निजी स्कूलों की फीस लेने की भूख अब चरम सीमा पर

अजमेर दिनांक 01/05/2020 अजमेर जिला कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष सीए विकास अग्रवाल व प्रदेश राजीव गाँधी यूथ फ़ेडरेशन के प्रदेश संयोजक कमल गंगवाल ने आज केंद्रीय संसाधन मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल एवं सीबीएससी बोर्ड के डायरेक्टर आर के चतुर्वेदी को पत्र व जरिये ईमेल जानकारी देते हुए बताया कि निजी स्कूलों द्वारा 6 से 12 वर्ष के स्कूली छात्रों से निजी स्कूल इन दिनों केवल इसलिए 1-1 घंटे के ऑनलाइन टेस्ट ले रहे हैं ताकि वे यह कह सके कि उन्होंने एक माह ऑनलाइन पढ़ाई कराकर बच्चों की परीक्षा भी ले ली, अब तो उन्हें फीस लेने का हक हो गया है यदि इन्हे फीस ही लेनी है तो वैसे ही ले लेवें, इन मासूमों पर इतना जुल्म क्यों किया जा रहा है।
गंगवाल और अग्रवाल ने निजी स्कूलों पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि फीस वसूली के लोभ में इन मासूमों को मोबाइल रेडिएशन से मानसिक और शारिरिक रोगों की भट्टी में झोंका जा रहा है। इसके अतिरिक्त कक्षा 2 से 9 के इन मासूमों को क्यों दिन में 4 घंटे ऑनलाइन क्लास के लिए कान में ईयर फोन लगाकर मोबाइल में आंखें गड़ाकर बैठना पड़ रहा है और उसके बाद 3 घंटे व्हाट्सएप पर होम वर्क करना पड़ रहा है जबकि अभी बच्चों का ग्रीष्मकालीन अवकाश भी है।
पत्र व ईमेल में उल्लेख करते हुए बताया की कई निजी स्कूलों द्वारा अब अभिभावकों के मोबाइल पर फीस जमा करने के लिए मैसेज भी आने लग गए है वो भी एक बार नहीं तीन चार बार। कोरोना लॉक डाउन के चलते इन दिनों एक माह से हर घर में स्कूली बच्चे 3 से 4 घंटे मोबाइल ऑनलाइन क्लासेज और 2 से 3 घंटे मोबाइल के जरिए होमवर्क करने में गुजार रहे हैं।यदि यही स्थिति रही तो वह दिन दूर नहीं जब बच्चे नेत्र, कर्ण, शारीरिक एवं मनोरोगों का जबरदस्त तरीके से शिकार हो जाएंगे जिसकी जिम्मेदारी क्या ये निजी स्कूल संचालक उठाएंगे। दोनों नेताओं ने पत्र व जरिये ईमेल मांग की है कि ऐसे लोभी स्कूलों को चिन्हित कऱ इनकी मान्यता को हमेशा के लिए निरस्त करने की मांग की है और सभी निजी स्कूलों को वर्तमान परिस्थतियों को ध्यान में रखते हुए पूर्व की भांति ही स्कूलों का सत्र 1 जुलाई से चालू करने और तदनुसार ही फीस वसूलने की मांग की है और तत्काल प्रभाव से ऑनलाइन मोबाइल कक्षाओं पर रोक लगाने की मांग की है।

error: Content is protected !!