सबसे बड़ा पुण्यात्मा कोई है तो शिविर में भर्ती शिविरार्थी है

श्रावक संस्कार शिविर का आयोजन, उत्तम मार्दव धर्म पर प्रवचन
kishangarhमदनगंज-किशनगढ़। दशलक्षण पर्व पर आयोजित श्रावक संस्कार शिविर के अवसर पर मुनि पुंगव सुधासागर महाराज ने उत्तम मार्दव धर्म पर अपने प्रवचन में शिविरार्थियों से कहा कि क्या तुम्हें गर्व नहीं है की तुम दशलक्षण शिविर में शिविरार्थी बने हो। सारे पापों को छोड़ दिया है। क्या यह आनंद की बात नहीं है ? क्या ये गर्व की बात नहीं है? गर्व से सीना फूलता है की नहीं ? शिविर में सब धन्धा, व्यापार को छोड़कर के गुरू के सामने बैठे हो। क्या यह गर्व की बात नहीं है ? क्या यह आनंद की बात नहीं है? यदि इसको मद की कोटी में ले लिया जाएगा तो अनर्थ हो जाएगा। मुनिश्री ने कहा कि मां जब बेटा उंगली पकड़कर चलता है तब उतनी खुश नहीं होती जितना बेटा बिना उंगली पकड़े चलना शुरू कर देता है। उस दिन मां आनंद बनाती है। मुनिश्री ने कहा कि ऐसे पावन पर्व का दिन, ऐसा पावन माहौल इस समय यदि संसार में सबसे बड़ा कोई पुण्यात्मा दुनिया में है तो जो शिविर में भर्ती है शिविरार्थी है। इस समय संसार में इससे बड़ा पुण्य किसी का नहीं है। पर्व के दिनों में तुम सब आरंभ परिग्रह से रहित, समस्त विकल्पों से रहित, गुरू के सामने, चैताल्य में बैठे हो। पंचम काल में इससे बड़ा पुण्य गृहस्थ का हो ही नहीं सकता। यहीं नहीं इस समय तुम चतुर्थ कालीन श्रावक बन गए हो। शिविरार्थी की जो यह चर्या है वह तो चतुर्थ काल की चर्या है। मुनिश्री ने कहा कि हनुमान से रामचन्द्र जी ने पूछा कि हनुमान तुम्हारे हाथ का पत्थर कैसे तैर जाता है और मेरा पत्थर क्यों डूब जाता है। हनुमान जी कहते है भगवन इतनी सीधी सी बात है आपके हाथ में आकर जो छूट रहा है वो डूबेगा नहीं तो क्या खाक तैरेगा। और हमारे पत्थर पर जिसके हृदय पर आपका नाम लिखा है तो वह क्या तैरेगा नहीं तो खाक डूबेगा। कितना बड़ा लोजिक था।
मुनिश्री ने कहा कि जिस दिन विद्यार्थी को पढऩे से मुक्ति का रविवार बुरा लगने लग जाए वह देश की सर्वाेच्च ऊंचाई पर पहुंचेगा। और जिसको रविवार अच्छा लगने लग जाए तो समझ लेना उसके मां बाप ने उसके पढऩे में जितना पैसा लगाया है वह मजदूरी भी नहीं निकाल पाएगा। मुनि श्री ने कहा कि मंदिर में माला फेरते वक्त तुम्हारा ध्यान बाजार मेें चला जाता है, मंदिर में बैठे बैठे तुम गलत कार्य करने लग जाते हो, गलत सोचने लग जाते हो। जब मंदिर में भक्ति करते करते दर्शन करते करते तुम्हारा मन बिगड जाए तो भगवान कहते है धिक्कार है कि तेरे जैसी पापी की दृष्टि मुझ पर पड़ गई। भगवान कहते है कि मैंने तो मेरा भेष वो बनाया था, मेरा जीवन तो वो बनाया था कि जिस पापी की दृष्टि भी मेरे पर पड़ जाएगी, तो उसके बाद वो दृष्टि भी पावन हो जाएगी।
ये कार्यक्रम हुए
श्री दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति के मीडिया प्रभारी विकास छाबड़ा के अनुसार सामूहिक प्रार्थना, अभिषेक एवं सामूहिक संगीतमय पूजन, तत्वार्थसूत्र वाचना एवं अर्घ समपर्ण, सामूहिक सामयिक अध्ययन पठन पाठन, जिज्ञासु प्रश्रोत्तर (मुनिश्री से), मुनिश्री द्वारा कक्षा पाठ्यक्रमानुसार, सामूहिक श्रावक प्रतिक्रमण, आचार्य भक्ति व सामूहिक आरती, ग्रुप अनुसार अध्ययन कक्षाएं सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम विधिवत रूप से सम्पन्न हुए।
शिविर पुण्यार्जक
26 वें श्रावक संस्कार शिविर पुण्यार्जक का सौभाग्य चत्तरदेवी पाटनी, किशनगढ़ को मिला।
ये रहे श्रावक श्रेष्ठी
श्री दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति के मीडिया प्रभारी विकास छाबड़ा के अनुसार प्रात: अभिषेक एवं शांतिधारा, चित्र अनावरण, दीप प्रज्जवलन, शास्त्र भेंट, पाद प्रक्षालन, सायंकालीन आरती एवं वात्सल्य भोज पुण्यार्जक का सौभाग्य दिलीपकुमार प्रेमकुमार निरंजन कुमार प्रमोद राकेश सुबोध नितिन बैद परिवार को मिला। द्रव्य पुण्यार्जक का सौभाग्य प्रकाशचंद, विजयकुमार, अभिषेक काला परिवार को मिला। अल्पाहार पुण्यार्जक का सौभाग्य नेमिचंद, माणकचंद, नरेन्द्रकुमार गंगवाल परिवार को मिला।

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