एम.डी.एस. विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग में सहगामी कार्यक्रमों का आयोजन

रचनात्मक शिक्षण ही एआई युग में शिक्षक की पहचान बनेगा – कुलगुरु प्रो॰ सुरेश कुमार अग्रवाल

वन-वे टीचिंग नहीं, संवादात्मक शिक्षा ही भविष्य का मार्ग

आज की कक्षाओं में एक प्रमुख समस्या यह है कि विद्यार्थी केवल औपचारिक उपस्थिति दर्ज कराने तक सीमित रह जाते हैं, जबकि वास्तविक शिक्षा तभी संभव है जब वे सक्रिय रूप से सीखने की प्रक्रिया में भाग लें। शिक्षण को एकतरफा संवाद (One-way traffic) नहीं होना चाहिए, बल्कि यह शिक्षक और विद्यार्थी के बीच द्विपक्षीय संवाद (Two-way interaction) के रूप में विकसित होना चाहिए। जब तक विद्यार्थी प्रश्न नहीं पूछेंगे, विचार व्यक्त नहीं करेंगे और गतिविधियों में भाग नहीं लेंगे, तब तक प्रभावी शिक्षण संभव नहीं है। उक्त विचार महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय अजमेर के कुलगुरु प्रो सुरेश कुमार अग्रवाल ने विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग के सहगामी कार्यक्रम के रचनात्मक गतिविधि का निरीक्षण करते हुए मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किए | प्रो. अग्रवाल ने सहगामी गतिविधियों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ये गतिविधियां केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि यह विद्यार्थियों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और आलोचनात्मक सोच (Critical Thinking) विकसित करने का सशक्त साधन हैं। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक का दायित्व केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को सीखने के प्रति प्रेरित करना और उनकी क्षमताओं को निखारना भी है। उन्होंने भावी शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा कि वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तेजी से शिक्षा के क्षेत्र में अपनी जगह बना रही है। ऐसे में शिक्षकों के सामने यह चुनौती है कि वे विद्यार्थियों को ऐसा ज्ञान और कौशल प्रदान करें, जो केवल तकनीक के माध्यम से प्राप्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने चेताया कि यदि शिक्षण केवल जानकारी देने तक सीमित रह गया, तो उसकी प्रासंगिकता कम हो जाएगी। इसलिए आवश्यक है कि शिक्षण को अधिक रचनात्मक, संवादात्मक और अनुभवात्मक बनाया जाए। कुलगुरु ने यह भी विशेष रूप से उल्लेख किया कि विद्यार्थियों की पृष्ठभूमि को लेकर किसी प्रकार का पूर्वाग्रह नहीं होना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले विद्यार्थी भी उतने ही प्रतिभाशाली होते हैं, उन्हें उचित मार्गदर्शन और प्रोत्साहन की आवश्यकता होती है। शिक्षक का कर्तव्य है कि वह प्रत्येक विद्यार्थी का मनोबल बढ़ाए और उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करे। प्रो अग्रवाल ने कहा कि एक सफल शिक्षक वही है जो अपने विद्यार्थियों में जिज्ञासा, सृजनात्मकता और आत्मविश्वास का विकास कर सके। उन्होंने सभी भावी शिक्षकों से आह्वान किया कि वे अपने शिक्षण को जीवंत, प्रभावी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाएं, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकें।

शिक्षा विभाग के प्रभारी प्रो. सुभाष चन्द्र के अनुसार, महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के शिक्षा विभाग द्वारा बी.एड. सत्र 2025–26 के विद्यार्थियों हेतु आयोजित पाठ्य सहगामी गतिविधियों (Co-curricular Activities) का क्रम निरंतर जारी है। यह गतिविधियां दिनांक 20 अप्रैल 2026 से प्रारंभ होकर 28 अप्रैल 2026 तक संचालित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ शिक्षण प्रक्रिया में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। इन गतिविधियों के अंतर्गत विभिन्न सांस्कृतिक एवं रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में आयोजित फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिता में निकिता सिंधी, नीलम कुमावत, गोविंद शर्मा, पायलनाथ, ममता गुर्जर, चंद्र प्रकाश रेगर, परशराम साहू, अक्षिता एवं जितेंद्र गुर्जर सहित बी.एड. प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।  ये पाठ्य सहगामी गतिविधियां बी.एड. पाठ्यक्रम का अभिन्न हिस्सा हैं, जिनके माध्यम से विद्यार्थियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन भी किया जाता है। कार्यक्रम के आगामी दिनों में योग सत्र, श्रमदान एवं रिपोर्ट प्रस्तुतिकरण जैसी गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित हो रही है, जो उनके भविष्य के शिक्षक जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।
शिक्षा विभाग के अतिथि शिक्षकों के रूप मे भावना गौड़, अनुराधा जैन, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. आशा सेन, डॉ. नेमचंद तंबोली उपस्थित थे | कार्यक्रम का संचालन डॉ अंजु अग्रवाल ने किया |

error: Content is protected !!