आर्थिक दिवालियापन की तरफ राजस्थान, कैसे होगा प्रदेश का विकास

प्रो. वासुदेव देवनानी
जयपुर, 11 फरवरी। मंगलवार को विधानसभा में बोलते हुए पूर्व शिक्षा मंत्री एवं अजमेर उत्तर विधायक वासुदेव देवनानी ने कहा कि राजस्थान प्रदेश आर्थिक दिवालियापन की ओर अग्रसर हो रहा है जबकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी सत्ता बचाने के प्रयास में व्यस्त है। गहलोत को प्रदेशवासियों की कतई चिंता नहीं बल्कि वे कुर्सी बनाए रखने के लिए कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व को खुश करने में मशगूल है उन्हें जनता के दर्द से कोई मतलब नहीं।
देवनानी ने कहा कि प्रदेश में इस साल कर्मचारियों को डीए का भुगतान नहीं होना, ठेकेदारों के 3 हजार करोड का भुगतान अटकाना, राज्य का राजस्व घटकर 14 हजार करोड रह जाना, कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं देना, विधायक कोष की राशि घटाकर आधी कर देना, स्कूलों में दूध वितरण के बदले भुगतान नहीं होना, बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता नहीं देना इत्यादि आर्थिक दीवालियापन की ओर ही संकेत करता है।
देवनानी ने कहा कि प्रदेश में सीएम और डिप्टी सीएम दो शक्ति केन्द्र बने हुए है इन दो पाटन के बीच प्रदेश की जनता पिस रही है। प्रदेश का विकास अटका पडा है। प्रदेश में विकास कार्य जमीं पर नहीं उतर पा रहे है। कोरी वाहवाही लूटने के लिए पिछले बजट में की बम्पर घोषणाएं मूर्त रूप के इंतजार में है। संविधाकर्मियों की समस्याएं हल करने की दिशा में अब तक कोई कारगर प्रयास नहीं हुए है। योग-प्राकृतिक चिकित्सा को स्थापित करने की तरफ अब तक ध्यान नहीं दिया गया है। अनुदान के लिए गौशालाएं सरकार का मूंह ताक रही है। 20 हजार बंद स्कूल अब तक नहीं खुलं जा सके है। सरकार ने जनता को राजस्थान विधानसभा चुनाव में सपने दिखाएं लेकिन अब तक स्वप्न साकार करने के लिए कोई योजना नहीं बनाई है। अब तक परिणाम ढाक के तीन पात ही रहे है। सरकार ने सवा साल में विकास के घोडे तो दौडाए लेकिन केवल कागजों में। विकास धरातल पर उतरे इसका इंतजार प्रदेशवासियों को लम्बे समय से है।

पत्रकारों को धमकाती है सरकार
देवनानी ने पत्रकारों का पक्ष रखते हुए कहा कि संविधान रक्षा एवं बोलने लिखने की आजादी की बडी बडी बाते कांग्रेस करती है जबकि राज्य सरकार की ओर से समाचार छापने के नाम पर पत्रकारों को धमकाने का काम किया है। विज्ञापन देने के बदले समाचार छापने की बाध्यता करना इस बात को दर्शाता है। ऐसा कर कांग्रेस न केवल संविधान रक्षा का ढोंग रच रही है बल्कि लोकतंत्र के संघीय ढांचे का भी गला घोटा जा रहा है।

मीसाबंदियों की पेंशन बंद करना संकुचित मानसिकता
देवनानी ने कांग्रेस पर संकुचित मानसिकता का आरोप भी लगाया। देवनानी ने कहा कि आपातकाल के दौरान कुशासन के खिलाफ सैकडों की संख्या में भारत के लोग 19 माह जेल में रहे। मीसाबंदियों ने जेलों में भयंकर यातनाएं झेली जिसे देखते हुए मिसाबंदियों को सरकार की ओर से जो पेंशन चालू की गई थी उसको कांग्रेस सरकार की ओर से बंद करना उसकी संकुचित मानसिकता को दर्शाता है।

जगजाहीर मंत्री-अफसरों में विवाद
देवनानी ने कहा कि राजस्थान में मंत्रियों का कहना अफसर नहीं मान रहे है। गत दिनों से मंत्री अफसरों के बीच हुए आपसी विवाद जग जाहीर है। नौकरशाही मंत्रियों पर हावी हो रही है। आए दिन मंत्री अफसरों के विवाद दफ्तरों से निकलकर सडकों पर आ रहे है और समाचार पत्रों के मुखपृष्ठों की सुर्खियां बन रही है। एक साल में जो विकास कार्य होने थे वे मंत्री और अफसरों के विवाद के भेंट चढ गए जिसका खमियाजा जनता को भुगतना पड रहा है। देवनानी ने कहा कि कहा कि एक साल में प्रदेश में अपराधों का ग्राफ बहुत तेजी से बढा है। आमजन की एफआईआर दर्ज करना तो दूर मंत्रियों के कहने पर भी थानों में एफआईआर दर्जर नहीं होती। प्रदेश में अपराध व भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है।

क्या ऐसे बनेगा निरोगी राजस्थान
मासूमों की मौत का जिक्र करते हुए देवनानी ने कहा कि पिछले एक साल में प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में पौने अठारह हजार मासूम बच्चों की मौतें होने के बाद भी सरकार के चेहरे पर कोई सिकन नजर नहीं आ रही है। प्रदेश की जनता के लिए इतना संवैदनशील मामला होने के बाद भी सरकार बच्चों की मौतों के मामले में कोई जिम्मेदारी लेने के बजाए उनकी गंभीर बीमारियों तथा अभिभावकों व रेफर करने वाले अस्पतालों पर दोष मढ़ने का प्रयास कर रही है। क्या इसी प्रकार सरकार निरोगी राजस्थान बनाने का स्पप्न देख रही है अगर हाॅ तो यह केवल स्वप्न मात्र ही साबित होगा।

युवाओं को रोजगार नहीं
1 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार प्रदान करने की दिशा में सरकार द्वारा 31513 पदों पर युवाओं को नियुक्ति देना व 28601 पदों पर परिणाम जारी होना बताया है, परन्तु ये तो गत सरकार द्वारा प्रारम्भ की गई व प्रक्रियाधीन भर्तियों के परिणाम है। वर्तमान सरकार द्वारा अब तक नई भर्तियां विज्ञापित कर उनकी परिक्षाओं का आयोजन कराकर नियुक्तियां दी गई है वे केवल अंगुलियों पर गिनी जा सकती है।

शिक्षा मंत्री को वीर सावरकर जैसे वीर महापुरूष नहीं लगते
उन्होंने कहा कि प्रदेश के शिक्षा मंत्री को वीर सावरकर, भगतंिसह, डाॅ.हेडगेवार, झांसी की रानी इत्यादि महापुरूष वीर नहीं लगते हैं। इनकी नजर में राजीव गांधी, नेहरू जैसे कांग्रेसी नेता ही महापुरूष है। कांग्रेस महापुरूषों को जातियों के आधार पर बांटने का प्रयास कर रही है। मंत्री की ओर से स्कूलों से वीर सावरकर, डाॅ.हेडगेवार जैसे महापुरूषों के चित्र हटाने के आदेश जारी करना संकुचित मानिसिकता को दर्शाता है जिसे प्रदेश की जनता कतई बर्दास्त नहीं करेगी।

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