जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री 1008 आदिनाथ जन्म कल्याणक महोत्सव सम्पन्न

श्री जी निकले रथ पर सवार होकर, जगह-जगह किया व्यापारी बन्धुओं ने स्वागत
प्राणी अपने भावों के अनुसार अपने संसार का निर्माण करता है और अपने भावों के अनुसार ही संसार को नष्ट करता है- श्री 108 विकसंतसागर जी महाराज

आज दिनांक 12 मार्च – जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री 1008 आदिनाथ जन्म कल्याणक महोत्सव दो दिवसीय कार्यक्रम आज श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगम्बर जैसवाल जैन मन्दिर केसरगंज अजमेर में प्रातः 5ः00 बजे से शुभारम्भ किया गया। प्रातः 5ः00 बजे ब्राहमी महिला मण्डल की महिलाओं द्वारा मंगल बधाई के गीत गाये गये जिसमें समाज की महिलाओं ने भगवान आदिनाथ जी के मंगल बधाई गीत श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगम्बर जैसवाल जैन मन्दिर केसरगंज में गाये एवं इस अवसर पर भगवान आदिनाथ को ब्राहमी महिला मण्डल के द्वारा चांदी के पालने में बालक रूप में पालना झुलाया गया एवं माता मरूदेवी को भगवान के जन्म की मंगल बधाई ‘‘सारी नगरी में मच गया हल्ला भयो महलो में लल्ला….’’, ‘‘ओ झूला झूले रे तीर्थकर ऐसी शुभ घड़ी आयी…..’’ आदि गाये गये। कार्यक्रम में सर्वप्रथम भगवान आदिनाथ शांतिधारा अभिषेक किये गये एवं भगवान की जन्म कल्याणक की पूजा अर्चना समस्त पुजारियों द्वारा की गई। प्रातः 8ः00 बजे ध्वजारोहणकर्ता एवं भगवान के सारथी बनने का सौभाग्य सुभाष चडौसिया परिवार को प्राप्त हुआ।
इस अवसर पर मूलनायक पारसनाथ भगवान के प्रथम अभिषेक एवं शांतिधारा का करने का सौभाग्य मुकेश कुमार सुभाषचंद्र अनिल सर्वेश परिवार को प्राप्त हुआ आदिनाथ  जिनालय में आदिनाथ भगवान के प्रथम अभिषेक एवं शांतिधारा करने का सौभाग्य रमेशचंद्र भूपेंद्र ललित अमित आदि पाण्डया परिवार को प्राप्त हुआ। पदमप्रभु भगवान पर प्रथम अभिषेक एवं शांतिधारा करने का सौभाग्य मोहनलाल चंपा जैन परिवार को प्राप्त हुआ तथा शीतलनाथ भगवान पर प्रथम अभिषेक एवं शांतिधारा करने का सौभाग्य सतीशचंद्र गिरीश कुमार नरेश राजेश ढिलवारी परिवार को प्राप्त हुआ। इसी क्रम में दो शांतिधाराएं क्रमशः मनोज कुमार आशीष कुमार कटारिया परिवार एवं मनोज गजेंद्र अभय रेखा दनगसिया परिवार को प्राप्त हुआ।
तत्पश्चात् भगवान आदिनाथ की भव्य रथयात्रा केसरगंज जैन मंदिर से प्रारम्भ होकर नवज्योति मार्ग, गोल चक्कर, आर्य समाज मार्ग, स्टेशन रोड, गांधी भवन, मदार गेट, कवंडसपुरा, पड़ाव होते हुए आदिनाथ मार्ग लालकोठी पर सम्पन्न हुई। शोभायात्रा में ढोल, घोड़े, बैण्ड, बग्गियॉं, झांकी व श्री जिनेन्द्र प्रभु को विराजमान करते हुए श्रीजी का रथ व श्री पार्श्वनाथ संगीत मंडल केसरगंज समधुर भजनों से आनन्दित हुआ। समाज के महिला मण्डल, पुरूष संगठन व समस्त साधर्मीजन हाथों में जैन धर्म ध्वजा लेकर शोभयात्रा में सम्मिलित हुऐ। शोभयात्रा का जगह-जगह भव्य स्वागत किया गया।
तत्पश्चात् प्रातः 10ः15 बजे आदिनाथ मार्ग, लाल कोठी, केसरगंज पर एक वृहद सभा का आयोजन किया गया जिसमें चित्र अनावरण, दीप प्रज्जवलन, मंगलाचरण व मांगलिक उद्बोधन का कार्यक्रम आयोजित हुआ। सभा में पुखराज पहाड़िया, भारती श्रीवास्तव व विजय जैन सहित अन्य अतिथि व समाज की समस्त उत्कृष्ट संस्थाओं के प्रतिनिधि, समाज के समस्त गणमान्य बन्धु उपस्थित हुए। दोपहर 12ः00 बजे से आमजन को आदिनाथ मार्ग पर जैन सेवा के अन्तर्गत भोजन वितरण किया गया एवं साधर्मी बन्धुओें व आगन्तुक अतिथियों के वात्सल्य भोजन की व्यवस्था दिगम्बर जैसवाल जैन धर्मशाला केसरगंज में रखी गई।
उत्सव संयोजक दीपक कोठारी ने बताया कि इस अवसर पर प.पूज्य राष्ट्रसंत गणाचार्य समाधि सम्राट विरागसागर जी के सुयोग्य शिष्य एवं परम पूज्य पटृाचार्य आचार्य विशुद्धसागर जी के आज्ञानुवृति परम पूज्य वात्सत्ल्य तपोनिधि उपाध्याय रन्त गुरूदेव श्री 108 विकसंतसागर जी महाराज संसघ ने सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि परमात्मा सृष्टि का कर्ता नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति स्वयं की अपनी करनी के अनुसार अपना संसार बनाता है। जैसा आप संसार बनाना चाहते हो वैसा ही संसार आप बना सकते है। ‘‘जैसा बोओगे वैसा पाओगे, जैसी करनी वैसी भरनी’’ ये पक्तियॉं प्रमाणित करती है कि प्राणी अपने भावों के अनुसार अपने संसार का निर्माण करता है और अपने भावों के अनुसार ही संसार को नष्ट करता है। भावों के द्वारा ही तुम संसार को नष्ट कर सकते हो और भावों के द्वारा ही तुम संसार को बढ़ा सकते हो। भावना भव वर्धिनी भावना भव नाषिनी होती है। इसी क्रम में सांय 07ः30 बजे पुर्ण्याजक परिवारो के द्वारा रिद्धि सिद्धि भक्ताबर पाठ का संगीतय प्रस्तुति केसरगंज जैन मंदिर में की गई।
आज के कार्यक्रम में मंत्री सुनील साहबजाज, प्रसार प्रसार व उत्सव संयोजक  दीपक जैन कोठारी, कपिल दनगसिया, योगेन्द्र कोलानायक, राकेश घीया सहित  समस्त मंदिर कमेटी व समाज बन्धु उपस्थित रहे।

(दीपक जैन कोठारी)
उत्सव संयोजक
मो. 8209302264

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