अमृत महोत्सव के पोस्टर में पंडित नेहरू की फोटो नहीं लगाने पर कड़े शब्दों में निंदा

अजमेर! पूर्व विधायक डॉ राजकुमार जयपाल अजमेर शहर जिला कांग्रेस कमेटी के निवर्तमान महासचिव शिव कुमार बंसल महेश चौहान अशोक बिंदल डॉ संजय पुरोहित राजेन्द्र गोयल ने भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (ICHR) द्वारा जारी किए गए आजादी के अमृत महोत्सव के पोस्टर में पंडित जवाहर लाल नेहरू की तस्वीर नहीं लगाने की कड़े शब्दों में निंदा की हैी

कांग्रेसियों ने प्रेस वक्तव्य जारी कर बताया कि पोस्टर में पंडित नेहरू की फोटो नहीं लगा कर केंद्र सरकार ने छोटी सोच का प्रदर्शन किया है। पंडित नेहरू आजादी की लड़ाई के दौरान 9 बार जेल गए। उन्होंने अपने जीवन के 3259 दिन (करीब 9 साल) जेल में गुजारे। अंग्रेजों का विरोध करते हुए कई बार उन्होंने अंग्रेजों द्वारा किए गए बल प्रयोग का सीना तान कर सामना किया।

कांग्रेसियों ने कहा कि जहां विनायक दामोदर सावरकर ने जेल जाने के एक साल बाद में ही अंग्रेजों से माफी मांगना शुरू कर दिया था और कुल छह बार माफी मांगी एवं जेल से रिहा होने के बाद ब्रिटिश एजेंट बनकर काम किया वहीं पंडित नेहरू फौलाद की तरह अंग्रेजों के सामने खड़े रहे और भारत को आजादी दिलाकर अपना संकल्प पूरा किया।
नेहरू जी ने भारत ही नहीं विश्व पटल पर भी भारत की आजादी की बात मजबूती से रखी। भारत के सबसे अमीर परिवारों में से एक नेहरू परिवार के सदस्य श्री जवाहर लाल नेहरू ने अपने देश की खातिर सारी सुख-सुविधाओं का त्याग कर अपना जीवन देश के लिए समर्पित कर दिया। नेहरू परिवार के सभी सदस्यों श्री मोतीलाल नेहरू, श्रीमती स्वरूप रानी नेहरू, श्री जवाहर लाल नेहरू, श्रीमती कमला नेहरू, श्रीमती विजयलक्ष्मी पंडित, श्रीमती कृष्णा नेहरू एवं श्रीमती इन्दिरा प्रियदर्शनी नेहरू का भारत की आजादी की लड़ाई में बड़ा योगदान रहा है। उनके पिता श्री मोतीलाल नेहरू ने अपना घर आनंद भवन भी क्रांतिकारियों के लिए दे दिया था। श्री मोतीलाल नेहरू ने स्वराज पार्टी बनाकर आजादी की लड़ाई को आगे बढ़ाया। आजादी की खातिर अपना घर तक छोड़ देने वाले पंडित नेहरू के योगदान को कमतर दिखाने की कोशिश करना मोदी सरकार की बेवकूफी मात्र है।

उन्होंने बताया कि जब सुभाष चन्द्र बोस की आजाद हिन्द फौज (आईएनए) के तीन प्रमुख कमांडरों सहगल, ढिल्लन और शाहनवाज पर अंग्रेजों ने मुकदमा चलाया तो नेहरू जी ने पूरे देश में इनके समर्थन के लिए कैंपेन चलाया और आईएनए डिफेंस कमिटी बनाई। नेहरू जी ने अन्य वकीलों के साथ मिलकर लाल किले में वकालत करते हुए इनका मुकदमा लड़ा और आजाद हिन्द फौज के सैनिकों के मृत्युदंड को माफ करवाया।
कांग्रेसियों ने कहा कि जबकि विनायक दामोदर सावरकर ने आजाद हिन्द फौज के खिलाफ ब्रिटिश सरकार की तरफ से लड़ने के लिए युवाओं को ब्रिटिश फौज में भर्ती करवाया। देश के साथ गद्दारी करने वाले ऐसे लोगों को स्वतंत्रता सेनानी बताना सभी स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान है।

उन्होंने बताया कि अपना तन, मन, धन एवं जीवन देश की आजादी की लड़ाई लड़ने एवं आधुनिक भारत की नींव रखने के लिए लगा देने वाले पंडित नेहरू के योगदान को कमतर दिखाने के कुप्रयास का खामियाजा भाजपा सरकार को भुगतना पड़ेगा और समय आने पर देश मोदी सरकार को सबक सिखाएगा।

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