अजमेर, 23 अप्रैल।
विश्व पुस्तक दिवस के अवसर पर अजमेर लेखिका मंच एवं सामाजिक सेवा संस्थान द्वारा पाठन संस्कृति को बढ़ावा देने तथा महिलाओं में साहित्य के प्रति रुचि जागृत करने हेतु एक अनूठी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
इस आयोजन में मंच से जुड़ी सभी महिला रचनाकारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिता के अंतर्गत प्रत्येक प्रतिभागी ने अपनी पसंदीदा पुस्तक के साथ अपना छायाचित्र साझा किया तथा उस पुस्तक के बारे में अपने विचार व्यक्त किए।
प्रतिभागियों ने अपनी-अपनी पुस्तकों का गहन अध्ययन कर सारगर्भित, प्रेरणादायक और संवेदनशील विचार प्रस्तुत किए। विभिन्न विषयों पर आधारित पुस्तकों के माध्यम से ज्ञान, संवेदना और साहित्यिक समझ का सुंदर प्रदर्शन देखने को मिला।
संस्थान की ओर से कहा गया कि इस प्रकार के आयोजन न केवल पठन-पाठन की संस्कृति को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि महिलाओं को अपनी साहित्यिक अभिव्यक्ति के लिए एक सशक्त मंच भी प्रदान करते हैं। भविष्य में भी ऐसे रचनात्मक और प्रेरणादायक कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।
कार्यक्रम की सफलता पर सभी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए उनके साहित्य प्रेम एवं सक्रिय सहभागिता की सराहना की गई।
विश्व पुस्तक दिवस के अवसर पर अजमेर लेखिका मंच एवं सामाजिक सेवा संस्थान द्वारा एक अनूठे साहित्यिक आयोजन का सफल आयोजन किया गया, जिसमें सभी महिला रचनाकारों ने अपनी-अपनी पसंदीदा पुस्तकों के साथ छायाचित्र साझा करते हुए उन पर अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर डॉ. मधु खंडेलवाल ने ‘पोस्ट बॉक्स नंबर 203 नालासोपारा’ के बारे में बताते हुए कहा कि यह पुस्तक सिखाती है कि सच्चाई और अपनी पहचान को छिपाने से इंसान भीतर से टूट जाता है, इसलिए स्वयं को स्वीकार करना अत्यंत आवश्यक है। साथ ही यह पुस्तक हमें समाज की संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर इंसानियत और संवेदनशीलता को अपनाने की प्रेरणा देती है।
अनीता यादव ने शिव खेड़ा की पुस्तक ‘जीत आपकी’ की समीक्षा करते हुए कहा कि जब इंसान टूटने लगता है और हार मानने की स्थिति में होता है, तब यह पुस्तक उसे प्रेरित करती है कि वह स्वयं से कहे—अभी सफर बाकी है और खुद पर विश्वास बनाए रखे।
पुष्पा शर्मा ने ‘परिवर्तन’ पुस्तक के माध्यम से जीवन की निरंतर गतिशीलता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि व्यक्ति को समय और परिस्थितियों के अनुसार अपने निर्णय लेने चाहिए। मीनाक्षी ने ‘अपमान से आत्मसम्मान’ की व्याख्या करते हुए मानव की कमजोरियों को समझने और उन्हें शक्ति में परिवर्तित करने का संदेश दिया।
माया शर्मा ने ‘दास्तान-ए-जिंदगी’ की पंक्तियों के माध्यम से जीवन के उतार-चढ़ाव को सहजता से स्वीकार करने की सीख दी, वहीं इंदू वैध ने मनु शर्मा द्वारा लिखित ‘संधि’ में कृष्ण की लीलाओं के माध्यम से एक साधारण इंसान की तरह व्यवहार करने का संदेश बताया।
अरुणलता उदय ने मन्नू भंडारी की ‘श्रेष्ठ कहानियां’ पर विचार रखते हुए स्त्री, मां की आकांक्षाओं और आत्मनिर्भरता के भाव को रेखांकित किया। डॉ. नंदिता रवि चौहान ने जयशंकर प्रसाद की ‘तितली’ के माध्यम से मानवीय रिश्तों की उलझनों और सच्चाइयों को उजागर किया।
अंजू अग्रवाल लखनवी ने उड़ीसा की लेखिका प्रतिभा राय की ‘द्रौपदी’ पर विचार रखते हुए स्त्री पात्र के माध्यम से अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का सशक्त संदेश दिया।
माया शर्मा एवं प्रतिभा जोशी ने महापंडित राहुल सांकृत्यायन की कृति ‘वोल्गा से गंगा’ (कहानी संग्रह) पर विस्तृत चर्चा करते हुए उच्च कोटि के लेखन और सशक्त चरित्र चित्रण को रेखांकित किया।
डॉ. महिमा श्रीवास्तव ने तुलसीदास कृत ‘रामचरितमानस’ का सुंदर चित्रण करते हुए बताया कि यह काव्य मानव जीवन में प्रेरणा और संकट के समय धैर्य प्रदान करता है।
ब्यावर से नीलम सोनी ने कृष्ण जीवन पर आधारित छंदों के माध्यम से आध्यात्मिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया, वहीं कविता जोशी ने ‘शिव महापुराण’ के प्रसंगों के माध्यम से भगवान शिव और पार्वती के विविध रूपों का विस्तार से वर्णन किया।
भावना शर्मा ने ‘अनहद नाद’ की पंक्तियों से कार्यक्रम को भावपूर्ण बनाया, जबकि उषा शर्मा ने शिवानी की कहानियों के माध्यम से नारी शक्ति और सामाजिक संघर्ष को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
सरपंच कंचन राठौर ने ‘चाणक्य नीति’ पर विचार रखते हुए जीवन में नीति और व्यवहार की महत्ता को रेखांकित किया।
डॉ. छाया शर्मा ने वेदों को मानव जीवन का प्राचीन एवं पवित्र ज्ञान स्रोत बताते हुए सत्य, धर्म और कर्तव्य की प्रेरणा पर प्रकाश डाला। नीतू यादव ने ‘सत्यार्थ प्रकाश’ के माध्यम से मानव जीवन के आध्यात्मिक और पारलौकिक पक्ष को स्पष्ट किया।
संगीता जड़िया ने महर्षि दयानंद सरस्वती की रचनाओं पर विचार प्रस्तुत किए, वहीं सुनीता मीरवाल ने ‘जादू’ और रोहोंडा बर्न जैसी पुस्तकों के संदर्भ में कहा कि हर पुस्तक अपने भीतर नए अवसरों को समेटे रहती है।
जानी-मानी बाल साहित्यकार अनीता गंगाधर ने बाल कहानियों के माध्यम से सरलता और सृजनात्मकता का सुंदर अनुभव साझा किया। कविता अग्रवाल ने ‘डोंट स्वीट द स्मॉल स्टफ एंड इट्स ऑल स्मॉल स्टफ’ के माध्यम से जीवन की छोटी-छोटी बातों को लेकर तनावग्रस्त न होने का संदेश दिया।
अंत में सभी रचनाकारों ने पुस्तकों के प्रति अपने प्रेम और समर्पण को व्यक्त करते हुए इस आयोजन को अत्यंत सफल, सार्थक और प्रेरणादायक बताया।