स्थानीय निकाय और पंजीयन विभाग की गफलत से नहीं हो पा भू उपयोग परिवर्तन, कैसे आएंगे अच्छे दिन
अजयमेरु नागरिक अधिकार समिति की माननीय मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से आग्रह, कृपया इस पर ध्यान दें और कार्रवाई करें
नए मास्टर प्लान-2033 के लिए भी मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से मांग

अजमेर। अजमेर के श्रीनगर रोड स्थित नाकामदार क्षेत्र में गुलाबबाड़ी क्रॉसिंग से सुख सदन से लेकर रेलवे लाइन तक सड़क किनारे बनी दुकानों में पिछले 20-25 वर्षों से कॉमर्शियल गतिविधियां चल रही हैं, लेकिन इन्हें कॉमर्शियल नहीं किया गया है। असल में प्रशासन ने इस ओर कभी ध्यान ही नहीं दिया, जो बेहद अफसोसनाक है। उससे भी अधिक दुखद पहलु ये है कि दुकानदारों ने अपनी ओर से जरूरी आवेदन कर दिए हैं, मगर प्रशासन पूरी तरह से लापरवाह बना हुआ है।
इस बारे में अजयमेरु नागरिक अधिकार एवं जन चेतना समिति ने मांग की है कि अजमेर विकास प्राधिकरण इस मसले को गंभीरता से ले और इस पर कार्रवाई करे। मालूम हो कि आवासीय भूमि के वाणिज्यिक उपयोग में परिवर्तन कराने का नियम तो हैं, लेकिन जटिल प्रक्रियाओं के कारण उनमें देरी होती है और मामला आगे बढ़ ही नहीं पाता। सरकार व प्रशासन ने कभी इतनी जटिलता का समाप्त कर उसे सरल बनाने के बारे में सोचा ही नहीं है। पता चला है कि भू-उपयोग परिवर्तन को लेकर अजमेर विकास प्राधिकरण में फाइलें जमा हैं, लेकिन लम्बे अरसे से उन पर धूल जमा है। इन फाइलों को लेकर बनाई गई समिति की बैठक बमुश्किल होती है, जिससे कोई कार्रवाई होती नजर नहीं आती। ऐसा प्रतीत होता है कि प्रशासन को इसकी तनिक भी चिंता नहीं है। अब जबकि सरकार ने नए मास्टर प्लान में आ रही समस्याओं को निपटाने के निर्देश दिए हैं तो इस ओर भी ध्यान दिया जाना आवश्यक है। माननीय मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से अजयमेरु नागरिक अधिकार एवं जन चेतना समिति की मांग है कि वे इस ओर ध्यान दें और नाकामदार स्थित सुख सदन से रेलवे लाइन तक बनी लाइन की दुकानों को कॉमर्शियल करें।
नए मास्टर प्लान की कवायद
अजमेर शहर का मास्टर प्लान-2033 नए सिरे से बनाने की कवायद शुरू हो गई है। इसमें अब किशनगढ़ और पुष्कर के गांवों को भी शामिल किया जाएगा। गत दिनों जयपुर में हुई बैठक में नगरीय विकास विभाग ने नए मास्टर प्लान में आ रही अड़चनों को 31 अक्टूबर तक निस्तारित करने के निर्देश दिए। बैठक में इस बात पर भी अफसोस जताया गया कि अजमेर विकास प्राधिकरण अब तक मिली आपत्तियों का निस्तारण नहीं कर सका है, जबकि प्रदेश के अनेक शहरों में नया मास्टर प्लान लागू हो गया है।
कैसी विडंबना है, पैसा पूरा, काम अधूरा
अजमेर। शहर के प्रमुख मार्गों पर भूमि और भवन की रजिस्ट्री का वाणिज्यिक दर से पैसा देने के बाद भी भवन और भूमि का भू-उपयोग आवासीय ही रहेगा। भूमि और भवन स्वामियों को भू-उपयोग परिवर्तन कराने के लिए नगर निगम या अजमेर विकास प्राधिकरण के चक्कर काटने ही पड़ेंगे। गत 26 सितम्बर को आयोजित डीएलसी की बैठक में कलक्टर जिले के पांच विधायकों और पंजीयन एवं मुदांक विभाग के अधिकारियों ने शहर के प्रमुख मार्गों और बाजारों के मार्ग को करीब 40 खंडो में बांटा है। कमेटी ने निर्णय किया है कि प्रमुख मार्गों पर स्थिति भूखण्ड और भवन की रजिस्ट्री कराने पर शुल्क वाणिज्यिकर दर से ही लिया जाएगा। कमेटी ने चिंहित प्रमुख मुख्य मार्गों पर 40 फीट और उससे अधिक गहराई के लिए अलग-अलग वाणिज्यिक की दर से बदले में मोटी राजस्व भी अर्जित करेगा, लेकिन इसके बावजूद भूमि या भवन वास्तव में आवासीय से वाणिज्यिक कर नहीं हो सकेंगे। उनका वाणिज्यिक उपयोग करने से पहले नगर निगम या अजमेर विकास प्राधिकरण से भू उपयोग परिवर्तन कराकर अलग से शुल्क देना होगा। ऐसे में रजिस्ट्री के लाखों रुपए अतिरिक्त देने के बावजूद लोग स्वयं को ठगा या महसूस करेंगे। अजमेर में भू उपयोग परिवर्तन समिति की बैठकों का लंबे समय के अतंराल पर आयोजित किया जाता है। हालत ये है कि निगम और एडीए में बैठकें आयोजित हुए एक-एक वर्ष से ज्यादा का समय बीत जाता है।
एन. के. जैन
जनसम्पर्क प्रभारी