“शिक्षा तभी सार्थक, जब समाज के हित में उतरे शोध” – प्रो सुरेश कुमार अग्रवाल
अजमेर, 24 अप्रैल।
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर एंटरप्रेन्योरशिप एंड स्मॉल बिजनेस मैनेजमेंट (CESBM) का 22वां स्थापना दिवस समारोह आज विश्वविद्यालय परिसर में गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर सुरेश कुमार अग्रवाल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की, जबकि चोयल इंडस्ट्रीज ग्रुप के उद्योगपति श्री राधे श्याम चोयल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत मे निदेशक डॉ आशीष पारीक ने केंद्र की स्थापना यात्रा और उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि CESBM ने पिछले 22 वर्षों में उद्यमिता शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। केंद्र से अब तक 1100 से अधिक विद्यार्थी MBA (Entrepreneurship, Family Business एवं E-commerce) जैसे दीर्घकालीन पाठ्यक्रमों से लाभान्वित हुए हैं, वहीं लगभग 1600 प्रतिभागियों ने लघुकालीन उद्यमिता विकास (EDP) एवं कौशल विकास (ESDP) कार्यक्रमों में प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इस अवसर पर 26 फरवरी 2026 को विश्वविद्यालय और CHARGE (Choyal Hub for Agribusiness Research Development and Entrepreneurship) के बीच हुए एमओयू का उल्लेख करते हुए बताया गया कि यह साझेदारी विद्यार्थियों के लिए शोध, नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने में मील का पत्थर सिद्ध होगी।
मुख्य अतिथि श्री राधे श्याम चोयल ने अपने संबोधन में कहा कि 22 वर्ष पूर्व जब इस केंद्र की स्थापना हुई थी, तब उद्यमिता का विचार बहुत सीमित था और अधिकांश युवा केवल नौकरी को ही लक्ष्य मानते थे। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवनयापन के साथ-साथ उन्हें समाज और राष्ट्र के लिए बड़े लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि वाणिज्य पृष्ठभूमि से होने के बावजूद उन्होंने स्वयं तकनीकी कौशल जैसे AutoCAD एवं 3D डिजाइन सीखे और मिलिंग उद्योग में नवाचार करते हुए छह पेटेंट विकसित किए, जो आज लगभग 22 देशों में उपयोग किए जा रहे हैं। उन्होंने भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और IoT आधारित उन्नत मशीनों के विकास की योजना भी साझा की, जिससे भारतीय तकनीक को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलेगी।
अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने शिक्षा और बाजार के बीच समन्वय को अत्यंत आवश्यक बताते हुए कहा कि यही समन्वय राष्ट्र को सशक्त बनाएगा। उन्होंने “विकसित भारत” की अवधारणा को चार स्तंभों—स्वस्थ, सतत, सुरक्षित एवं समृद्ध—पर आधारित बताते हुए विश्वविद्यालयों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि स्थापना दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन का भी दिन है, जहां संस्थान अपनी उपलब्धियों का मूल्यांकन करते हुए कमियों को दूर करने का संकल्प लेते हैं। उन्होंने “एक्शन रिसर्च” की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए कहा कि ऐसा शोध, जो सीधे समाज के हित में लागू हो, वही वास्तविक परिवर्तन का माध्यम बनता है। साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय में निरंतर सुधार के लिए विद्यार्थियों और शिक्षकों से फीडबैक प्रणाली लागू करने पर बल दिया।
कार्यक्रम के दौरान उद्यमिता से जुड़े विद्यार्थियों ने भी अपनी नवाचार आधारित प्रस्तुतियां दीं, जिनमें स्टार्टअप आइडियाज, बिजनेस मॉडल और तकनीकी समाधान शामिल थे। इन प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को और अधिक जीवंत एवं प्रेरणादायक बना दिया। अंत में केंद्र की सहायक निदेशक डॉ दीपिका उपाध्याया ने संस्थापक निदेशक सहित पूर्व कुलपतियों एवं योगदानकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया, जिनके मार्गदर्शन में यह केंद्र आज एक सशक्त उद्यमिता मंच के रूप में स्थापित हुआ है। कार्यक्रम मे बड़ी संख्या मे शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं अतिथि शिक्षक उपस्थित थे |