नई दिल्ली। सरबजीत पर पाकिस्तान की जेल में दो कैदियों ने हमला कर दिया। उसकी हालत बहुत ही खराब है। वह कोमा में है। चलिए एक घटना बताते हैं कि कैसे महज 24 घंटे में पाकिस्तान ने पलटी मारी और सरबजीत की जिन्दगी उस दोजख में जीने को मजबूर हो गई।
चौबीस घंटे के अंदर पाकिस्तान ने भारत का दिल टुकड़े-टुकड़े कर डाला था। सरहद पार से एकाएक खबर आई थी कि पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने वहां की जेल में 22 साल से कैद भारतीय सरबजीत सिंह की रिहाई पर मोहर लगा दी है। लेकिन अभी 24 घंटे नहीं बीते थे कि सरबजीत की जगह सुरजीत का नाम सामने आ गया। यानी सरबजीत नहीं सुरजीत की रिहाई होगी। सुरजीत की रिहाई भी भारत के लिए सुखद खबर थी, लेकिन इसमें पाकिस्तान को श्रेय देने जैसा कुछ नहीं। सुरजीत 30 साल से पाकिस्तानी जेल में उम्र कैद की सजा काट रहे थे, जो पूरी हो गई थी। उन्होंने अपनी सजा पूरी की और रिहा हो गए। सरबजीत का मामला अलग है।
उन्हें पाकिस्तानी अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी, लेकिन उन्होंने दया याचना की थी और तब से भारत की ओर से डिप्लोमेटिक कोशिशें जारी थीं कि पाक उन्हें रिहा कर भारत भेज दे। जब पाक राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी आए थे तो भारत ने पाकिस्तानी कैदी डॉ. खलील चिश्ती को, जो यहां 30 साल से कैद थे रिहा कर दिया था। तब यही उम्मीद की गई थी कि पाकिस्तान भी जल्द ही सरबजीत को रिहा कर देगा। हुआ भी ऐसा ही। लेकिन सरबजीत कैसे सुरजीत में बदल गया पता ही नहीं चला। पाक के इस झटके ने सरबजीत ही नहीं पूरे भारत का दिल तोड़ दिया था।