी और निजी क्षेत्र की चीनी मिल नकदी मुनाफे के लिए पहले से ही संघर्ष कर रही हैं। चालू चीनी सत्र 2012-13 के पेराई अंतिम चरण में पहुंचने के बाद भी मिल मालिक किसानों के करीब 11,000 करोड़ के भुगतान के लिए मशक्कत कर रहे हैं। मिलों के बीच कीमत को लेकर संभावित प्रतिस्पर्धा का फायदा उपभोक्ताओं को मिलने की भी संभावना है।
विनियंत्रण का असर
-चीनी मिलों पर सरकार का नियंत्रण नहीं होगा
-चीनी मिलों को हर साल करीब 3,000 करोड़ रुपये की बचत
-सरकार अब खुले बाजार से चीनी की खरीद करेगी और इसमें सब्सिडी देकर इसे जनवितरण प्रणाली द्वारा वितरित करेगी।
-चीनी के उत्पाद शुल्क में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। वर्तमान में चीनी पर उत्पाद शुल्क 95 रुपये प्रति क्विंटल है।
-विनियंत्रण के बाद अब किसानों को समय पर उनका भुगतान मिल सकेगा
क्या हो रणनीति
जानकार मानते हैं कि इस कदम से चीनी की कीमतों पर दबाव दिख सकता है। यानी उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर यह है कि चीनी कुछ हफ्तों तक सस्ती हो सकती है। वायदा कारोबार में विनियंत्रण की खबर के बाद जो तेजी देखी गई थी उसमें तुरंत मुनाफावसूली देखी गई और दाम गिरे। एसएमसी कमोडिटी से जुड़ी वंदना भारती के मुताबिक लेवी सिस्टम हटने के बाद कंपनियों को 3,120 करोड़ रुपये का मुनाफा होगा। इससे चीनी के दाम 1.50 रुपये प्रति किलो कम हो सकते हैं। पूरे साल कंपनियों के पास 10 मिलियन टन का औसत स्टॉक होता है। यह अभी 17 मिलियन टन के आसपास है।
ब्राजील के बाद भारत चीनी का उत्पादन करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है। मुनाफा बढ़ने से उम्मीद है कि किसान गन्ने की बुवाई ज्यादा करेंगे। चालू वित्त वर्ष में पूरी दुनिया में 10, 12 मिलियन टन का बफर स्टॉक होने की उम्मीद है। ब्राजील में भी दो सालों की खराब फसल के बाद स्थिति बेहतर हो चुकी है। इसलिए चीनी के वायदा कारोबार में तेजी की उम्मीद में दांव लगाने वाले भारी नुकसान का शिकार हो सकते हैं। अगले साल महाराष्ट्र और कर्नाटक में सूखे का असर जरूर दिखाई दे सकता है।
चीनी क्षेत्र के शेयरों में रणनीति
विनियंत्रण के फैसले के बाद शुगर सेक्टर में कंपनियों का मुनाफा बढ़ना तय है। लेकिन अब उन्हें खुले बाजार में देश और विदेश की कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा, जिनका उन्हें अनुभव नहीं है। तो उन्हें अपनी मार्केटिंग को बेहतर करना होगा, ब्रांडिग पर जोर देना होगा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव के विपरीत रणनीति (हेजिंग) बनानी होगी। तो मध्यम से लंबी अवधि में उन्हीं शेयरों में निवेश की योजना बनाएं जिनका मुनाफे का इतिहास सशक्त हो। फैसले के बाद शुगर स्टॉक्स में 20 फीसद तक की तेजी देखी गई बलरामपुर चीनी, बजाज हिंदुस्तान, त्रिवेणी इंजीनियरिंग, धामपुर शक्ति शुगर, बन्नारी अमान और ईआइडी पेरी में निवेश बेहतर है।