विद्यासागर तपोवन में गणिनी आर्यिका गुरु मां 105 श्री संगममति माताजी जी ने आज प्रात काल प्रवचन देते हुए कहा कि उपदेश की सार्थकता तभी है जब वह ग्रहण किया जाए साधु संत अपने जीवन के अनुभव के आधार पर अपना चिंतन समाज में रखते हैं और सत्यता के साथ समाज को प्रेरणा देते हैं समझना इस बात को है कि संत जो कहते हैं उस पर हमारा श्रद्धान कितना है बस वही हमें सही मार्ग पर ले जाता है दिगंबर साधु अपनी चर्या के लिए जाने जाते हैं नियम एवं अनुशासन आवश्यक अंग हो जाते हैं संतो के जीवन से सदैव समाज को प्रेरणा लेनी चाहिए ताकि समाज में जागृति आ सके धर्म का प्रचार प्रसार हो सके आज के णमोकार अनुष्ठान में प्रात काल अभिषेक करने का सौभाग्य शांतिलाल निर्मल पाटनी को मिला जागृति मंच की ओर से सुनील पल्लीवाल एवं गौरव पाटोदी सम्मानित किया
रात्रि में 8:00 से 9:00 णमोकार का अनुष्ठान आज के पुण्यार्जक शांतिलाल निर्मल पाटनी को इंद्र वेशभूषा में आरती मैं लाया गया उसके पश्चात पंच परमेष्ठी भगवान एवं पूज्य माता जी की आरती हुई सभी ने णमोकार महामंत्र का जाप संगीत मंडली के साथ किया
अगले 35 दिन तक रोज णमोकार महामंत्र का जाप होगा सभी समाज बंधु इस आयोजन में भाग ले रहे हैं