महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय में ‘विश्व नम भूमि दिवस’’ मनाया

अजमेर। 2 फरवरी महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग में विश्व नम भूमि दिवस मनाया गया। कार्यक्रम की विधिवत शुरूआत माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलन व माल्यार्पण के साथ हुई।
विभागाध्यक्ष, प्रोफेसर प्रवीण माथुर ने नम भूमि दिवस के बारे में बताया कि यह दिवस सर्वप्रथम 1971 में 2 फरवरी को नम भूमि बचाने के लिए शुरू हुआ। उन्होंने बताया कि राजस्थान में नम भूमि के कई क्षेत्र हैं जिनमें मुख्यतः केवलादेव व सांभर झील है। जहाँ पक्षियों की बहुतायत है और उन्हें बचाना अत्यन्त आवश्यक है। साथ में जलीय जैवविविधता भी प्रचुर मात्रा में पाई जाती है परन्तु इनके खत्म होने के साथ साथ कई जीवों की प्रजातियाँ खतरे में हैं। अतः इन्हें बचाने के पूर्ण प्रयास करने होंगे और आम जन की भागीदारी जरूरी है।
इस कार्यक्रम में डॉ. सुजीत नरवड़े जो बी.एन.एच.एस., मुम्बई से पधारे थे, ने प्रकृति के व्यवहारिक दृष्टिकोण पर बल दिया और कहा कि प्रकृति में हर जीव की अहमियत है जिसे नकारा नहीं जा सकता। उन्होंने उत्तराखण्ड व अन्य जगह की विभिन्न प्राकृतिक त्रासदियों का भी जिक्र किया जो मानव द्वारा की गई विभिन्न क्रियाओं का परिणाम है। अतः हमें प्रकृति के व्यवहार को समझकर आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित जीवन के बारे में सोचना समझना चाहिए।
कार्यक्रम में पधारे महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर के पूर्व कुलपति प्रो. गंगाराम जाखड़ ने इस प्रकार के दिवस मनाने की जरूरत पर बल दिया ताकि आम व्यक्ति इन्हें बचाने के लिए आगे आ सके। उन्होंने कृषि व उद्योगों को नमभूमि के लिए खतरा बताया क्योंकि इन क्षेत्रों से कीटनाशकों व रसायनों का उत्सर्जन होता है जो इनके लिए खतरा है। उन्होंने यह भी कहा कि नम भूमि में जो जलीय जीव हैं उनको कृत्रिम भेजन उपलब्ध नहीं करवाया जाए क्योंकि इससे उनके व्यवहार, साथ में झीलों में (सुपोषणता) को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा कि आने वाले पीढ़ियों के लिए पानी की कमी मुख्य संकट बनने वाला है। अतः पानी के स्त्रोतों को बचाना अति आवश्यक है। प्रशासन को भी इसे समझना चाहिए, अन्यथा इसके गंभीर परिणाम मानव समाज को भुगतने होंगे।
कार्यक्रम में विभाग की छात्रा मानसी जादौन व चंचल शर्मा ने आनासागर एवं फायसागर के अस्तित्व बचाने के लिए क्या प्रयास किये जायें इस बाबत् प्रजन्टेशन दिया।
अंत में श्री उमेश दत्त ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में डॉ. विवेक शर्मा, डॉ. अश्विनी कुमार, डॉ. रूचिरा भारद्वाज, डॉ. संगीता पाटन, दिवाकर यादव, उमेश दत्त व अन्य छात्र छात्राएँ मौजूद थे।

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