शौक वह करें जो ना खुद को और ना दूसरों को नुकसान पहुंचाए- डाॅ दाधीच

धूम्रपान निषेध दिवस (31 मई)
तम्बाकू का धुंआ शरीर के कई अंगों और प्रणालियों को पहुंचाता है नुकसान

अजमेर, 31 मई( )। धूम्रपान एक दिमागी भूख है इसे अपनी जिद से ही मिटाया जा सकता है। जो लोग अपने आप से और अपनों से प्यार करते हैं या अपनों को अपने से ज्यादा चाहते हैं तो उन्हें अपनी इस दिमागी भूख को मिटाने के लिए धूम्रपान को ठीक उसी तरह छोड़ना होगा जैसे लोग किसी पसंदीदा चीज को पाने के लिए अपनी जिद बना लेते हैं। शौक करना बुरा नहीं है, शौक बुरा तब है जब वह खुद को और परिवारजनों को नुकसान पहुंचाए।
मित्तल हाॅस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर अजमेर के अस्थमा, टीबी व श्वास रोग विशेषज्ञ डाॅ प्रमोद दाधीच ने शुक्रवार को यह विचार व्यक्त किए। डाॅ दाधीच धूम्रपान निषेध दिवस के अवसर पर मित्तल हाॅस्पिटल के सभागार में आयोजित एक सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। सेमिनार में हैड एडमिनिस्ट्रेशन डाॅ विद्या दायमा, हाॅस्पिटल स्टाफ एवं मित्तल काॅलेज आॅफ नर्सिंग प्रिसीपल रविन्द्र कुमार शर्मा, वाइस प्रिंसीपल हिमांशु राघव दाधीच, नर्सिंग अधीक्षक राजेन्द्र गुप्ता सहित नर्सिंग इंचार्जेस तथा ट्यूटर्स ने हिस्सा लिया। प्रबंधक जनसम्पर्क सतोष गुप्ता ने विषय पर प्रकाश डाला। डाॅ दाधीच ने बताया कि तम्बाकू के धुंए का असर शरीर के कई अंगों और प्रणालियों को नुकसान पहुंचाता है। इतना ही नहीं जो लोग धूम्रपान नहीं करते हैं उन्हें भी तम्बाकू के धुंए का बहुत खामियाजा भुगतना पड़ता है। डाॅ दाधीच ने बताया कि तम्बाकू का धुंआ तो इतना हानिकारक है कि वह गर्भस्थ शिशु तक को भी नुकसान पहुंचाता है। तम्बाकू के धुंए का श्वसन प्रणाली पर तो असर होता ही है साथ ही शरीर की संचार प्रणाली, प्रतिरक्षा प्रणाली, पाचन प्रणाली, मांस पेशियां, हड्डियां, यौन अंगों आदि पर भी बुरा असर पड़ता है।
डाॅ प्रमोद दाधीच ने बताया कि जो लोग लम्बे समय से धूम्रपान कर रहे होते हैं उन्हें हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा होता है। उनमें पाचन तंत्र के अल्सर, आॅस्टियोपोरोसिस या हिप फ्रैक्चर, मधुमेह टाइप टू, फेफड़ों के वायु थैली के स्थाई नुकसान की संभावनाएं बढ़ जाती है, उनकी धमनियों के अस्तर को नुकसान पहुंचता है, हाथ-पैरों की उंगलियों में रक्त प्रवाह बाधित होता है, रक्त में एंटीआॅक्सीडेंट का स्तर निम्न हो जाता है, पुरुषों में नपुंसकता बढ़ जाती है व महिलाओं में प्रजनन क्षमता कम हो जाती है। इसके अतिरिक्त अंधेपन का खतरा, मसूड़ों की बीमारी, सूंघने और स्वाद लेने की क्षमता भी कम हो जाती है।
डाॅ दाधीच ने बताया कि जो धूम्रपान नहीं करते हैं किन्तु वे निष्क्रिय धूम्रपान के धुएं के सम्पर्क में आते हैं तो उनमें भी स्ट्रोक का खतरा 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। गर्भवती महिलाओं में जन्म के वजन में थोड़ी कमी के साथ बच्चे होने का खतरा होता है। बच्चों के फेफड़ों की वृद्धि धीमी हो जाती है, खांसी, घरघराहट और सांस लेने की तकलीफ हो सकती है।
घूम्रपान छोड़ने के तत्काल फायदे-
डाॅ दाधीच ने बताया कि हृदय की दर और रक्तचाप असामान्य से सामान्य होने लगता है। कुछ ही घंटो में रक्त में कार्बन मोनोआॅक्साइड का स्तर कम होने लगता है। खांसी और सांस में घरघराहट नहीं रहती। फेफड़ों के कार्य में पर्याप्त सुधार हो जाता है। कैंसर, हृदय रोग और अन्य पुरानी बीमारियों की तुलना में कम जोखिम होगा।
फोटो-मित्तल हाॅस्पिटल के श्वास व अस्थमा रोग विशेषज्ञ डाॅ प्रमोद दाधीच तम्बाकू निषेध दिवस पर सेमिनार को संबोधित करते हुए।

प्रबंधक जनसम्पर्क/सन्तोष गुप्ता/9116049809

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