सुरेंद्र दुबे अपने आप मे खुद काव्य थे-शक्तावत

स्व दुबे की याद को चिरस्थाई बनाने के लिए चौराहे के नामकरण होगा ,अनिल मित्तल
केकडी
सुरेन्द्र दुबे स्मृति सम्मान समारोह व कवि सम्मेलन मंगलवार रात्रि को नगरपालिका रंगमंच पर सम्पन्न हुआ, समारोह के खास मेहमान,मसाणिया भैरवनाथ राजगढ़ के मुख्य उपासक चंपालाल महाराज थे तथा समारोह के मुख्यातिथि न्यूज 18 के राजस्थान स्टेट हेड श्रीपाल शक्तावत थे समारोह की अध्यक्षता केकडी नगरपालिका अध्यक्ष अनिल मित्तल ने की व एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष दीपक मेवाड़ा व सरवाड़ एसएचओ भी अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
प्रारम्भ में अतिथियों ने मां शारदे के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन कर समारोह की शुरुआत की,समारोह के खास मेहमान राजगढ़ मसाणिया भैरवधाम की मुख्य उपासक चंपा लाल महाराज का चन्द्रप्रकाश दाधीच,अविनाश दाधीच सहित परिजनों ने पुष्पाहार व शाल ओढ़कर सम्मान किया, सुरेन्द्र दुबे सम्मान समारोह समिति के चन्द्रप्रकाश दुबे अविनाश दुबे,कीर्ति काले,कैलाश मंडेला,सत्यनारायण दुबे,राजकुमार दुबे,विष्णु दुबे ,
ईशान दुबे,आनंदी दुबे,मधु दुबे, प्रतिभा दुबे,कविता दुबे,अंकिता दुबे,गोपाल शर्मा महेंद्र जोशी,रामलाल वर्मा,सत्यनारायण सोनी,उमेश मूंदड़ा ने मुख्य अतिथि श्रीपाल शक्तावत कार्यक्रम अध्यक्ष अनिल मित्तल सहित अतिथियों का स्वागत किया साथ ही आमंत्रित कवि दुर्गादान सिंह गोड़ झालावाड़,कैलाश मंडेला शाहपुरा, शशिकांत यादव देवास मध्य्प्रदेश,रमेश शर्मा चित्तौड़, शिव तूफान ब्यावर,बुद्धिप्रकाश दाधीच केकडी,उमेश उत्साही जयपुर,आर एल दीपक मालपुरा,कमल माहेश्वरी अराई,दिनेश बंटी शाहपुरा व देवकरण मेघवंशी केकडी का
धर्मीचंद न्याति,मुरली बारहठ,रमेश शर्मा,रणवीर सिंह सोढ़ी,सत्यनारायण न्याति,सुनील शर्मा,रामलाल वर्मा ने माल्यार्पण कर साफा व शाल ओढ़ाकर व स्मृतिचिन्ह प्रदान कर सम्मान किया,चन्द्रप्रकाश दुबे ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि आज प्रथम सुरेन्द्र दुबे स्मृति सम्मान समारोह में प्रथम बार पद्मश्री सुरेन्द्र शर्मा नइदिल्ली को दिया जा रहा है और निजी स्तर पर साहित्य व कविता के क्षेत्र में यह देश का सबसे बड़ा व्यक्तिगत पुरस्कार है और हम सबने निर्णय किया है कि स्व दुबे की स्मृति को चिरस्थाई बनाये रखने के लिए यह पुरस्कार प्रतिवर्ष दिया जाएगा,समारोह समिति की संयोजक वरिष्ठ कवियत्री डॉ कीर्ति काले ने प्रस्तावना रखते हुए बताया कि स्व दुबे केवल हास्य के ही नही बल्कि सभी विधाओं के महारथी थे उन्होंने साहित्य क्षेत्र में जो योगदान दिया है वह अविस्मरणीय है ओर हम उनकी यादों को संजोए रखने को एक स्मृतिग्रन्थ तैयार करने के लिए वरिष्ठ साहित्यकारों के पास गए तो उन्होंने कहा कि सुरेन्द्र दुबे को पद्मश्री से सम्मानित किया जाना चाहिए था और यदि ये मरणोपरांत दिया जा सकता ह्यो तो इसके लिए अवश्य प्रयास करने चाहिए।इस मौके पर टिनटिन फिल्म्स के नीरज शर्मा द्वारा स्व सुरेन्द्र दुबे की जीवनी पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री का भी प्रोजेक्टर के माध्यम से प्रदर्शन किया गया व वरिष्ठ कवि केलाश मंडेला व वरिष्ठ कवियत्री डॉ कीर्ति काले द्वारा रचित स्मृति ग्रन्थ ” जा रहा हूँ इतनी दूर ”
का विमोचन भी अतिथियों द्वारा किया गया।
समारोह में खास मेहमान के रूप में उपस्थित
चंपालाल महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि स्व सुरेन्द्र दुबे ने अल्प समय मे जो ख्याति प्राप्त की उसके लिए लोगो को पूरी जिंदगी कम पड़ती है उनकी याद में ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने के लिए में दुबे परिवार को हार्दिक साधुवाद देता हूं,मुख्य अतिथि श्रीपाल शक्तावत ने अपने उद्बोधन में स्व सुरेन्द्र दुबे को क्षेत्र की अविस्मरणीय सख्शियत बताते हुए उनके द्वारा साहित्यिक क्षेत्र में दिए गए योगदान तथा बेटियों के उत्थान व विकास के लिए उनके द्वारा साहित्यिक मंचो के माध्यम से किये गए उनके कार्यो को अविस्मरणीय बताया,नगरपालिकाध्यक्ष अनिल मित्तल ने स्व दुबे को केकड़ी क्षेत्र का नाम भारत ही नही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरान्वित करने हेतु हमेशा स्मरणीय बताया व उनको आने वाली पीढ़ी का मार्गदर्शक बताया तथा उनके शुभचिंतको की मांग पर उनके अविस्मरणीय योगदान की चिर स्थाई बनाने हेतु केकड़ी के किसी चौराहे के नामकरण उनके नाम से शीघ्र करने की घोषणा की,आयोजन समिति की ओर से इस अवसर पर पद्मश्री सुरेन्द्र शर्मा को सुरेन्द्र दुबे स्मृति प्रथम पुरस्कार के तहत एक लाख ग्यारह हजार एक सो ग्यारह रुपये का नकद पुरस्कार व अलंकरण अतिथियों द्वारा दिया गया,कवि समनेलन का आगाज केकड़ी के बुद्धि प्रकाश दाधीच ने हास्य सम्राट को अर्पित करता हु कविता से हास्य व्यंग्य की बेहतरीन प्रस्तुति से किया
बंटी ने मायड़ भाषा मे हास्य छंद सुनाए,उमेश उत्साही ने “कुछ लोग चांदी का चम्मच मुंह लेकर पैदा होते है,,,कोने कोने में विदेशी कंपनियां छा रही है,,,देश का बजट बन रहा है अमरीकी दबाव में,,,,राज का रुपया राजभक्तो ने ही हड़प लिया,,,आरएल दीपक मालपुरा ने “सियासत के मुखोटों में असलियत आ नही सकती धुलाई व्यर्थ काजल की सफेदी आ नही सकती,,सबरी नाम प्रतीक्षा का है,,,,सबरी हरि को हरी सबरी को सुधबुध खोकर खोज रहे,,,,

देवास मध्यप्रदेश से आये शशिकांत यादव ने वन्देमातरम गीत गाकर शहीदों की हम उतारे आरती,मध्यप्रदेश सरकार द्वारा सचिवालय में वन्देमातरम गीत पर रोक पर आक्रोश से भरा गीत सुनाया,एक देश दो निशान व दो विधान वाली
उग्रवादियों की सजा जिनको सालती है पहले उनको फांसी पर चढ़ा दीजिये,,,जेएनयू के घटनाक्रम पर ओर राजेस्थान विधानसभा चुनाव के दौरान भारतमाता की जय को रुकवाने वाले नेता की निंदा करते हुए ‘”कतरा भी जिनका कटा नही वे भी सागर की गहराई नापने लगे,,,, कभी जिनको अपने पिता का भी पता नही वे सावरकर का चरित्र बांचने लगे,राष्ट्रभक्ति श्रध्दा के दीप जलाना है तेरा मेरा क्या है भारत मा सबकी माता है ,,,उठो जवानों भारत का मस्तक हिम से ऊंचा करदो,,,एक साथ सब मिलकर बोले भारतमाता की जय हो,,,चित्तौड़गढ़ के गीतकार रमेश शर्मा ने क्या लिखते रहते हो यूँही चांद की बाते करते हो धरती पर अपना घर ही नही,,,,,
तेरे शहर से मेरा अच्छा है,,,प्रिये गांव मेरे तू चल तेरे शहर में क्या रखा है गांव में बोली में है शहद वहां बोतलों में भरा हुआ है,,,ना भँवरे न पवन झकोरे न तितली ही आती तेरे गमलों में ,,,,,तू है ढूंढती वेलेंटाइन डे में ,,,जब बेटी की शादी तय हो जाती है पर शादी में कुछ समय बाकी हो तब घर वालो का व्यवहार बदल जाता है तो उसके दिल की बात को गीत के माध्यम से सुनाया,
सब अभी से बदल गया मां,क्यो अभी से बदल गया माँ, वो ही द्वार खिड़कियां ,,,
अराई से आये हास्यरस के कमल माहेश्वरी ने जब एक बार मेरी शादी हुई,,,निकासी के लिए में ज्योही बाहर आया,,,हाड़ौती भाषा के प्रेम व श्रृंगार के कवि दुर्गादान सिंह गोड़ ने राधा व कृष्ण पर तथा कृष्ण उद्धव पर छंद सुनाए “यूं तो मुरली बास छ राधा ,,,म्हारी आंख्या के साम ही देखो नंदकिशोर चलेग्या,,,,श्रृंगार रस का गीत “हे गोरी गोरी गजमन बनिठनी मुजरो मुजरो खमाघनी,,,,आंख बोले जैसे काम की कमान, आधो आधो चंदन आधो आधो पानी,,,,।
शिव तूफान ने व्यंग्य रचना “एक सांप ने नेता जी को डसा नेताजी खुश है और सांप चल बसा,,राजस्थानी भाषा के गीतकार व पेरोडि कार कैलाश मंडेला ने में जमानत के कागजात लेकर आया हूँ
में भी खामोशियो की कैद का सताया हु गीतों की तालियां अपने साथ लाया हूँ,शिखर को चूम लूंगा में तुम जो शाबास कहो,,पैरोडी लगजा गले उसीके जिसकी मात हो ना हो शायद फिर सदन में मुलाकात हो न हो,थारी बाता का ये बादल ,,हो थारी हुकि जिगर,,,,मीटू मिटू क्या है जब बाग में कोई फूल झरा तो तितली ने कहा,,,मीटू मिटू।
अर माल्यो भाग गयो र इंडिया सु दे ग्यो बैंका क तूली,, ले ग्यो मूल मूल उ लार पकड़ाग्यो वान उ मूली,,, व्यापम घोटाले पर व्यंग्य “या तो गुर्गा न गरमावे,इन पर मोटा दाम लगाव,भर्ती चोरा की,होग्या व्यापम घोटाला ,,,पढ़न्या ने आरक्षण खाग्यो भर्ती चोरा री,,,ज्ञानी बन जासी चपरासी,,,,क्लासिकल पैरोडी “लागा कुर्सी पर दाग छुड़ाऊं कैसे पद बचाऊ कैसे,,,हैरी तन कुन केव री काली म्हारा घर की तू दीवाली,,,,म्हारा हृदय की तू है हरियाली तन कुन केव काली,,केकड़ी के देवकरण मेघवंशी ने “वो जिंदगी जीने के अंदाज लेके आये वो नई रोशनी को ,,,,, रोशनी के बिना छाया भी साथ नही देगी,,,,
राजस्थानी गीत “आयो फागण को महीनों,,,माँड्या प्रीत भरया,,,,
हास्य कवि सुरेन्द्र शर्मा ने आदमी कब तक जिया यह महत्वपूर्ण नही है कैसे जिया यह महत्वपूर्ण है,,
कीर्ति काले ने कुछ कहा भी नही कुछ सुना भी नही बिन कहे बिन सुने बस युही चल दीए ,,,,क्या पता था इस कथा का यूं अचानक अंत होगा,,,।कवि सम्मेलन के अंत मे समिति के संयोजक चन्द्रप्रकाश दुबे ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया।
कवि सम्मेलन की संचालिका कीर्ति काले ने जोरदार संचालन से श्रोताओं को भरी ठंड में भी लगभग ढाई बजे तक बांधे रखा।समारोह का बेहतरीन संचालन पत्रकार व पार्षद सुरेन्द्र जोशी ने किया।

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