नेताजी की घर वापसी की चर्चाएं चरम पर

केकड़ी 14 दिसंबर (पवन राठी)पंचायत राज चुनाव परिणामो में भाजपा को मिली बड़ी सफलता के बाद क्षेत्र की राजनीती में भूचाल सा आ गया है। इन चुनावों में न केवल चिकित्सा मंत्री का गढ़ ही भाजपा ध्वस्त करने में कामयाब रही बल्कि पुराने नेताओ की घर वापसी की चर्चाएं भी अब चरम पर पंहुच चुकी है।इसी कड़ी में एक पूर्व प्रभाव शाली व्यक्तित्व के धनी पूर्व प्रधान भूपेंद्र सिंह शक्तावत की घर वापसी की चर्चाएं चरम पर है।इनका वर्चस्व सावर सत्ताईशा में ही नही बल्कि पूरे केकड़ी विधान सभा क्षेत्र में है।ये तीन बार केकड़ी के प्रधान व दो बार सावर के सरपंच रह चुके है।हाल के चुनावों में पार्टी में रहते हुए ये कंही भी कांग्रेस कैम्प में नजर नही आये थे।चुनावो से पहले ही चर्चाये थी कि प्रधान साब वापस भा ज पा में आ सकते है।इससे भी इनकी घर वापसी की चर्चाओं को और ज्यादा बल मिला।
इनको राज्य के दिग्गज नेता भैरोसिंह शेखावत ने 1990 में भाजपा की सदस्यता ग्रहण करवाई थी।2014 में वर्तमान चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने कांग्रेस की सदस्यता दिलवाई थी।
खबरे यह है कि कांग्रेस में कार्यकर्ताओ को सम्मान नही मिलने से ये काफी खफा है। इससे भी ये खुद को कांग्रेस के दमघोटू वातावरण में असहज महसूस कर रहे है।इससे घर वापसी की चर्चाओं को और बल मिला और ये चरम पर पंहुच चुकी है।वैसे भी पुराने भा ज पा नेताओ की घर वापसी का इस समय पार्टी में दौर चल पड़ा है और घनश्याम तिवाड़ी की घर वापसी हो चुकी है।इसके अलावा भी अन्य भा ज पा छोड़ चुके नेताओ ने भी घर वापस लौट कर राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है।इसके कारण भा ज पा मजबूत होकर उभर रही है।
केकड़ी विधान सभा क्षेत्र में फिलहाल भा ज पा में ऐसा कोई प्रभावशाली नेता दूर दूर तक नजर नही आ रहा जिसका हर गांव में अपना प्रभाव हो जो सबको एक साथ लेकर चलने की क्षमता रखता हो।जिसका क्षेत्र की जनता में अच्छा प्रभाव और जुड़ाव हो ऐसे नेता की आज भा ज पा को भी जरूरत है।ऐसी परिस्थितियों में 45 साल के अनुभवी भूपेंद्र सिंह शक्तावत की घर वापसी होती है तो भा ज पा शसक्त होकर उभरेगी और आगामी चुनावो में अच्छा प्रदर्शन कर पायेगी।
खबरे तो यंहा तक है कि भा ज पा के वरिष्ठ नेताओं ने भी इनसे संपर्क करके घर वापसी के प्रयास प्रारम्भ कर दिए गए है।अब देखना यह है कि नेताजी की घर वापसी कब और कैसे हो पाती है।

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