मित्तल हॉस्पिटल में 24 घंटे सातों दिन हृदय रोगियों की बाईपास सर्जरी संभव

महिला और पुरुष दो बुजुर्ग हृदय रोगियों को की हुई सफल बाईपास सर्जरी

अजमेर,10 जून()। मित्तल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, अजमेर में बाइपास सर्जरी की सुविधा अब 24 घंटे सातों दिन संभव है। हॉस्पिटल के हृदय रोग विभाग ने महिला और पुरुष दो बुजुर्ग हृदय रोगियों की हाल ही में सफल बाईपास सर्जरी की है। इनमें महिला हृदय रोगी इमरजेंसी में रेलवे से रेफर होकर मित्तल हॉस्पिटल पहुंची थीं जिनके हृदय की तीनों धमनियों में रुकावट थी। बाईपास सर्जरी के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं था, वहीं दूसरे हृदय रोगी केंद्र सरकार के कर्मचारी पेंशनर हैं। दोनों ही रोगियों को उपचार के बाद हॉस्पिटल से छुट्टी दी जा चुकी है और दोनों ही रोगी फॉलोअप जांच में स्वयं को अच्छा महसूस कर रहे हैं।

मित्तल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट एवं हार्ट फेलियर एक्सपर्ट डॉ विवेक माथुर ने बताया कि चांद बावड़ी, केसर गंज अजमेर निवासी कंचन देवी की 79 साल की उम्र में बाईपास सर्जरी की गई। सर्जरी सीनियर कार्डियो थोरासिक एवं वास्कुलर सर्जन डॉ राजीव श्रीवास्तव के साथ हॉस्पिटल के हृदय रोग विभाग की कुशल व दक्ष चिकित्सकों की टीम ने की।

उन्होंने बताया कि कंचन देवी श्वास लेने में तकलीफ के साथ जांच के लिए आई थी। अचानक से श्वास में उठाव होने के कारण उन्हें आए दिन अस्पताल ले जाना पड़ता था। पिछले एक डेढ़ माह में उन्हें दो—तीन बार रेलवे हॉस्पिटल ले जाया गया जहां से उन्हें मित्तल हॉस्पिटल रेफर किया गया। यहां जांच में पाया कि कंचन देवी के हृदय की तीनों ही धमनियों में रुकावट थी। उनके परिवारजन को रोगी की शीघ्र बाईपास सर्जरी कराने की ही सलाह दी गई। रोगी के दामाद जितेन्द्र ने बताया कि परिवार बाईपास सर्जरी कराने के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं था। इस दौरान जांच के लिए मित्तल हॉस्पिटल पहुंचने पर उनकी मुलाकात एक अन्य बुजुर्ग महिला हृदय रोगी से हुई जिन्होंने कंचन देवी को स्वयं की स्थिति बताते हुए उपचार के लिए प्रेरित कर दिया।

सीनियर कार्डियो थोरासिक एवं वास्कुलर सर्जन डॉ राजीव श्रीवास्तव एवं सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट व हार्ट फेलियर एक्सपर्ट डॉ विवेक माथुर सहित हॉस्पिटल के हृदय रोग विभाग की टीम ने विगत सप्ताह में अजमेर के ही बोराज रोड निवासी 77 वर्षीय सीजीएचएस पेंशनर हृदय रोगी की भी बाईपास सर्जरी की। दोनों रोगियों को हॉस्पिटल से छुट्टी दी जा चुकी है।

डॉ विवेक माथुर में बताया कि मित्तल हॉस्पिटल में नॉन स्टेंट और डबल किस क्रश तकनीक से हृदय रोगियों का उपचार भी किया जा रहा है। ऐसे ह्रदय रोगी जिन्हें पहले से एक या एक से अधिक स्टेंट(छल्ला) लगा हुआ है और फिर से हृदय की धमनियों में रुकावट आ गई है उन्हें उपचार के लिए किसी बड़ी सर्जरी को लेकर चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।

उन्होंने बताया कि ड्रग इल्यूटिंग बैलून तकनीक जिसे नॉन स्टेंट तकनीक भी कहा जाता है; यूरोपियन व अमेरिकन मापदण्डों से स्वीकृत बेहद कारगर तकनीक है। इस तकनीक में दवाई युक्त बैलून ह्रदय की रुकावट वाली धमनी में पहुंचाकर रुकावट वाली जगह फुला दिया जाता है। बैलून से दवाई रुकावट वाले स्थान पर धमनी में स्थापित हो जाती है जिससे रक्त का प्रवाह सामान्य हो जाता है। इस तकनीक से छोटी नाड़ी तथा हाथ एवं पैरों के ब्लॉकेज भी खोले जाते हैं। उपचार के बाद रोगी को 48 घंटे में छुट्टी दे दी जाती है।

क्या है डबल किस क्रश तकनीक ……….
ऐसे हृदय रोगी जिनके रुकावट का स्थान धमनी में दो राहे पर होता है वहां इस तकनीक का उपयोग बहुत ही कारगर होता है। धमनी के दो राहे पर रुकावट होने की स्थिति में वहां एंजियोप्लास्टी के जरिए स्टेंट लगाया जाना जटिल होता है। ऐसे हृदय रोगियों को बाइफरकेशन लीजन तकनीक जिसे डबल किस क्रश तकनीक भी कहते हैं से उपचार किया जाना बेहतर विकल्प उपलब्ध है। मित्तल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर पर नॉन स्टेंट और बाइफरकेशन लीजन इन दोनों ही तकनीक से उपचार कर अनेक रोगियों को स्वास्थ्य लाभ पहुंचाया जा रहा है।

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