सिन्धुपति महाराजा दाहरसेन 1353वीं जयंती के अवसर पर ऑनलाइन संगोष्ठी सम्पन्न

अजमेर 23 अगस्त, सिन्धुपति महाराजा दाहरसेन 1353वीं जयंती के अवसर पर व आजादी के अमृत महोत्सव पर होने वाले साप्ताहिक कार्यक्रमों में सिन्ध का स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान पर ऑनलाइन संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
पूर्व सांसद ओंकारसिंह लखावत ने कहां कि संसार का सिरमोर सिन्ध का स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान व आजादी से पूर्व सिन्ध भारत का अभिन्न अंग था।1857 की क्रांति से ही स्वतंत्रता आदांेलन में सिन्ध का महत्वपूर्ण योगदान रहा है व महाराजा दाहरसेन के काल खण्ड से ही सीमाओं की रक्षा के लिये सिन्ध ने सदैव संघर्ष किया है। आजादी से पूर्व यदि हम सिन्ध के स्वतत्रंता के वीर सपूतों को याद करें तो परमवीर राणा रतन सिंह, वीर रूपला कोल्ही ने 1857-59 की क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए मातृभूमि की रक्षा के लिए अंग्रेज सरकार द्वारा फांसी की सजा दी गई व शहीद हेमू कालाणी जिसका की यह जन्म शताब्दी वर्ष ह,ै उन्होंने अपने पराक्रम से अंग्रेजों की नींद उड़ा दी, उन्हें भी फांसी की सजा सुनाई गई इतिहास के पन्नों में छुपे ऐसे बलिदानी महापुरुषों का स्मरण कर उन्हें जीवन्त रखने के प्रयास का परिणाम अन्ततोगत्वा अखण्ड भारत का प्रकट रूप एक दिन दिखेगा व नई पीढी को इतिहास की जानकारी देना हम सबका कर्तव्य भी है।

सेवानिवृत्त डिमार्टमेंट ऑफ इतिहास अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी, अलीगढ़ के प्रो. बी.एल.भादानी ने कहां महाराजा दाहरसेन का राज्य में प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर प्रकाश डाला व स्वतंत्रता के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले महापुरूषों की वजह से ही आजादी के इस पावन पूर्व को प्रतिवर्ष मना रहे है।

सेवानिवृत्त सरगुजा विश्वविद्यालय अम्बिकापुर छत्तीसगढ़ पर्यावरण विज्ञान विभाग, प्रो. मधुर मोहन रंगा ने कहां कि राजा दाहरसेन की सामरिक कौशलता व कुटनीति पर महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराते हुए महाराजा दाहरसेन की पत्नी रानी लाडी बाई का जोहर व उनकी बेटियां व राजकुमारी सूर्या कुमारी व पारमल का शोर्य को कभी भी भूला नहीं जा सकता है। आजादी के इस स्वतंत्रता सेनानियों को भी हम नमन कर उनसे प्रेरणा लेकर अपने जीवन में उतारने का अथक प्रयास करना चाहिए।

समारोह समिति के कंवल प्रकाश किशनानी ने कहां कि दुनियां में महाराजा दाहरसेन का स्मारक दर्शन योग्य है, अब यह पर्यटन स्थल बनता जा रहा है, जहां सिन्धुपति महाराजा दाहरसेन के जीवन से जुड़ी पुरी घटना को प्रदर्शित किया गया है व सिन्ध से जुड़ी सिन्धु घाटी सभ्यता संस्कृति, पहनावा, आराध्यदेव झुलेलाल, सन्त कंवरराम, स्वामी विवेकानन्द व अन्य महापुरूषों के चित्रण से लोगों को महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराने के साथ सिन्ध के स्वतंत्रता सैनानियों परमवीर राणा रतन सिंह, रूपला कोल्ही व हेमू कालाणी की प्रतिमाओं को यहां पर लगाकर प्रतिवर्ष उनकी जयंती व बलिदान दिवसों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते है।

24 अगस्त पूर्व संध्या पर दीप प्रज्जवलित
समिति के महेन्द्र कुमार तीर्थाणी ने बताया कि सिंधुपति महाराजा दाहरसेन की 1353वीं जयंती की पूर्व संध्या पर 24 अगस्त को सायं 6 बजे स्मारक पर दीप प्रज्जवलन का आयोजन रखा गया है।

25 अगस्त को जयंती पर होगा मुख्य कार्यक्रम
सिधुपति महाराजा दाहरसेन की 1353वीं जयंती 25 अगस्त को प्रातः 9 बजे हरिभाऊ उपाध्याय नगर विस्तार स्थित स्मारक पर देशभक्ति सांस्कृतिक कार्यक्रम व पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया जायेगा यह सभी कार्यक्रम अजमेर विकास प्राधिकरण, नगर निगम अजमेर, भारतीय सिन्धु सभा, पर्यटन विभाग, सिन्धु शोध पीठ, म.द.स.विश्वविद्यालय, भारतीय इतिहास संकल्न समिति सिंधुपति महाराजा दाहरसेन स्मारक विकास व समारोह समिति के संयुक्त तत्वावधान में होगा।

समन्वयक,
मो. 9413135031

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